बिहार की सियासत में सोमवार का दिन सिर्फ इसलिए खास नहीं रहा कि बीजेपी के वरिष्ठ विधायक डॉ. प्रेम कुमार को सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष चुना गया, बल्कि इसलिए भी कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 14 नवंबर के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर बोलते हुए अपनी राजनीतिक चुप्पी तोड़ी. प्रेम कुमार को अध्यक्ष बनने पर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी नेताओं ने उन्हें नई जिम्मेदारी संभालने पर शुभकामनाएं दीं. इसी क्रम में तेजस्वी यादव ने भी अपना संबोधन दिया और उन्होंने न सिर्फ प्रेम कुमार को बधाई दी बल्कि उम्मीद जताई कि विधानसभा में अब विपक्ष की आवाज पहले से ज्यादा सम्मान और गंभीरता के साथ सुनी जाएगी. करीब 17 दिनों की खामोशी के बाद उनका वक्तव्य बेहद सोच-समझकर दिया गया और यह साफ दिखा कि तेजस्वी अब विपक्ष के नेता के रूप में खुद को नए अंदाज में पुनर्स्थापित कर रहे हैं.
सदन में तेजस्वी की भाषा में संयम पर बड़ा संदेश
तेजस्वी यादव ने जैसे ही बधाई संदेश देना शुरू किया, सदन में एक अलग तरह की गंभीरता दिखाई दी. उन्होंने न तो तल्खी दिखाई और न ही राजनीतिक आरोपों का पुराना अंदाज अपनाया. इसके बजाय उनके शब्दों में शालीनता और गहरे राजनीतिक संकेत दिखाई दिए. उन्होंने कहा- आप ज्ञान और मोक्ष की धरती के प्रतिनिधि हैं, भगवान विष्णु और महात्मा बुद्ध की धरती से आते हैं.ऐसे में हमें पूरा विश्वास है कि आप निष्पक्ष होकर सदन को चलाएंगे. हमें भरोसा है कि आप विपक्ष की आवाज को भी बराबर सम्मान देंगे. जानकारों की नजर में तेजस्वी यादव का यह कथन सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में सदन में अपनी भूमिका तय करने का एक परोक्ष संदेश था.
चुनौतियों को स्वीकार करने का तेजस्वी यादव का संकेत
तेजस्वी का यह वक्तव्य उनकी राजनीतिक परिपक्वता और आगे की सियासी चुनौतियों को स्वीकार करने की तैयारी का संकेत भी था. उन्होंने कहा- हम सबका लक्ष्य बिहार को अव्वल बनाना है. विपक्ष सरकार का दुश्मन नहीं, बल्कि लोकतंत्र का संतुलन है. राजनीति के जानकारों की नजर में यह बयान बताता है कि तेजस्वी अब विपक्ष की राजनीति को पुराने तेवरों के बजाय व्यवस्थित और संस्थागत तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं.
विपक्ष के नेता के रूप में दोबारा स्थापित होने की कोशिश
2025 की नई राजनीतिक परिस्थितियों में तेजस्वी यादव का यह संबोधन सिर्फ बधाई नहीं, बल्कि उनका सियासी मजबूती को दोबारा स्थापित करने के प्रयास का राजनीतिक परिचय भी था.दरअसल, हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उन पर चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे थे, लेकिन इस भाषण में उनका स्वर आत्मविश्वास से भरा हुआ था. सदन में उनके चेहरे और शब्दों में यह साफ दिखाई दिया कि वे केवल विपक्ष में बैठने के लिए नहीं बल्कि विपक्ष को मजबूती और दिशा देने के लिए तैयार हैं.
तेजस्वी यादव ने दिया आगे के दिनों की राजनीति का संकेत
तेजस्वी का यह शांत और संवादपरक स्वर इस बात का संकेत हो सकता है कि आने वाले समय में बिहार विधानसभा में टकराव की जगह तथ्य, बहस और नीति-आधारित राजनीति को महत्व मिलता दिखाई दे.सरकार ने जो वादे बिहार की जनता से किए हैं उसपर भी वह पैनी नजर रखने वाले हैं. स्पीकर को संबोधित करते हुए तेजस्वी के आखिरी शब्द सबसे अधिक राजनीतिक वजन वाले थे-जब भी आपकी जरूरत होगी, विपक्ष आपके साथ खड़ा रहेगा, लेकिन जब जरूरी होगा तो सरकार को आईना दिखाने से हम पीछे नहीं हटेंगे.
तेजस्वी यादव के संबोधन का सार, नई शुरुआत, नए इरादे
जानकार कह रहे हैं कि डॉ. प्रेम कुमार के विधानसभा अध्यक्ष बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में नए संतुलन और सकारात्मक संवाद की उम्मीद दिखाई दे रही है. तेजस्वी यादव के भाषण ने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव के बजाय बहस और सहयोग का माहौल बन सकता है. 17 दिनों की चुप्पी के बाद उनका यह शांत लेकिन प्रभावी भाषण यह साफ करता है कि तेजस्वी अब विपक्ष के नेता के रूप में न सिर्फ मौजूद हैं, बल्कि अपनी भूमिका पहले से कहीं अधिक रणनीतिक और गंभीर तरीके से निभाने को तैयार हैं.







