बिहार में चल रही बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति को लेकर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सोमवार को एक अहम समीक्षा बैठक की. इस बैठक में जल संसाधन विभाग और पथ निर्माण विभाग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तार से जानकारी ली गई. मुख्य सचिव ने साफ कहा कि सभी काम तय समय-सीमा के अंदर पूरे होने चाहिए और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
समीक्षा बैठक में सबसे पहले उत्तर कोयल जलाशय परियोजना पर चर्चा हुई. यह परियोजना करीब 1,367 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है और इसे बिहार की एक महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना माना जा रहा है. अधिकारियों ने मुख्य सचिव को बताया कि राइट मेन कैनाल यानी दाईं मुख्य नहर के क्षेत्र में आने वाले 1,170 बिजली के पोल और 18 ट्रांसफॉर्मर को सफलतापूर्वक हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है. इससे नहर निर्माण के काम में तेजी आएगी.
इसके बाद मंडई वीयर और उससे जुड़ी दाईं और बाईं मुख्य नहर प्रणाली की समीक्षा की गई. इस दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भूमि अधिग्रहण के काम पर विशेष ध्यान देने को कहा. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के लगातार चलती रहनी चाहिए, ताकि परियोजना के काम में देरी न हो.
बैठक में गंगा नदी पर बन रहे ग्रीनफील्ड पुल की प्रगति की भी जानकारी दी गई. यह पुल ताजपुर और बख्तियारपुर को जोड़ेगा और इसकी कुल लागत करीब 1,822 करोड़ रुपये है. अधिकारियों ने बताया कि इस पुल का लगभग 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. यह पुल राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को राष्ट्रीय राजमार्ग-28 से जोड़ेगा, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन काफी आसान हो जाएगा.
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गुणवत्ता के साथ-साथ समय का भी पूरा ध्यान रखा जाए. उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य के विकास के लिए बेहद जरूरी हैं और इनके पूरा होने से किसानों, यात्रियों और आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. सरकार चाहती है कि सभी योजनाएं समय पर पूरी हों, ताकि बिहार के विकास को नई गति मिल सके.







