नातन धर्म में माघ मास को बहुत ही पुण्यदायी माना गया है. खासतौर पर प्रयागराज में लगने वाला माघ मेला आस्था, तप, दान और स्नान का संगम होता है. बीते शनिवार को पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस बार 75 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जिसकी वजह से इसे साधारण माघ नहीं, बल्कि ‘महामाघ मेला’ कहा जा रहा है, जो इसे ऐतिहासिक बना रहा है. शास्त्रों के अनुसार माघ महीने में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में किया गया स्नान मोक्षदायी फल देता है. साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा.
स्नान घाटों पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी मुस्तैद
इसके साथ ही साथ झूंसी साइड में भी एक किलोमीटर का अतिरिक्त घाट बनकर मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के मद्देनजर बनाए जा रहे हैं. स्नान घाटों पर डीप वॉटर बैरिकेडिंग, नेट और जल पुलिस के साथ ही डीप डाइवर्स तैनात किए गए हैं. इसके अलावा स्नान घाटों पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी मुस्तैद कर दी गई हैं. मेला अधिकारी ऋषिराज के मुताबिक पौष पूर्णिमा का स्नान पर्व मेला प्रशासन के लिए एक लर्निंग एक्सपीरियंस और रिहर्सल की तरह था. उसी के आधार पर आगामी मकर संक्रांति और स्नान पर्व को लेकर खास तैयारी की जा रही है. मकर संक्रांति पर एक से डेढ़ करोड़ और मौनी अमावस्या पर साढे़ 3 से 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है. फिलहाल इसी के मद्देनजर सभी तैयारियां की जा रही हैं.
ऐसे किया जाएगा घाट साफ
इसके अलावा, संगम नोज के क्षेत्रफल को भी बढ़ाया जा रहा है. ताकि भीड़ आने पर संगम नोज पर ज्यादा श्रद्धालु आकर स्नान कर सकें. मेला अधिकारी ऋषि राज की देखरेख में संगम नोज का विस्तार किया जा रहा है. इसके साथ ही यहां पर डिसिल्ट्रेशन का भी कार्य किया जा रहा है. यानी श्रद्धालुओं के नहाने के दौरान घाटों पर जमा सिल्ट को पोकलेन और जेसीबी मशीनों से साफ किया जा रहा है. ताकि यहां पर श्रद्धालुओं को स्नान के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके.
स्नान घाट का किया जा रहा विस्तार
पौष पूर्णिमा से माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है. माघ मेले का अगला प्रमुख स्नान पर्व 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व पड़ेगा. मकर संक्रांति के बाद ही माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या 18 जनवरी को होगी. इन दो बड़े स्नान पर्वों को लेकर अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण तैयारियों में जुट गया है. पौष पूर्णिमा तक जहां 7000 फीट के स्नान घाट बनाए गए थे. मकर संक्रांति और मौनी व्यवस्था के मद्देनजर स्नान घाट का विस्तार किया जा रहा है. इसका दायरा बढाकर 9000 फीट तक किया जा रहा है.
इसलिए खास है माघ मेला
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है माघे स्नानं महापुण्यं, अर्थात माघ मास में किया गया स्नान सबसे बड़ा पुण्य है. माघ स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी पवित्र करता है. यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु माघ मेले में पहुंचते हैं.
मकर संक्रांति (15 जनवरी 2026): सूर्य के उत्तरायण का महापर्व
मकर संक्रांति का दिन माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे सूर्य उत्तरायण होते हैं. शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति पर संगम स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. तिल, गुड़ और दान का भी विशेष महत्व होता है.
माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां
3 जनवरी 2026 पौष पूर्णिमा
15 जनवरी 2026 मकर संक्रांति
18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या
23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी
1 फरवरी 2026 माघी पूर्णिमा
15 फरवरी 2026 महाशिवरात्रि







