Pariksha Pe Charcha 2026 का आयोजन शुरू हो चुका है। इस साल परीक्षा पे चर्चा का नौवां एडिशन आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह 10 बजे छात्रों से सीधे संवाद कर रहे हैं और उन्हें एग्जाम के स्ट्रेस से निपटने के लिए टिप्स दे रहे हैं। प्रधानमंत्री देश भर के एग्जाम वॉरियर्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। परीक्षा पे चर्चा शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसे पीएम मोदी छात्रों से सीधे संवाद करते हैं। इसमें वह बोर्ड एग्जाम से पहले स्कूल स्टूडेंट्स से बातचीत करते हैं। वह एग्जाम स्ट्रेस, तैयारी, टाइम मैनेजमेंट और दूसरी चीजों से जुड़े कई टॉपिक पर बात करते हैं। बता दें कि पिछले वर्षों में ‘परीक्षा पे चर्चा’ प्रोग्राम मुख्य रूप से दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित होता रहा है। लेकिन अब इसके आयोजन के तरीके में बदलाव आया है। इस साल इंटरैक्टिव सेशन गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और दिल्ली में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर एग्जाम वॉरियर्स के साथ हुए।
इस साल कुल 4,50,13,379 लोगों ने हिस्सा लिया है। इनमें से 4,19,14,056 छात्र, 24,84,259 शिक्षक और 6,15,064 माता-पिता ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के YouTube चैनल, दूरदर्शन (DD) और शिक्षा मंत्रालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टेलीकास्ट किया जाएगा। ‘परीक्षा पे चर्चा’ से जुड़े लेटेस्ट अपडेट के लिए आप सभी इस लाइव ब्लॉग के साथ बने रहें।
पीएम मोदी के टॉप 5 ‘एग्जाम मंत्र’
- परीक्षा को उत्सव की तरह मनाएं.
- प्रतिस्पर्धा खुद से, न कि दूसरों से.
- डिजिटल फास्टिंग: तकनीक का सही उपयोग.
- मुश्किल काम पहले निपटाएं.
- एग्जाम वॉरियर बनें, रट्टू तोता नहीं.
ईशा ने सुनाई गजब की कविता
परीक्षा पे चर्चा 2026 कार्यक्रम के पहले एपिसोड में ईशा शैलेश पटेल ने शानदार कविता सुनाई-
हम सबके अरमान हैं आप
भारत मां के केवट हैं आप
भारत वर्ष
वंचितों के हमराही हैं
भारत मां की जय
आप साधना पुरुष
भारत के सपनों के मोदी हो
सपने न देखना गुनाह है
एक स्टूडेंट पद्मा के जवाब पर पीएम मोदी ने कहा कि सपने न देखना क्राइम है. सपने देखने ही चाहिए. सपनों को गुनगुनाते रहना कभी काम नहीं आता है. इसलिए जीवन में कर्म को प्रधान देना चाहिए. मैं जहां हूं, वहां मुझे सफल होना है. मुझे पढ़ना चाहिए. एस्ट्रोनॉट बनना है तो उसके बारे में पढ़ना-समझना चाहिए. ध्यान रखिए, आपको खाद-पानी मिलता रहता है. औरों को बताने से फायदा नहीं है.
माता-पिता सपने को गंभीरता से नहीं लेते, क्या करूं?
एक स्टूडेंट मृदुल वर्मन ने परीक्षा पे चर्चा के दौरान कहा- छोटे घर और काम-काज के बीच पढ़ना मुश्किल हो जाता है. माता पिता उतनी गंभरता से हमारा सपना नहीं लेते. इस पर पीएम मोदी ने कहा- एक पिताजी बैलगाड़ी में अपना सामान लेकर जा रहे थे. बच्चा सामान के उपर बैठा हुआ था. अपनी किताब खोल रहा था. अपने कंफर्ट की चिंता नहीं कर रहा था. कुछ लोग होते हैं न, कमरा ठीक नहीं हो तो नींद नहीं आती. ये जो सोच है न कि हम सुविधा होने पर ही पढ़ेंगे, यह गलत है. बोर्ड परीक्षा में छोटे-छोटे गांवों के बच्चे सफल होते हैं. मैं ब्लाइंड क्रिकेट टीम से मिला था, मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.
कॉन्फिडेंस कहां से आएगा? गांठ बांध लें पीएम मोदी की सलाह
पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा 2026 कार्यक्रम में शामिल हो रहे बच्चों के सभी सवाल सुने और उनके जवाब दिए. एक सवाल के जवाब में उन्होंने बहुत शानदार उदाहरण दिया. उन्होंने कहा- मान लीजिए गरीब महिला से किसी का झगड़ा हुआ, कारण क्या है? जो आंखों से देखा वो टीवी पर इंटरव्यू देगी. इसके लिए उसमें कॉन्फिडेंस कहां से आएगा? सच्चाई से आएगा. चुपचाप 30 सेंकंड बैठिए, सीना फूल जाए, धीरे से सांस निकालिए. आप देखिएगा, नई चीज हाथ लग गई.
कुछ नया क्या सीखें?
परीक्षा पे चर्चा 2026 कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि कुछ नया सीखने का मन करता है तो संगीत सीख सकते हैं. इसमें जादू है.
