पटना के परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल में नीट छात्रा अनामिका गुप्ता का शव संदिग्ध हालत में मिला. परिजनों ने हॉस्टल संचालक, वार्डन और दो युवकों पर हत्या का आरोप लगाया है. सांसद पप्पू यादव ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन को घेरा और संसद में आवाज उठाने की चेतावनी दी. पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है.’
बिहार की राजधानी पटना से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. जहानाबाद की नीट (NEET) छात्रा का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि पटना के ‘परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल’ में एक और छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. एग्जीबिशन रोड स्थित इस हॉस्टल में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही छात्रा का शव उसके कमरे में मिला, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है.
मृतक छात्रा की पहचान औरंगाबाद निवासी अनामिका गुप्ता उर्फ लक्ष्मी कुमारी के रूप में हुई है. वह पटना में रहकर नीट की कोचिंग कर रही थी. 6 जनवरी को अनामिका का शव हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका पाया गया. हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस और परिजनों के पहुंचने से पहले ही छात्रा के शव को पंखे से उतारकर बेड पर रख दिया गया था. इसी वजह से परिजन इस पूरी घटना को आत्महत्या मानने से इनकार कर रहे हैं और इसे सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या बता रहे हैं.
अनामिका के परिजनों ने पटना पुलिस को दिए शिकायती पत्र में हॉस्टल प्रबंधन और कुछ युवकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों का दावा है कि अनामिका को प्रताड़ित किया जा रहा था. उन्होंने अपनी शिकायत में दो युवकों समेत कुछ लोगों को नामजद किया है. दोनों युवकों का नाम मुशाहिद रेजा और मुकर्रम रजा है. हॉस्टल प्रबंधन में संचालक विशाल अग्रवाल, रणजीत मिश्रा, वार्डन खुशबू कुमारी समेत हॉस्टल के इंचार्ज, कुछ सहेलियां और अज्ञात लोग भी शामिल हैं. परिजन बोले- दो लड़कों के साथ लड़की के कुछ फोटो और वीडियो हैं. इन्हीं दो लड़कों ने लड़की की डेड बॉडी को पंखे से उतारा था.

परिजनों का आरोप है कि इन सभी की मिलीभगत से अनामिका की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है. फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे मौत के सटीक समय और कारण का पता चल सके.
सांसद पप्पू यादव ने दी चेतावनी
इस मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है. पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल पहुंचकर घटना की जानकारी ली. उन्होंने हॉस्टल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. पप्पू यादव ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा देते हुए कहा कि वे संसद के आगामी सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वे इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
पुलिस की जांच जारी
स्थानीय थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और वार्डन व अन्य छात्राओं से पूछताछ करने में जुटी है. परिजनों ने थानेदार को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
अनामिका गुप्ता मौत मामला
अनामिका गुप्ता की मौत को लेकर गांधी मैदान थाना में दर्ज केस में पुलिस ने बीएनएस की धारा के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने से मौत की पुष्टि की गई है, लेकिन अनामिका के पिता धर्मेंद्र कुमार का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है. एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस और परिजनों की अनुपस्थिति में शव को बेड से उतारा गया जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह गहराता है. इसी आधार पर परिजन पुलिस की जांच दिशा और निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं. दरअसल, पटना में नीट की तैयारी कर रही 15 वर्षीय छात्रा अनामिका गुप्ता की मौत का मामला अब सिर्फ एक कथित आत्महत्या नहीं रह गया है. गांधी मैदान थाना में दर्ज एफआईआर, भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराएं और पुलिस की सीमित कार्रवाई इस केस को लगातार सवालों के घेरे में ला रही है. खास बात यह है कि पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी गंभीर धारा में केस दर्ज किया है, लेकिन जिन लोगों पर उकसाने और साजिश का आरोप है उनमें से अधिकतर आज भी खुलेआम अपने काम पर बने हुए हैं.
बता दें कि अनामिका गुप्ता की मौत को लेकर उनके पिता धर्मेंद्र कुमार ने गांधी मैदान थाना में जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें भारतीय न्याय संहिता BNS की धारा 108.3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. यह धारा आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है. कानून के जानकार मानते हैं कि यह एक गंभीर, संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है. बावजूद इसके, अब तक पुलिस की कार्रवाई सिर्फ एक आरोपी तक सीमित नजर आ रही है.
