विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अब तक 5.38 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम लिस्ट से कट चुके हैं। बड़ी बात यह है कि इनमें चुनावी प्रदेशों जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुड्डुचेरी भी शामिल हैं। SIR की वजह से उत्तर प्रदेश में भी 2 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम लिस्ट से काटे गए हैं। 28 अक्टूबर, 2025 से SIR चल रहा था, जिसके बाद वोटरों में 10.56 फीसदी की कमी आ चुकी है। बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या SIR से बीजेपी को फायदा होगा? या नुकसान तो नहीं उठाना पड़ेगा?
यूपी में अब रह गए 13.39 करोड़ वोटर्स
खास बात यह है कि यूपी की फाइनल इलेक्टोरल लिस्ट शुक्रवार को जारी हो गई। इसके मुताबिक, अब यूपी में 13.39 करोड़ वोटर्स ही रह गए हैं। SIR से पहले यहां पर 15.44 करोड़ वोटर्स थे। SIR के बाद यूपी में 2.04 वोटरों के नाम काटे जा चुके हैं।
यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में कितने वोटरों के नाम कटे
- SIR के बाद यूपी में 2.04 करोड़, पश्चिम बंगाल में 91 लाख वोटरों के नाम चुनावी लिस्ट से काटे गए हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में वोटरों के नाम में 16.9 फीसदी कटौती हुई।
- यूपी और गुजरात में 13-13 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 12 फीसदी, तमिलनाडु में 11.5 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 11.7 फीसदी वोटरों के नाम कटे।
केरल-तमिलनाडु में महिला वोटर ज्यादा तो यूपी में कम
- केरल इकलौता ऐसा राज्य रहा, जो वोटरों के नाम कटने के मामले में दहाई के अंक तक नहीं पहुंचा। यहां पर केवल 2.7 फीसदी वोटरों के नाम काटे गए।
- SIR 2.0 के मुताबिक, तमिलनाडु, केरल, पुड्डुचेरी और गोवा में महिला वोटर्स की संख्या काफी ज्यादा रही। यहां लिंगानुपात भी ज्यादा है। वहीं, यूपी इस मामले में सबसे निचले पायदान पर रहा।
SIR में सबसे ज्यादा किनके नाम कटे
- SIR में सबसे ज्यादा वोटरों के नाम शहरी क्षेत्रों से कटे हैं। सबसे बड़ी वजह माइग्रेशन है। इसके अलावा, कुछ के अनुपस्थित रहने, शिफ्ट होने, मृत होने की वजह से भी कई वोटरों के नाम कटे हैं। 1.46 करोड़ वोटर्स मृत पाए गए।
- वहीं, 4.6 करोड़ वोटरों ने अपना आवास बदल लिया था। वहीं, 44 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम इसलिए काटे गए, क्योंकि उन्होंने कई जगहों पर अपना नाम दर्ज करा रखा था।
बंगाल में 27 लाख वोटरों के नाम का मिलान नहीं
- पश्चिम बंगाल में 27 लाख वोटर्स के नाम इसलिए काट दिए गए, क्योंकि 2002 के इलेक्टोरल रोल्स से उनके नाम का मिलान नहीं हो पाया। यूपी में जनवरी में ड्रॉफ्ट रोल आया था, जिसमें 18.7 फीसदी काटे गए थे।
- मगर, बाद में कई दावे और आपत्तियों के बाद 84.28 लाख नाम और जोड़े गए। सबसे ज्यादा प्रयागराज, लखनऊ, बरेली, गाजियाबाद और जौनपुर में नाम वोटर लिस्ट में जोड़े गए।
- फाइनल रोल में 13.39 करोड़ वोटर हो गए हैं। इनमें 7.3 करोड़ पुरुष, 6.09 करोड़ महिलाओं और 4,206 थर्ड जेंडर्स के नाम वोटरों में शामिल हैं।
SIR का किसे होगा फायदा, किसे नुकसान
- सीनियर एडवोकेट और एक्सपर्ट प्रशांत भूषण ने ‘द फेडरल’ को दिए एक इंटरव्यू में बीजेपी पर आरोप लगाया कि SIR कानूनी तौर पर अवैध है। इसे मुस्लिमों को वोटर लिस्ट से बाहर करने के लिए लाया गया है। कुछ एक्सपर्ट इसे असली वोटरों के आंकड़ों के लिहाज से ठीक बताते हैं तो कुछ कहते हैं कि ये सत्तारूढ़ बीजेपी का चुनाव जीतने का हथकंडा है।
- पश्चिम बंगाल में जब SIR में वोटरों के नाम कटे तो भड़कीं ममता बनर्जी ने कहा-अगर एक वोट भी रहा तो भी मैं भवानीपुर से जीतूंगी। वहीं, 14 मार्च को कोलकाता में एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीी ने कहा था-तृणमूल कांग्रेस नहीं चाहती है कि वोटर लिस्ट की जांच की जाए, ताकि गैरकानूनी घुसपैठियों के नाम बरकरार रहें। वो मृतकों के नाम भी वोटर लिस्ट में चाहती हैं। उन्होंने कहा-तृणमूल हिंदुओं को अपना वोट बैंक नहीं मानती है।







