पवन खेड़ा को राहत मिल चुकी है. पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से ने अग्रिम जमानत दे दी है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ लक्ष्मण रेखा खींच दी है. सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी है. पवन खेड़ा को जब भी पुलिस बुलाएगी, उन्हें थाना जाना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि पवन खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और जब भी पुलिस उन्हें बुलाएगी, उन्हें संबंधित थाने में उपस्थित होना पड़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि पवन खेड़ा किसी भी तरह से सबूतों को प्रभावित या उनके साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे. साथ ही, बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार भी दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शर्तें लागू कर सकता है.
सुप्री्म कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका मामले के अंतिम फैसले से कोई संबंध नहीं होगा. ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से आगे की कार्रवाई करेगा. गौरतलब है कि पवन खेड़ा के खिलाफ असम पुलिस ने मानहानि और जालसाजी का केस दर्ज किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या टिप्पणी की?
- जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा देने से मना कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच ईमानदारी से होनी चाहिए, लेकिन संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मिली व्यक्तिगत आजादी को हल्के में नहीं लिया जा सकता.
- जस्टिस माहेश्वरी की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, ‘एंटीसिपेटरी बेल की अर्जी पर फैसला करते समय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में राज्य के हित और आर्टिकल 21 के तहत व्यक्ति के व्यक्तिगत आज़ादी के मौलिक अधिकार के बीच सावधानी से बैलेंस बनाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रिमिनल प्रोसेस को ऑब्जेक्टिविटी और सावधानी के साथ लागू किया जाना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि पॉलिटिकल दुश्मनी से प्रभावित कार्रवाई से आज़ादी खतरे में न पड़े.
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमारी राय है कि इस मामले में, आरोप और जवाबी आरोप, पहली नज़र में पॉलिटिक्स से मोटिवेटेड लगते हैं और ऐसी दुश्मनी से प्रभावित लगते हैं, न कि ऐसी स्थिति का खुलासा करते हैं जिसके लिए कस्टोडियल पूछताछ की ज़रूरत हो.’