BNS की धारा 108 क्या कहती है?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाता है, प्रोत्साहित करता है या आत्महत्या के लिए साधन उपलब्ध कराता है तो वह आत्महत्या में सहायता करने का दोषी माना जाएगा. इस धारा के तहत अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है. यह अपराध गंभीर प्रकृति का है और गैर-जमानती श्रेणी में आता है. धारा 3(5) आमतौर पर नए कानून में संबंधित प्रावधानों और व्याख्याओं को जोड़ने के लिए प्रयोग होती है.
FIR में किन लोगों पर लगाए गए आरोप
एफआईआर के अनुसार, अनामिका गुप्ता 6 जनवरी 2026 को पटना के परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल में मृत पाई गई थीं. उनके पिता ने आरोप लगाया है कि दो युवक मुसाहिद रेजा निवासी पूर्णिया और मुकर्रम रेजा निवासी उत्तर दिनाजपुर पश्चिम बंगाल, हॉस्टल संचालक विशाल अग्रवाल, रंजीत मिश्रा, वार्डेन खुशबू कुमारी, अन्य वार्डन, हॉस्टल इंचार्ज, एक सहेली और कुछ अज्ञात लोगों ने मिलकर उनकी बेटी को प्रताड़ित किया और साजिश के तहत उसकी हत्या की.
सिर्फ एक गिरफ्तारी, बाकी पर चुप्पी
इस पूरे मामले में पुलिस ने अब तक सिर्फ मुसाहीद रेजा को गिरफ्तार किया है और वह फिलहाल जेल में है. वहीं, मुकर्रम रेजा मुसाहीद के साथ अनामिका के हॉस्टल गया था और शव को नीचे उतारने में शामिल था, उसको साक्ष्य के अभाव में छोड़ दिया गया. यह सवाल उठ रहा है कि जब एफआईआर में दोनों के नाम हैं तो कार्रवाई एक पर ही क्यों हुई. पटना पुलिस इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है.
हॉस्टल प्रबंधन पर क्यों नहीं कार्रवाई
दूसरी ओर एफआईआर में नामजद हॉस्टल संचालक विशाल अग्रवाल, रंजीत मिश्रा और वार्डेन खुशबू कुमारी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. हैरानी की बात यह है कि ये सभी लोग आज भी उसी हॉस्टल में पहले की तरह काम कर रहे हैं. अनामिका के माता पिता का कहना है कि अगर मामला गंभीर है और धारा 108 लगी है तो हॉस्टल प्रबंधन से पूछताछ और गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही.
पुलिस कार्रवाई पर परिवार के सवाल
अनामिका के माता पिता लगातार गांधी मैदान थाना की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि पुलिस न तो यह बता रही है कि किस आरोपी से क्या पूछताछ हुई है और न ही यह स्पष्ट कर रही है कि बाकी नामजद लोगों पर कार्रवाई कब होगी. परिवार का आरोप है कि मामले को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.
FIR में हत्या की बात, केस में उकसावे की धारा
एक बड़ा सवाल यह भी है कि एफआईआर में अनामिका की हत्या का स्पष्ट आरोप लगाया गया है, लेकिन पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में केस दर्ज किया है. कानून के जानकार मानते हैं कि यह जांच की दिशा को सीमित कर सकता है. अगर मामला हत्या का है तो आईपीसी या बीएनएस की हत्या से जुड़ी धाराएं क्यों नहीं जोड़ी गईं, यह भी एक बड़ा प्रश्न है.
पुलिस की चुप्पी क्यों?
अब तक पुलिस की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि बाकी आरोपियों को क्लीन चिट दी गई है या जांच अभी जारी है. न ही यह बताया गया है कि हॉस्टल परिसर से जब्त साक्ष्य, मोबाइल, सीसीटीवी या कॉल डिटेल्स का क्या स्टेटस है. यह चुप्पी ही मामले को और संदेहास्पद बना रही है.
अनामिका केस में उलझती जांच
बहरहाल, अनामिका गुप्ता की मौत का मामला अब कानून, जांच और जवाबदेही का इम्तिहान बन चुका है. एक तरफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज है, दूसरी तरफ कार्रवाई सीमित है. सवाल यह नहीं है कि कानून में क्या लिखा है, सवाल यह है कि कानून को जमीन पर कैसे लागू किया जा रहा है. जब तक सभी नामजद आरोपियों पर समान कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनामिका के माता पिता के सवाल और समाज की आशंकाएं खत्म नहीं होंगी.