पटना: बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन, बुधवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति बिहार की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन गई है। मंगलवार को ही आधिकारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष चुने गए तेजस्वी यादव, बुधवार को सदन में मौजूद नहीं थे, जिसके बाद एनडीए के घटक दलों ने उन पर गैर-जिम्मेदार होने और बिहार की जनता के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया है। उसके साथ ही आज यानी गुरुवार को भी सदन की कार्यवाही से तेजस्वी यादव अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। इसे लेकर सियासी दलों ने कयास लगाना शुरू कर दिया है।
नेताओं ने पूछे सवाल?
सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी यादव दिल्ली में चल रही केस की सुनवाई के सिलसिले में पटना से बाहर गए हैं। हालांकि, आरजेडी की ओर से इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट पर भी कुछ अपडेट नहीं किया है। तेजस्वी यादव के गायब रहने को लेकर सत्ता पक्ष और एनडीए ने सवाल करना शुरू कर दिया है। तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर एलजेपी (आर) और बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। एलजेपी (आर) विधानमंडल दल के नेता राजू तिवारी ने कहा कि तेजस्वी यादव ‘गंभीर नहीं हैं’ और उन्हें जनता से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आप बड़े पद पर हैं, नहीं आ कर क्या संदेश देना चाहते हैं? तिवारी ने जोर दिया कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतियों और एजेंडे को जानने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर था।
बीजेप- जेडीयू ने उठाया सवाल?
बीजेपी के वरिष्ठ विधायक नीरज बबलू ने आरोप लगाया कि ‘तेजस्वी को जनता ने रिजेक्ट कर दिया’ है, इसलिए वह ‘हताश व परेशान हैं और भागे हुए हैं।’ उन्होंने कहा कि तेजस्वी जिम्मेदारी निभाना नहीं चाहते और उन्हें बिहार के विकास से कोई मतलब नहीं है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इसे तेजस्वी यादव का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ बताया और तंज कसा कि अगर उन्होंने अपने तौर-तरीके नहीं सुधारे तो अगली बार स्थिति ऐसी भी हो सकती है कि उनके पास इस पद के लिए जरूरी संख्या बल भी न बचे। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने सीधा सवाल किया, “तेजस्वी यादव कहां गायब हैं? क्या वे किसी मामले में अदालत में पेश होने गए हैं या हालिया चुनाव में मिली करारी हार की शर्म उन्हें घेरे हुए है?” उन्होंने परिवार को मिली सुरक्षा (160 पुलिसकर्मी) के बावजूद अनुपस्थित रहने पर भी सवाल उठाया।
अनिवार्यता नहीं थी- आरजेडी
एनडीए के आरोपों पर आरजेडी ने बचाव किया। आरजेडी एमएलसी उर्मिल ठाकुर ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन में कोई बहस नहीं होनी थी, इसलिए तेजस्वी यादव की उपस्थिति अनिवार्य नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘बिना तेजस्वी का नाम लिए इन लोगों की राजनीति नहीं चल सकती।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि आरजेडी के अन्य विधायक और विधान पार्षद सदन में मौजूद थे। तेजस्वी यादव विधानमंडल सत्र के दूसरे दिन, 1 दिसंबर की शाम को ही अचानक पटना से दिल्ली रवाना हो गए थे। उनकी इस अचानक यात्रा के पीछे का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि यह यात्रा उनकी हालिया चुनाव हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिलने, संगठनात्मक समीक्षा करने या फिर किसी व्यक्तिगत/कानूनी मामले से संबंधित हो सकती है।
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