ADVERTISEMENT
Thursday, July 30, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

गहरे भू-राजनीतिक संकटों और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा…………………

UB India News by UB India News
May 20, 2026
in केंद्रीय राजनीती
0
गहरे भू-राजनीतिक संकटों और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा…………………
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

ऐसे दौर में, जब पूरी दुनिया गहरे भू-राजनीतिक और आर्थिक संक्रमण से गुजर रही है तथा अनिश्चितताएं व तनाव अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा बदल रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और चार यूरोपीय देशों की यात्रा के व्यापक कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक निहितार्थ हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यूएई की यह आठवीं यात्रा भले ही संक्षिप्त रही हो, लेकिन इसे कई मायनों में फलदायी माना जा रहा है। इसकी विशेष अहमियत इसलिए भी थी, क्योंकि यूएई के ओपेक से अलग होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री वहां पहुंचे थे। इस दौरान, यूएई ने भारत में पांच अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई और दोनों देशों के बीच पेट्रोलियम व एलपीजी आपूर्ति तथा रक्षा क्षेत्र में हुए समझौते इसका संकेत हैं कि दोनों पारंपरिक संबंधों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में अग्रसर हैं। उल्लेखनीय है कि यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यूरोपीय देशों की यात्रा भारत व यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते के बाद हो रही है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा गया। दरअसल, यूरोप इस समय अमेरिका के साथ संबंधों में बढ़ती दरार और घटते विश्वास के बीच अपनी स्वतंत्र वैश्विक पहचान पुनर्परिभाषित करने में जुटा है। दूसरी ओर, भारत विनिर्माण, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से उभरती शक्ति के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे में यूरोपीय निवेश, तकनीक और विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकती है। नीदरलैंड, जो यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक और चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, के साथ संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का निर्णय उल्लेखनीय है। हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल स्वीडन के साथ संबंधों को भी रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति बनना भी महत्वपूर्ण है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी 43 वर्षों बाद नॉर्वे की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बने हैं। भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में आज उनकी हिस्सेदारी अपने आप में ऐतिहासिक है, जहां से अब इटली होते हुए वह लौटेंगे। स्पष्ट है कि तेजी से बहुध्रुवीय होती दुनिया में अमेरिका, चीन, रूस, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच शक्ति संतुलन बदल रहा है। ऐसे में, भारत ने अब तक रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपनाई है, जिसका मूल तत्व है कि भारत किसी एक शक्ति-गुट का हिस्सा बने बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप सभी देशों के साथ संबंध विकसित करे। प्रधानमंत्री मोदी का पांच देशों का यह छह दिवसीय दौरा इसी नीति की निरंतरता का प्रतीक है।

भारत-नॉर्वे ने पांच अहम समझौतों पर किए हस्ताक्षर

RELATED POSTS

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक संकट पर पीएम मोदी ने बुलाई अहम बैठक,

नए ‘एंटी पेपर लीक बिल’ से क्या-क्या बदल जाएगा, पुराने कानून से कितना अलग है?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘तीसरा इंडिया-नॉर्डिक समिट 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टाडॉटिर और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन भी समिट में शामिल होंगे।’

इससे पहले इंडिया-नॉर्डिक सम्मेलन के दो समिट हो चुके हैं, जिनमें पहला साल 2018 में स्टॉकहोम में और दूसरा 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हुआ था।। इसके जरिए भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्तों को और ज्यादा रणनीतिक रूप दिया जाएगा, खासकर टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, ग्रीन ट्रांजिशन, रिन्यूएबल एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, अंतरिक्ष और आर्कटिक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की उम्मीद है।

इंडिया-नॉर्वे समिट में हुए शामिल
समिट से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को ओस्लो में इंडिया-नॉर्वे बिजनेस और रिसर्च समिट में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने भारत-ईएफटीए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में 50 से ज्यादा कंपनियों के सीईओ और भारत और नॉर्वे के बिजनेस और रिसर्च क्षेत्र से जुड़े 250 से अधिक लोग शामिल हुए। इस दौरान भारतीय और नॉर्वियन संस्थाओं के बीच कई कारोबारी समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को अपनी पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में नॉर्वे पहुंचे। खास सम्मान दिखाते हुए नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे। भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर, नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गंगटे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी को नॉर्वे के विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को दिए जाने वाले सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया।

ऑफशोर विंड से लेकर ग्रीन टेक्नोलॉजी तक, भारत और नॉर्वे ने 5 बड़े रणनीतिक समझौतों पर किए हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने विज्ञान और तकनीक साझेदारी को मजबूत करते हुए पांच बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते ग्रीन एनर्जी, सतत विकास, समुद्री तकनीक, नवाचार और भू-विज्ञान सहयोग जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग मजबूत करना, उद्योग और स्टार्टअप भागीदारी बढ़ाना, शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और सतत विकास परियोजनाओं को तेजी देना है।

सबसे अहम समझौतों में से एक डीएसआईआर/सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) और नॉर्वे की रिसर्च काउंसिल ऑफ नॉर्वे (आरसीएन) के बीच हुआ, जिसके तहत रिसर्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, इनोवेशन और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाया जाएगा। समझौते में संयुक्त कार्यशालाएं, रिसर्च एवं डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, वैज्ञानिकों के एक्सचेंज प्रोग्राम और जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की व्यवस्था शामिल है।