परीक्षा पे चर्चा में सलाह, टाइम मैनेजमेंट कैसे करें?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा 2026 कार्यक्रम में आए स्टूडेंट्स से कहा कि रात में सोने से पहले डायरी में अगले दिन का प्लान लिख लें. दूसरे दिन टैली करें कि क्या किया और क्या रह गया. इससे सब बदल जाएगा. टाइम मैनेजमेंट सीख लिया, समय का प्रोडक्टिव इस्तेमाल करना सीख लिया तो जिंदगी बदल जाएगी. मेरे पास इतने सारे काम होते हैं लेकिन मुझे कोई टेंशन नहीं है. मुझे पहले से ही समय का सही उपयोग करने की आदत बन गई है. उन्होंने आगे कहा कि ऑनलाइन वैदिक मैथ की क्लास होती है. उसमें इतना जादू जैसा है कि आपकी रुचि बढ़ जाएगी. परीक्षा को उत्सव की तरह होना चाहिए.
गेमिंग में रुचि पर क्या करें?
परीक्षा पे चर्चा 2026 में सर्जिल गैडगिल ने कहा कि गेमिंग में इंटरेस्ट है, पेरेंट्स कहते हैं कि पढ़ाई पर ध्यान दो. मुझे कैसे पता चलेगा कि क्या करूं. माता-पिता डांटते रहते हैं कि गेम मत खेलो. इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सब चुपचाप करते रहो, आपने निर्णय ले लिया. सफल होंगे तो घरवाले पूरे मोहल्ले में कहेंगे कि मेरे बेटे ने ये किया. आपकी सक्सेस उनका गर्व बन जाता है. पंचतंत्र पर गेम बनाइए, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रोफाइल बनाइए, हनुमानजी की कथा पर गेम बनाओ, अभिमन्यु पर गेम बनाओ, भारतीय कथा-कहानियों पर गेम बनाओ. ध्यान रखें, जुआ खेलना बर्बादी है लेकिन गेमिंग एक स्किल है.
पढ़ा हुआ भूल जाते हैं तो क्या करें?
एक छात्रा सृष्टि साहू ने कहा कि हम अपनी पढ़ाई करते हैं. पढ़ तो लेते हैं लेकिन बहुत जल्दी भूल जाते हैं. इस पर पीएम ने पूछा कि आज यहां आए हैं, 25 साल बाद कोई पूछेगा तो याद रहेगा या भूल जाएंगे? आप घर से निकले होंगे कि दिल्ली जा रहे हैं, पीएम के घर जाएंगे. किसी ने फोन किया होगा तो बताया होगा कि कल जा रहा हूं. आप इसमें इनवॉल्व हैं कि नहीं.. याद तब रहता है, जब मौका देखकर दूसरे से कंपेयर करते हैं. अपने से उपर वाले स्टूडेंट से 5-10 मिनट बैठकर सीखें और अपने से कमजोर वाले को बताओ. मन खुश होता है.
आधी-अधूरी शिक्षा ठीक नहीं
पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा में स्टूडेंट्स से कहा कि खुद को सीमित नहीं करना है. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि आप जिंदगी में सबसे ज्यादा उत्तम बनें, श्रेष्ठ बनें, अपना पूरा जीवन शानदार तैयार करें और इस प्रक्रिया में शिक्षा को एक माध्यम मानकर चलें. शिक्षा बोझ नहीं होनी चाहिए. इसमें हमारा टोटल इन्वॉल्वमेंट होना चाहिए. अगर ऐसा नहीं है तो गलत है. आधी आधूरी शिक्षा ठीक नहीं है.
स्किल और शिक्षा को बताया जुड़वा बहनें
परीक्षा पे चर्चा 2026 लाइव: स्किल और मार्क्स में से क्या जरूरी है के जवाब पर पीएम मोदी ने बताया कि इसे ऐसे समझें, पढ़ने का महत्व है कि सोने का महत्व है. इसका एक जवाब है- हर चीज में संतुलन होना चाहिए. एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे कि नहीं. लाइफ स्किल और प्रोफेशनल स्किल, दोनों पर ध्यान देना चाहिए. बिना ज्ञान प्राप्त किए, बिना अध्ययन किए कोई स्किल आ सकती है क्या? उठने का समय क्या है,
पढ़ने का समय क्या है.. अगर मुझे पता ही नहीं टिकट कहां से लेना है तो मेरी पढ़ाई का क्या फायदा. लाइफ स्किल आम्तसात करनी ही है. दूसरी प्रोफेशनल स्किल, डॉक्टरी की स्किल नंबर 1 होनी चाहिए. आप नंबर वन हो गए, यूनिवर्सिटी में मैं सीखू या न सीखूं, कोई फर्क नहीं पड़ता है, ऐसा नहीं है. हार्ट स्पेशलिस्ट तभी बनोगे, जब मरीज के साथ जुड़कर समझोगे. वकील बनना है, सारी धाराएं पता हैं. अगर आपको अदालत में तैयार होना है तो कोई वकील का जूनियर बनना होता है. प्रोफेसशनल स्किल, जिसमें इंटरेस्ट है उसमें लगातार नया करते जाना. आपको टेक्नोलॉजी पढ़नी होगी. समझें कि शिक्षा और स्किल जुड़वा बहनें हैं.







