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बिहार में केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में हड़ताल

UB India News by UB India News
February 12, 2026
in पटना, बिहार
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बिहार में केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में हड़ताल
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’29 श्रम कानून की जगह लाए जा रहे नए श्रमिक कोड के विरोध में मंगलवार को दिल्ली में 10 केंद्रीय श्रमिक यूनियनों की बैठक हुई। उसके बाद नए श्रम कानूनों का विरोध करने का निर्णय लिया गया।’ उपरोक्त बयान बैंक ऑफ इंडिया एम्पलाई यूनियन के महासचिव प्रफुल्ल कुमार ने मीडिया से बातचीत में दी। ध्यान रहे कि 10 सूत्री मांगों को लेकर बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। कुल मिलाकर 38 करोड़ श्रमिक आज हड़ताल पर हैं। केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। इसके तहत प्रदेश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

बिहार में बैंक बंद
यूनियन के मुताबिक प्रमुख मांगों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को मजबूत बनाया जाए। बैंक, एलआईसी और जीआईसी के निजीकरण पर रोक लगे। बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश को वापस लिया जाए। आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रेक्ट जॉब पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा भी कई मांगें हैं। इसमें ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने अपने सदस्यों से 12 फरवरी को होने वाली हड़ताल में भाग लेने का आग्रह किया है। ये यूनियनें विरोध प्रदर्शन के लिए 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ हाथ मिला रही हैं।

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केंद्र सरकार मजदूर विरोधी- यूनियन
ध्यान रहे कि ट्रेड यूनियनों के एक समूह ने 9 जनवरी को केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के प्रति अपना विरोध जताने के लिए राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने मीडिया को बताया है कि आज यानी 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल के कारण बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जल आपूर्ति जैसी सेवाएं प्रभावित होंगी। उन्होंने बताया कि सभी बैंक यूनियनें हड़ताल में शामिल नहीं होंगी क्योंकि उनका संयुक्त मोर्चा 27 जनवरी को पहले ही हड़ताल पर जा चुका है। हालांकि, एआईबीईए, एआईबीओए और बीईएफआई जैसी बैंक कर्मचारी यूनियनें विरोध प्रदर्शन में भाग लेंगी।

बीमा क्षेत्र के कर्मचारी भी शामिल
इसके अलावा, कौर ने कहा कि खनन और गैस पाइपलाइन क्षेत्रों पर भी आंदोलन का प्रभाव पड़ने की आशंका है। बीमा क्षेत्र के कर्मचारी सरकार के इस क्षेत्र में 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने के फैसले और नए श्रम कानूनों के लागू होने के विरोध में प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, निजी और सरकारी परिवहन कंपनियों के बड़ी संख्या में कर्मचारी भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार कम से कम 30 करोड़ कर्मचारी हड़ताल में भाग लेंगे और लगभग 600 जिलों पर इसका असर पड़ने की आशंका है। पिछले साल 9 जुलाई को हुई इसी तरह की हड़ताल में लगभग 25 करोड़ कर्मचारियों ने हिस्सा लिया था, जिससे लगभग 550 से अधिक जिले प्रभावित हुए थे। कौर के अनुसार, विभिन्न जिलों के श्रम आयुक्तों ने श्रमिक संघ के नेताओं से उनकी समस्याओं पर चर्चा करने के लिए बैठकें बुलाई हैं, लेकिन गुरुवार का आंदोलन मंच द्वारा तय योजना के अनुसार ही होगा।

38 करोड़ श्रमिकों की हड़ताल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने बताया कि देशभर में लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 12 फरवरी को एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल निजीकरण, विद्युत संशोधन विधेयक 2025, प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 के विरोध में और बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर बुलाई गई है। दुबे ने कहा कि पहली बार संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनें बिजली कर्मचारियों के समर्थन में इस हड़ताल में शामिल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों, इंजीनियरों, श्रमिकों और किसानों की भागीदारी के साथ, 12 फरवरी की यह हड़ताल स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाइयों में से एक बनने की उम्मीद है।

नए श्रम कानून का विरोध
उन्होंने आगे कहा कि हड़ताल की प्रमुख मांगों में से एक है आउटसोर्सिंग को रोकना, नियमित पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरना और मौजूदा आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों को नियमित करना। AIPEF ने चिंता व्यक्त की है कि बिजली क्षेत्र (वितरण, उत्पादन और पारेषण) का निजीकरण गरीब उपभोक्ताओं, लघु एवं मध्यम उद्योगों और आम जनता के हितों के खिलाफ है। इसलिए, दुबे ने कहा कि विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 और प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उधर, कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों को सूचित कर दिया है कि हड़ताल के कारण पूरे भारत में शाखाओं और प्रशासनिक कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हो सकता है।

संयुक्त किसान मोर्चा भी शामिल
संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रेड यूनियनों की मांगों को पूर्ण समर्थन दिया है, जबकि कृषि श्रमिक संघों का संयुक्त मोर्चा हड़ताल में शामिल हो रहा है, जो ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना एमजीएनआरईजीए को बहाल करने और विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को वापस लेने की मांग कर रहा है। उनकी मांगों में चार श्रम संहिताओं को रद्द करना, मसौदा बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक को वापस लेना और ‘भारत के परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम’ को वापस लेना भी शामिल है। संयुक्त मंच के सदस्यों में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, SEWA, AICCTU LPF और UTUC शामिल हैं। वहीं, TUCC (ट्रेड यूनियन समन्वय केंद्र) ने हड़ताल के आह्वान को पूरी तरह निराधार, अनुचित और राष्ट्रीय हित के विरुद्ध बताते हुए खारिज कर दिया है।

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