बिहार में उद्योग और रोजगार के मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी है। राज्य के अलग-अलग जिलों में फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, रिसाइक्लिंग और मखाना प्रोसेसिंग की नई इकाइयां लगने जा रही हैं। उद्योग विभाग ने इसके लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इन प्रोजेक्ट्स पर लगभग 150 करोड़ रुपए खर्च होंगे। खास बात यह है कि इनसे 3200 लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा। इन फैक्ट्रियों में साल 2027 से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि बिहार में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए निवेशकों को पारदर्शी तरीके से जमीन दी जा रही है। बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाएं हमारी प्राथमिकता हैं। हाजीपुर में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगेगी। यहां बिस्किट, ब्रेड, टोस्ट और चिप्स जैसे उत्पाद बनेंगे। मुजफ्फरपुर में टेक्सटाइल हब विकसित होगा, जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कपड़े तैयार होंगे। पूर्णिया में मखाना प्रोसेसिंग यूनिट और दरभंगा में एक विशाल रिसाइक्लिंग यूनिट स्थापित की जाएगी। दरभंगा में 12.96 एकड़ में रिसाइक्लिंग प्लांट लगेगा। इस पर 126 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है प्रश्न: इन यूनिट्स से कुल कितना निवेश आ रहा है? उत्तर: इन प्रमुख परियोजनाओं पर लगभग 150 करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्रश्न: सबसे ज्यादा रोजगार किस सेक्टर में मिलेगा? उत्तर: मुजफ्फरपुर की टेक्सटाइल यूनिट में 1500 लोगों को सीधी नौकरी मिलेगी। प्रश्न: उत्पादन कब से शुरू होने की संभावना है? उत्तर: फैक्ट्रियों में निर्माण कार्य के बाद 2027 से उत्पादन शुरू होगा। प्रश्न: हाजीपुर की यूनिट में क्या बनेगा? उत्तर: वहां बिस्किट, टोस्ट, ब्रेड, कुरकुरे और नमकीन तैयार किए जाएंगे। प्रश्न: रिसाइक्लिंग यूनिट से पर्यावरण को क्या और किस तरह का फायदा होगा? उत्तर: दरभंगा का 40 किमी क्षेत्र कचरा मुक्त होगा और प्लास्टिक का दोबारा इस्तेमाल हो सकेगा।
‘प्रोसेसिंग हब’ बनने की दिशा में राज्य बिहार अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं, बल्कि एक ‘प्रोसेसिंग हब’ बनने की दिशा में है। कच्चे माल (जैसे मखाना और अनाज) की उपलब्धता और प्रचुर श्रम शक्ति के कारण कंपनियां बिहार को निवेश के लिए चुन रही हैं। यदि उत्पादन और लॉजिस्टिक्स का यह तालमेल सफल रहा, तो 2027 तक बिहार उत्तर भारत का नया मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनकर उभरेगा।







