क्यों हुई नाटो की स्थापना?
दूसरे विश्व युद्ध के बाद नाटो का गठन मुख्य रूप से यूरोप में सोवियत संघ (रूस) के विस्तार को रोकने के लिए बनाया गया था। नाटो के पहले महासचिव लॉर्ड इस्मेय के मुताबिक, इस गठबंधन का मकसद रूस को बाहर रखना, अमेरिकियों को गठबंधन में रखना और युद्ध के बाद जर्मनी की बढ़ती ताकत को दबा कर रखना था।
अभी कौन हैं नाटो के सदस्य?
वर्तमान में नाटो में 32 सदस्य देश हैं। 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद पूर्वी यूरोप के कई देश इसमें शामिल हुए। इसके बाद 2023 में जब रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमला किया गया तो दशकों तक तटस्थ रहे फिनलैंड (अप्रैल 2023) और स्वीडन (मार्च 2024) भी इसके सदस्य बन गए।
क्या है इस संगठन के काम करने का तरीका?
नाटो की अपनी कोई स्थायी सेना नहीं है, लेकिन सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान सामूहिक सैन्य कार्रवाई करते हैं और संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। सदस्य देशों के लिए यह अलिखित नियम भी हैं कि वे अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का कम से कम 2% हिस्सा रक्षा पर खर्च करें, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के सम्मेलनों में इस लक्ष्य को बढ़ाकर 3.5% से 5% तक बढ़ाने को लेकर दबाव बनाया, जिसके बाद अधिकतर देशों ने अपने योगदान को बढ़ाने पर सहमति भी जताई।
ट्रंप कब से और क्यों इस गठबंधन से बाहर निकलना चाह रहे?
ऐसा नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो गठबंधन से अमेरिका को बाहर निकलने की बात रूस-यूक्रेन संघर्ष या ईरान युद्ध के शुरू होने के बाद कही है। वे अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) के समय से ही नाटो को छोड़ने की बात करते आ रहे हैं।
शुरुआती दौर: जब डोनाल्ड ट्रंप 2016 में पहली बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे, तब उन्होंने नाटो को अप्रचलित करार दिया था।
2019-2020 के बयान: पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के मुताबिक, अगस्त 2019 में ट्रंप ने नाटो को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। इसके अलावा, 2020 में उन्होंने यूरोपीय आयोग (ईसी) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से साफ तौर पर कहा था कि नाटो मर चुका है, और हम इससे बाहर निकल जाएंगे।
मौजूदा स्थिति (दूसरा कार्यकाल): अपने दूसरे कार्यकाल में भी ट्रंप नाटो के सख्त आलोचक बने हुए हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में सहयोगी देशों द्वारा समर्थन न देने के बाद, ट्रंप ने नाटो को कागज का शेर कहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि अमेरिका का इस रक्षा समझौते से बाहर निकलना अब पुनर्विचार के दायरे में ही नहीं है।
क्या ट्रंप वाकई में अमेरिका को नाटो से निकाल सकते हैं?
1. संसदीय मंजूरी की जरूरत
2023 में सीनेटर (उच्च सदन के सांसद) टिम केन और मार्को रुबियो (अब विदेश मंत्री) ने एक कानून पेश किया था, जिसे वित्तीय वर्ष 2024 के नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट के हिस्से के रूप में पारित किया गया। इसे तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन के हस्ताक्षर के बाद कानून के रूप में मान्यता मिल गई थी। इस कानून के स्पष्ट प्रावधानों के तहत, नाटो से बाहर निकलने के किसी भी राष्ट्रपति के फैसले के लिए सीनेट में कम से कम दो-तिहाई बहुमत की स्वीकृति या कांग्रेस (संसद के दोनों सदनों) के एक विशेष अधिनियम की मंजूरी होना अनिवार्य है।
2. सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई
3. चुपचाप दूर होने का विकल्प
कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भले ही कोई राष्ट्रपति कानूनी बाधाओं के कारण औपचारिक रूप से नाटो न छोड़ पाएं, लेकिन वे बिना निकले ही इस गठबंधन को कमजोर कर सकते हैं। वे क्वाइट क्विटिंग यानी चुपचाप गठबंधन से दूरी बना लेने का रास्ता अपना सकते हैं। इसका मतलब है कि आधिकारिक तौर पर गठबंधन में रहते हुए भी अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक जिम्मेदारियों को निभाने से पीछे हट सकता है।







