अखलाक हत्याकांड में उत्तर प्रदेश सरकार को झटका लगा है. सूरजपुर कोर्ट ने मंगलवार को आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. मामले में अदालत ने अभियोजन की ओर से केस वापसी की लगाई गई अर्जी को महत्वहीन और आधारहीन मानते हुए निरस्त कर दिया. कोर्ट के फैसले का मतलब है कि आरोपियों के खिलाफ केस जारी रहेगा.
पीड़ित पक्ष के वकील यूसुफ सैफी ने कहा कि पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है. उन्होंने कहा कि इस केस की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होनी है. कोर्ट ने डे बाय डे सुनवाई होने के निर्देश दिए हैं. ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र के रहने वाले 52 वर्षीय मोहम्मद अखलाक की 2015 में भीड़ ने इस संदेह में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. घर में गोमांस रखने के आरोप में उनकी हत्या हुई थी. इस मामले में 18 आरोपियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिसमें तीन नाबालिग भी शामिल थे. सभी आरोपी इस समय जमानत पर बाहर हैं.
याचिका पर कोर्ट ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश सरकार ने हत्याकांड में आरोपित की सजा माफी की याचिका नवंबर में दायर की थी, जिसमें सरकारी वकील के द्वारा सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया था, जिसमें आज सुनवाई हुई है. सरकार की याचिका पर कोर्ट ने कहा कि धारा 321 में सरकारी पक्ष के वकील द्वारा कोई भी तथ्य या कोई भी ग्राउंड नहीं दिया है, जिस पर विचार किया जा सके. आरोप तय हो चुके हैं. उसमें चार्जशीट भी दाखिल हुई है, उन सारी बातों पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने आधारहीन और तथ्यहीन मानते हुए सरकार की याचिका को खारिज किया.
क्या कहती है धारा 321?
CrPC की धारा 321 में यह बताया गया है कि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर या असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कोर्ट की सहमति से मुकदमा वापस लेने के लिए एप्लीकेशन दे सकते हैं. इस मामले के लिए कोर्ट की सहमति ज़रूरी है. धारा 321 के तहत, कोर्ट के पास यह तय करने की शक्ति है कि प्रॉसिक्यूटर द्वारा मांगा गया मुकदमा वापस लेना सही है या नहीं और क्या इससे न्याय में कोई गड़बड़ी होगी. इस बीच, अखलाक की पत्नी ने हाई कोर्ट में भी याचिका दायर कर सरकार और प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की है, जो विड्रॉल एप्लीकेशन से संबंधित हैं.