इसके अलावा, सीएसआईआर ने नॉर्वे की प्रमुख स्वतंत्र रिसर्च संस्था एसआईएनटीईएफ के साथ 2026-2029 के लिए एक नया सहयोग समझौता भी किया। यह साझेदारी सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबिलिटी ट्रांजिशन पर केंद्रित होगी, जिसके तहत बायो-बेस्ड मैटेरियल, ओशन एनर्जी, ऑफशोर विंड, कार्बन कैप्चर, स्टोरेज और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च और इनोवेशन कार्यक्रम चलाए जाएंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण समझौते के तहत कई सीएसआईआर संस्थानों ने एसआईएनटीईएफ संस्थाओं के साथ समुद्री ऊर्जा और ऑफशोर विंड एनर्जी तकनीकों पर प्रोजेक्ट आधारित सहयोग समझौता किया।

इस सहयोग में सीएसआईआर-स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर, सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज, सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी और सीएसआईआर-फोर्थ पैराडाइम इंस्टीट्यूट शामिल हैं। वहीं नॉर्वे की ओर से एसआईएनटीईएफ ओशन, एसआईएनटीईएफ डिजिटल, एफएमई नॉर्थविंड और एसआईएनटीईएफ कम्युनिटी इस साझेदारी का हिस्सा होंगे। इस संयुक्त कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की ऑफशोर रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को मजबूत करना और देश के नवीकरणीय ऊर्जा तथा कार्बन न्यूट्रैलिटी लक्ष्यों को समर्थन देना है। इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लोटिंग ऑफशोर विंड टेक्नोलॉजी, ऊर्जा लागत कम करना, सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड, ईएसजी फ्रेमवर्क, पायलट प्रोजेक्ट, स्किल डेवलपमेंट और औद्योगिक विकास पर काम किया जाएगा।

इस पहल के लिए सीएसआईआर लगभग 3.41 करोड़ रुपए की फंडिंग सहायता देगा। इसके अलावा, “ग्रीन शिफ्ट के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार सहयोग” शीर्षक से एक संयुक्त घोषणा पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सीएसआईआर, एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर) और नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनटीएनयू) के बीच हुआ। इस घोषणा पत्र में सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर इकोनॉमी, ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। इसके तहत छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त रिसर्च गतिविधियां, अकादमिक सेमिनार और साझा शैक्षणिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

‘सहयोग से ही संभव है टिकाऊ विकास और औद्योगिक बदलाव’

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत-स्वीडन साझेदारी इस साझा विश्वास को दर्शाती है कि सरकारों, उद्योगों, इनोवेटर्स और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से औद्योगिक परिवर्तन को आगे बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने एक प्रभावशाली लेख लिखा है, जिसमें टिकाऊ विकास, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार आधारित प्रगति को लेकर दोनों देशों की साझा सोच को सामने रखा गया है।

‘भारत और स्वीडन: विकास, लचीलापन और स्थिरता एक साथ हासिल करना…’ शीर्षक वाले इस लेख में कहा गया है कि मौजूदा समय में दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितता, ऊर्जा असुरक्षा और आर्थिक विभाजन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में देशों के सामने दो विकल्प हैं—या तो वे केवल अपने सीमित राष्ट्रीय हितों तक सिमट जाएं या फिर ऐसे वैश्विक सहयोग को मजबूत करें जो विकास, स्थिरता और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित कर सके। लेख में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद की अहमियत पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गई है। साथ ही, वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत भी महसूस की जा रही है ताकि वे वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप काम कर सकें।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’: नया इतिहास रचने जा रहा भारत, होगा 21वीं सदी का महत्वपूर्ण निर्णय- पीएम मोदी

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक संकट पर पीएम मोदी ने बुलाई अहम बैठक,

by UB India News
July 28, 2026
0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम को प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे. बताया जा रहा...

नए ‘एंटी पेपर लीक बिल’ से क्या-क्या बदल जाएगा, पुराने कानून से कितना अलग है?

नए ‘एंटी पेपर लीक बिल’ से क्या-क्या बदल जाएगा, पुराने कानून से कितना अलग है?

by UB India News
July 28, 2026
0

पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क की लड़ाई अब संसद में आ गई है। पेपर लीक कानून को और ताकतवर बनाने...

मन की बात में PM मोदी का वैज्ञानिक ताकत और अंतरिक्ष उपलब्धियों पर जोरदार संदेश ………………..

मन की बात का आज 136वां एपिसोड, PM मोदी ने कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को किया याद

by UB India News
July 27, 2026
0

पीएम मोदी ने रविवार को 'मन की बात' के 136वें एपिसोड को संबोधित किया। उन्होंने सबसे पहले कारगिल विजय दिवस...

यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री के मंच से पीएम मोदी का दमदार संदेश………………..

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर नीट पेपर लीक के दोषियों को सजा देंगे; CJP प्रोटेस्ट पर PM मोदी का ऐलान

by UB India News
July 24, 2026
0

नीट पेपर लीक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान सामने आया है. पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करके अपनी...

बच्चों को भड़काने के बजाय उन्हें सही रास्ता दिखाएं ,पेपर लीक दोबारा नहीं होना चाहिए …………………

बच्चों को भड़काने के बजाय उन्हें सही रास्ता दिखाएं ,पेपर लीक दोबारा नहीं होना चाहिए …………………

by UB India News
July 22, 2026
0

संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक 'मंगल मिलन' संसद पुस्तकालय भवन के जी.एम.सी....

Next Post
बिहार एनडीए की राजनीति के अंदरखाने वफादारी का सवाल!

बिहार की सियासत में एनडीए के भीतर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन !...................

भारत ने अक्टूबर में कितना खरीदा रूसी तेल, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

जब बात तेल और ताकत की होगी, तो भारत किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा................

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend