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सीएम बने थे तो बयान ले डूबे कही अब ……………..

UB India News by UB India News
December 27, 2025
in पटना, हम
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तेजस्वी के आने से जंगल राज हो जाएगा….
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जीतन राम मांझी ने एक बार फिर से कुछ ऐसे बयान दिए हैं, जिससे ऐसा लग रहा है कि कहीं वो अपनी केंद्रीय मंत्री वाली कुर्सी न गंवा दें। ठीक इसी तरह से नीतीश कुमार ने बड़े अरमानों से 2014 में जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। अपने कई करीबी नेताओं को दरकिनार कर उनका चयन किया था। लेकिन जीतन राम मांझी, नीतीश कुमार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। बड़बोलापन उनकी कुर्सी को खा गया। जीतन राम मांझी ने एक के बाद एक ऐसे विवादास्पद बयान दिये कि नीतीश कुमार के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया।

पारी बड़ी हो सकती थी लेकिन सिर्फ 9 महीने रही कुर्सी

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जब नीतीश को लगा कि मांझी के बयानों से उनका चुनावी समीकरण बिगड़ रहा है तो उन्होंने सीधे हस्तक्षेप कर दिया। जीतन राम मांझी को बेहद अप्रिय स्थिति में मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। वे सिर्फ 9 महीने ही सीएम पद पर रहे। अगर जीतन राम मांझी ने अपनी जुबान को संभाल कर रखा होता तो वे शायद लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रह सकते थे। उन्हें एक बहुत बड़ा मौका मिला था जिसे उन्होंने केवल बयानों के कारण गंवा दिया।

नैतिक आधार पर 17 मई 2014 को इस्तीफा

नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेकर 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा था, हम मुद्दों के आधार पर जनता के बीच समर्थन मांगने गये लेकिन अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। हम जनादेश का सम्मान करते हैं। अब हमने तो गुडबाय कह दिया है, जिसको जो करना है करे। वैकल्पिक सरकार बनाने का रास्ता खुला है। आगे की प्रक्रिया राज्यपाल देखेंगे।

6 नेता थे सीएम पद की रेस में

नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद दो दिनों तक यह साफ नहीं हो पा रहा था वे किसे मुख्यमंत्री नामित करेंगे। कई नाम चर्चा में थे। राजपूत नेता वशिष्ठ नारायण सिंह, भूमिहार नेता विजय कुमार चौधरी, यादव नेता बिजेन्द्र प्रसाद यादव और नरेन्द्र नारायण यादव। यहां तक कि अंत में शरद यादव का नाम भी रेस में आ गया था। लेकिन नीतीश कुमार ने इनकी बजाय जीतन राम मांझी को चुन कर सबको चौंका दिया। जीतन राम मांझी कुछ दिनों पहले ही लोकसभा का चुनाव हार चुके थे। इसके बाद उन्हें सीएम बनाया।

बयानों से जब नीतीश हुए असहज

कहा जाता है कि जीतन राम मांझी शुरू में नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में ही काम कर रहे थे। लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह जताने लगे कि वे कठपुतली नहीं बल्कि वास्तविक मुख्यमंत्री हैं। वे नीतीश कुमार की परवाह किये बिना स्वतंत्र रूप से फैसले लेने लगे। एक के बाद एक विवादास्पद बयान देने लगे। उनके बयानों से सवर्ण नाराज हो गये। नीतीश कुमार की मुख्य नीतियां ध्वस्त होने लगीं। इससे नीतीश कुमार असहज हो गये। जीतन राम मांझी के उन बयानों पर एक नजर डालते हैं जिसकी वजह से उनकी सीएम की कुर्सी गयी।

12 फरवरी 2015- कमीशन खाने वाला कबूलनामा

पटना के गांधी मैदान में शिक्षकों की सभा थी। इस दौरान मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा था, पुल बनाने से ज्यादा पैसा पिलर्स बनाने में लगा। इंजीनियरों ने प्रोजेक्ट की लागत को ज्यादा आंका। इंजीनियरों ने प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये लगाये और कुछ पैसा मुझे और कॉन्ट्रैक्टरों को भी दिया। मुझे भी कमीशन मिल। एक मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से कमीशन खाने की बात स्वीकार कर सनसनी मचा दी। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति वाले नीतीश कुमार इस विवादास्पद बयान से नाराज हो गये।

13 अगस्त 2014- घूस देकर बिजली बिल कम कराया

पटना में नवनियुक्त प्रखंड विकास पदाधिकारियों के प्रशिक्षण से संबंधित एक कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा था, मेरे घर पर 25 हजार रुपये का बिजली बिल आया था जिसको 5 हजार रुपये घूस देकर निबटा दिया। यानी उन्होंने 25 हजार का बिल 5 हजार की रिश्वत में सलटा दिया। मुख्यमंत्री पद पर रहते कोई विरले नेता ही रिश्वत देने की बात खुलेआम स्वीकार कर सकता है।

29 अगस्त 2014- दलित वोट की ताकत के लिए अंतरजातीय विवाह करें

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पटना के एक कल्याण छात्रावास में दलित छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इस क्रम में उन्होंने कहा, सिड्यूल्ड कास्ट में इंटर कास्ट मैरेज को प्रमोट करना चाहिए। अगर आप वोट की ताकत बनना चाहते हैं तो अंतरजातीय विवाह करना चाहिए। हमें बड़ी ताकत बनने के लिए अपनी आबादी 16 फीसदी से बढ़ाकर 22 फीसदी करनी चाहिए। जिस दिन 22 परसेंट हो गये, सरकार भी बनेगी।

31 अगस्त 2014- मैं भी चूहा खाता था

2014 के अगस्त में बिहार में भयंकर बाढ़ आयी हुई थी। इस दौरान एक खबर छपी थी कि बाढ़ पीड़ित चूहा खा कर जिंदा रहने पर मजबूर हैं। इस खबर पर मुख्यमंत्री रहते जीतन राम मांझी ने प्रतिक्रिया दी थी, चूहा खाना कोई खराब बात नहीं। मैं भी चूहा खाता था। इसमें कुछ भी अजीब नहीं। आज भी चूहा मिल जाए तो मुझे परहेज नहीं। मांझी के इस बयान पर खूब हंगामा हुआ था।

3 सितम्बर 2014- छोटी-मोटी कालाबाजारी माफ है

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने चैम्बर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में कहा, आप काला बाजारी करते हैं तो अपने पेट के लिए, अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए। मुझे नहीं लगता कि आपके बच्चे विदेश में पढ़ते होंगे। बहुत भी करते होंगे तो आपके बच्चे किसी छोटे शहर में या पटना मं पढ़ते होंगे। अगर इनकी पढ़ाई के लिए कालाबाजारी करते होंगे तो मैं आपको धन्यवाद देता हूं। अगर छोटी-मोटी गलतियां होगी तो मैं बिहार का मुख्यमंत्री होने के नाते आपको माफ कर दूंगा।

17 अक्टूबर 2014- कोताही करने वाले डॉक्टरों का हाथ काट लेंगे

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी मोतिहारी में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस क्रम में उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों के संदर्भ में कहा, अगर पीएमसीएच के डॉक्टरों ने गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ किया तो उनका हाथ काट लेंगे। गरीबों की मदद के लिए वे किसी सीमा तक जा सकते हैं।

12 नवंबर 2014- अगड़ी जाति विदेश से आयी

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी बेतिया में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में कहा, अगड़ी जाति के लोग आर्यों की संतान हैं जो विदेशों से आये हैं। इस देश के मूल निवासी दलित और आदिवासी ही हैं।

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