बिहार में अवैध खनन और बिना वैध कागजात के खनिज परिवहन पर रोक लगाने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग बड़े स्तर पर तकनीकी बदलाव की तैयारी में है। विभाग अगस्त महीने से एक नई डिजिटल निगरानी और कार्रवाई प्रणाली लागू करने की योजना बना रही है, जिसके तहत जिलों में तैनात खान निरीक्षकों को हैंडहेल्ड डिजिटल मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।
इन मशीनों की मदद से निरीक्षक मौके पर ही जांच कर सकेंगे। चालान काट सकेंगे और जुर्माने की राशि भी तत्काल वसूल कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से अवैध खनन, ओवरलोडिंग और बिना चालान खनिज परिवहन जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही कार्रवाई की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

अवैध खनन पर सख्ती की तैयारी
इसी चुनौती को देखते हुए खान एवं भूतत्व विभाग ने कार्रवाई को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर चर्चा हो चुकी है और अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
मौके पर ही होगी वाहन और दस्तावेजों की जांच
नई प्रणाली लागू होने के बाद खान निरीक्षक खनिज लदे वाहनों की जांच के दौरान हैंडहेल्ड मशीन का उपयोग करेंगे। मशीन के माध्यम से वाहन संख्या, खनिज की मात्रा, परिवहन चालान, परमिट और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जा सकेगा।
यदि जांच के दौरान किसी वाहन के पास वैध कागजात नहीं पाए जाते हैं या खनिज परिवहन नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो निरीक्षक तुरंत डिजिटल चालान जारी कर सकेंगे। इससे कार्रवाई के लिए अलग से कागजी प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ओवरलोडिंग और बिना चालान परिवहन पर रहेगा विशेष फोकस
खनन विभाग की नजर खास तौर पर उन वाहनों पर रहेगी जो निर्धारित सीमा से अधिक खनिज लेकर चल रहे हैं या बिना वैध चालान के खनिज परिवहन कर रहे हैं। विभाग का मानना है कि ऐसे मामलों से सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और खनन नियमों की भी अनदेखी होती है। नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए ऐसे वाहनों की पहचान तुरंत हो सकेगी और उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
जुर्माने की राशि भी मौके पर होगी जमा
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि नियम उल्लंघन करने वालों को जुर्माना जमा कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल मशीन के माध्यम से मौके पर ही जुर्माने की राशि जमा कराई जा सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। नकद लेन-देन की संभावना कम होगी और सभी भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।
मुख्यालय से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
खनन विभाग इस पूरी प्रणाली को ऑनलाइन मॉनिटरिंग नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी में है। इसका फायदा यह होगा कि किसी भी जिले में की गई कार्रवाई की जानकारी तत्काल विभागीय मुख्यालय तक पहुंच जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी यह देख सकेंगे कि किस जिले में कितने वाहनों की जांच हुई, कितने चालान जारी किए गए और कितनी राशि जुर्माने के रूप में वसूल की गई। इससे निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और जिलों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखी जा सकेगी।

कार्रवाई में देरी की समस्या होगी खत्म
वर्तमान व्यवस्था में कई बार जांच के बाद रिपोर्ट तैयार करने, कागजी कार्रवाई पूरी करने और चालान जारी करने में समय लग जाता है। इससे कार्रवाई की गति प्रभावित होती है।
नई डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद अधिकांश प्रक्रियाएं मौके पर ही पूरी हो जाएंगी। इससे कार्रवाई में तेजी आएगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ तुरंत कानूनी कदम उठाए जा सकेंगे।
अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
विभाग नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए अधिकारियों और खान निरीक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी तैयारी कर रहा है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें डिजिटल मशीनों के संचालन, डेटा एंट्री, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और जुर्माना वसूली की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा जिलों में तकनीकी सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है ताकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
विशेष अभियान चलाने की भी तैयारी
वहीं नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभाग राज्यभर में विशेष जांच अभियान भी चला सकता है। इसका उद्देश्य अवैध खनन और अवैध खनिज परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना होगा। विभाग चाहता है कि तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू होते ही इसका असर जमीन पर दिखाई दे और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के बीच सख्त संदेश जाए।
राजस्व बढ़ाने और पारदर्शिता लाने की उम्मीद
सरकार का मानना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से अवैध खनन पर नियंत्रण के साथ-साथ राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से हर कार्रवाई का पूरा ब्यौरा उपलब्ध रहेगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।







