राज्य में पोषणयुक्त चावल (एफआरके) की कमी है। इसके चलते पैक्स, मिलर और किसान सब परेशान हैं। पैक्सों को लोन का पैसा नहीं लौट रहा है। इस चलते वह किसानों का धान लौटा दे रहे हैं या बिना भुगतान के धान ले रहे हैं। वहीं, मिलर को घाटे का डर सता रहा है। यही कारण है कि इस वर्ष अब तक पिछले साल की तुलना में आधा चावल ही खाद्य निगम को जा पाया है। खरीद की रफ्तार भी सुस्त बनी हुई है।
इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मजबूरी में किसान औने-पौने दाम में बाजार में धान बेचने को मजबूर हैं। दरअसल, पोषणयुक्त चावल उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी एक निजी एजेंसी को दी गई है। एजेंसी से मिले एफआरके की जांच दिल्ली लैब में कराने के बाद ही चावल गोदाम में जमा होना है। जांच की प्रक्रिया में दस से पंद्रह दिनों का समय लग रहा है। कई बार सैंपल फेल हो जा रहे हैं। इसी कारण निजी एजेंसी पैक्सों और मिलरों को एफआरके उपलब्ध नहीं करा पा रही है। सहकारिता विभाग को राज्य के सभी जिलों से इसकी शिकायत मिल रही है। पैक्सों ने सहकारिता विभाग और खाद्य आपूर्ति विभाग से इस समस्या का अविलंब हल निकालने की भी मांग की है।
हालांकि, धान खरीद प्रक्रिया शुरू होने के तीन माह बाद भी इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। केंद्र सरकार का मामला कहकर खाद्य आपूर्ति और सहकारिता विभाग के पदाधिकारी पल्ला झाड़ ले रहे हैं। यदि समय रहते समस्या हल नहीं हुई तो किसानों को धान के समर्थन मूल्य का फायदा नहीं मिलेगा। राज्य को धान खरीद का लक्ष्य पाना मुश्किल होगा। इस वर्ष 36.85 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य है। अभी तक 22.85 लाख एमटी ही खरीद हो पाई है। गौरतलब हो कि धान खरीद 28 फरवरी तक होनी है।
किसान और पैक्स भुगत रहे खामियाजा:
एफआरके की कमी का खामियाजा किसानों और पैक्सों दोनों को भुगतना पड़ रहा है। पूरे राज्य में धान कुटाई बाधित है। खरीदा गया धान पैक्सों के गोदाम में पड़ा है। खरीदे गए धान का चावल जमा करने के बाद ही पैक्सों को लोन (सीसी) का पैसा वापस मिलता है।
एफआरके की कमी के चलते राज्य में पिछले वर्ष की तुलना में आधा चावल ही जमा हो पाया है। पिछले वर्ष इस समय तक करीब 6.5 लाख एमटी चावल एसएफसी के गोदाम में जमा हो गया था। इस वर्ष अभी तक 2.85 लाख मीट्रिक टन चावल ही गोदाम में जमा हो पाया है। बता दें कि धान की मात्रा का 67 फीसदी चावल एसएफसी के गोदाम में जमा होता है। पैक्सों को सहकारी बैंक की ओर से खरीद लक्ष्य का 60-70 फीसदी लोन मिल चुका है।
एफआरके की किल्लत थी, अब आपूर्ति शुरू हुई है। एक सप्ताह में आपूर्ति सुचारू हो जाएगी। जो दिक्कत हुई है, उसकी भरपाई की जाएगी। चावल आपूर्ति की तिथि और लक्ष्य बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
-प्रमोद कुमार, मंत्री,
सहकारिता विभाग







