संसद के बजट सत्र की शुरुआत आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधन के साथ होगी। देश के संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब आम बजट को रविवार को पेश किया जाएगा। 1 फरवरी (रविवार) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट प्रस्तुत करेंगी।
बजट से पहले पारंपरिक हलवा सेरेमनी का आयोजन नॉर्थ ब्लॉक में किया गया, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हुईं। यह समारोह बजट दस्तावेजों की गोपनीय प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
दो चरणों में चलेगा बजट सत्र
बजट सत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला चरण आज से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद सत्र स्थगित रहेगा और दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलने की संभावना है। इस अंतराल में संसदीय समितियां बजट प्रस्तावों की गहन समीक्षा करेंगी।
1 फरवरी को रविवार, बनेगा इतिहास
इस बार केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, जो रविवार है। संसद के इतिहास में यह एक दुर्लभ अवसर है। सरकार ने इस दिन को आधिकारिक तौर पर ‘बजट डे’ घोषित किया है। निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट होगा, जिससे उनसे बड़े आर्थिक फैसलों की उम्मीद की जा रही है।
लंबित विधेयक और वैश्विक दबाव
लोकसभा में इस समय नौ अहम विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 और संविधान संशोधन विधेयक 2024 शामिल हैं। साथ ही यह बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अमेरिका की टैरिफ नीतियों और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का दबाव बना हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कौन-सा आर्थिक रोडमैप पेश करती है। महंगाई, रोजगार, बुनियादी ढांचा और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह बजट राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
बजट सत्र में इन बिलों पर चर्चा संभव
लोकसभा में 9 विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 और संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 शामिल हैं। इन विधेयकों की वर्तमान में संसदीय स्थायी या प्रवर समितियां जांच कर रही हैं।
27 जनवरी- ऑल पार्टी मीटिंग हुई
बजट सत्र से पहले ऑल पार्टी मीटिंग हुई। इसमें विपक्ष ने VB-G RAM G एक्ट और SIR पर चर्चा की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इन मुद्दों पर दोनों सदनों में पहले ही बहस हो चुकी है और कानून पास होने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता।
विपक्ष ने सरकारी कार्यसूची जारी न होने पर आपत्ति भी जताई, जिस पर सरकार ने सही समय पर जारी करने का भरोसा दिया।
मीटिंग के बाद विपक्षी सांसदों की प्रतिक्रिया-
- शिवसेना (UBT) MP अरविंद सावंत- सभी ने अपने-अपने राज्यों के हिसाब से अपनी मांगें रखी हैं। प्रदूषण, SIR, बढ़ती बेरोजगारी जैसे कई मुद्दे हैं और भी बहुत कुछ।
- समाजवादी पार्टी MP राम गोपाल यादव- इस बजट से किसी को कुछ नहीं मिलने वाला है। बजट उन्हीं के लिए है जिनके पास संपत्ति है।
- AAP MP संजय सिंह- सरकार विदेश नीति में विफल रही है, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, शंकराचार्य के मुद्दे और SIR के जरिए वोट डिलीट करने पर सरकार की चुप्पी चिंता का कारण है।

ऑल पार्टी मीटिंग में विपक्ष की मांग
- भारत यूरोपियन संघ के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा हो।
- ओडिशा में संकट में फंसे किसान और बीजेपी शासित राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चर्चा हो।
- 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया बैन पर बिल लाया जाए।
पिछले बजट सत्र 2025-26 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के जॉइंट सेशन में 59 मिनट का अभिभाषण दिया था। उनके भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनिया गांधी ने द्रौपदी मुर्मू के लिए बेचारी शब्द इस्तेमाल किया। वहीं राहुल ने भाषण को बोरिंग बताया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि राष्ट्रपति के लिए ऐसे बयान गरीबों और आदिवासियों का अपमान है। वहीं भाजपा ने इसे आदिवासी समाज का अपमान बताया था और माफी की मांग की थी। हालांकि प्रियंका ने बचाव करते हुए कहा था- ‘मेरी मां 78 साल की बुजुर्ग महिला हैं, उन्होंने बस इतना कहा कि ‘राष्ट्रपति ने इतना लंबा भाषण पढ़ा होगा, वह थक गई होंगी, बेचारी।’







