बिहार की सियासी राजनीति में इन दिनों बहुत कुछ शोर शराबे के बिना हो जा रहा है। वह भी ऐसे कि दाएं हाथ से लिया गया फैसला बाएं हाथ को ही पता नहीं चल रहा। राजनीतिक गलियारे में चल रही चर्चा को मानें तो अभी एक और पॉलिटिकल धमाका होना बाकी है। हालांकि यह बदलाव वाला धमाका तो उसी दिन हो गया था जब जदयू से शिक्षा विभाग ले लिया गया और बदले में बीजेपी ने स्वास्थ्य विभाग दे दिया। लेकिन इसी दिन कई और फैसले हुए। कुछ उस दिन को लेकर सूत्र बताते हैं कि एक और निर्णय होना अभी बाकी ही है। सूत्रों से मिली जानकारी के विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद् के सभापति को शायद पेच फंस गया है। इसलिए पब्लिक डोमेन में कुछ भी नहीं आया। चलिए जानते हैं कि उस दिन बदलाव का पहिया कहां-कहां चला।
स्वास्थ्य बनाम शिक्षा
जबसे एनडीए की सरकार बिहार में रही, शिक्षा विभाग हमेशा जदयू के पास रहा और स्वास्थ्य विभाग बीजेपी के पास। स्वास्थ्य महकमे में सुधार की नींव सबसे पहले चंद्रमोहन राय ने संभाली। इसके बाद नंदकिशोर यादव और फिर लगातार मंगल पांडेय स्वास्थ्य मंत्री रहे। बीच में महागठबंधन की सरकार में तेज प्रताप और तेजस्वी भी रहे। पर इस बार एक बड़ा फेरबदल हुआ। संभवतः निशांत कुमार को ले कर शिक्षा विभाग बनाम स्वास्थ्य विभाग की अदला-बदली की गई। खासतौर पर निशांत कुमार तो हेल्थ डिपार्टमेंट का महत्व और सिस्टम समझने के लिए लगातार दफ्तर आ रहे हैं। यहां तक कि शनिवार को भी ऑफिस का ताला खुलवाया और कई सख्त निर्देश भी जारी किए।
विधानसभा अध्यक्ष/ विधानपरिषद् सभापति पर पेंच
एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के साथ स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के साथ साथ विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद् के सभापति पद को ले कर भी बात हुई। सूत्र बताते हैं कि बीजेपी को विधानसभा अध्यक्ष पद के बदले में विधान परिषद् में सभापति पद देने को लेकर बारगेनिंग हो रही है। ऐसे में बीजेपी ने संभवतः विधानपरिषद सभापति का पद नहीं लेने का मन बना लिया है। हो सकता है कि विधानसभा सत्र शुरू होने के साथ ही इसका खुलासा हो। वर्तमान में विधानपरिषद् सभापति के पद पर अभी अवधेश नारायण सिंह हैं। अब देखना यह है कि यह फैसला कब और किन हालात में होता है।
और भी बड़े फैसले हुए
श्रेयसी सिंह को उद्योग और बुलो मंडल को ऊर्जा विभाग देना भी किसी बड़े परिवर्तन के संकेत हैं। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिथिलेश तिवारी, उच्च शिक्षा और विभाग संजय टाइगर को दे कर भी चौंकाया गया है। विजय सिन्हा से राजस्व विभाग लिया गया तो उसे दिलीप जायसवाल को दे दिया गया। दिलीप जायसवाल के पास जो पथ निर्माण विभाग था, उसे इंजीनियर शैलेन्द्र को दे दिया गया।







