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देश आज 76वां संविधान दिवस मना रहा है., राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए मिसाल

UB India News by UB India News
November 27, 2025
in सांसद
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देश आज 76वां संविधान दिवस मना रहा है., राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए मिसाल

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आज संविधान दिवस है, जिसे हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है। आज ही के दिन 1949 में भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस विशेष समारोह का नेतृत्व किया। यह कार्यक्रम पुराने संसद भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए मिसाल है। भारत जल्द दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनेगा।

9 भाषाओं में संविधान का अनुवादित संस्करण

इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया सहित 9 भाषाओं में संविधान का अनुवादित संस्करण जारी किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “संविधान दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। आज ही के दिन 26 नवंबर, 1949 को संविधान भवन के इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत के संविधान का प्रारूप तैयार करने का कार्य पूरा किया था। उसी वर्ष आज ही के दिन हम भारत के लोगों ने अपने संविधान को अंगीकार किया था। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा ने भारत की अंतरिम संसद के रूप में भी कार्य किया। प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर हमारे संविधान के प्रमुख निर्माताओं में से एक थे।”

तीन तलाक, GST और अनुच्छेद 370 पर बोलीं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “तीन तलाक से जुड़ी सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाकर संसद ने हमारी बहनों और बेटियों के सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए। देश के आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार, वस्तु एवं सेवा कर (GST), लागू किया गया। अनुच्छेद 370 को हटाए जाने से एक ऐसी बाधा दूर हुई जो देश के समग्र राजनीतिक एकीकरण में रुकावट डाल रही थी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला नेतृत्व वाले विकास के एक नए युग की शुरुआत करेगा… इस वर्ष 7 नवंबर से शुरू होकर, हमारे राष्ट्रगान वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव आयोजित किया जा रहा है…”

भारत एक है और सदैव एक रहेगा: उपराष्ट्रपति

कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा, “… हमारे संविधान का प्रारूपण, उस पर बहस और उसे संविधान सभा में भारत माता के हमारे महान नेताओं द्वारा किया गया। यह स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हमारे लाखों देशवासियों के सामूहिक ज्ञान, त्याग और सपनों का प्रतीक है। महान विद्वानों, प्रारूप समिति और संविधान सभा के सदस्यों ने करोड़ों भारतीयों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए गहन विचार दिए। उनके निस्वार्थ योगदान ने आज भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया है। हमारा संविधान बुद्धिमता और जीवंत अनुभव, त्याग, आशाओं और आकांक्षाओं से निर्मित हुआ है। हमारे संविधान की आत्मा ने सिद्ध कर दिया है कि भारत एक है और सदैव एक रहेगा…”

संविधान दिवस के मौके पर पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल (जिसे अब संविधान सदन के नाम से जाना जाता है) में आयोजित कार्यक्रम में राजनीतिक दलों की एकता की झलक देखने को मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई शीर्ष नेता एक ही मंच पर मौजूद रहे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी इस अवसर पर उपस्थित थे. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति मुर्मू ने की. उनके साथ मंच पर उपराष्ट्रपति व राज्यसभा स्पीकर सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, प्रधानमंत्री मोदी, राज्यसभा में सत्ता पक्ष के नेता जेपी नड्डा, राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा के उस सभापति हरिवंश राय और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू एक मंच पर मौजूद रहे.

बता दें कि दो दिन पहले ही यानी सोमवार को ही एक सरकारी कार्यक्रम से नदारद रहने पर भाजपा ने राहुल गांधी को घेरा था. 24 नवंबर को ही जस्टिस सूर्यकांत ने 53वें भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है. सीजेआई के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के शामिल न होने की भाजपा ने कड़ी आलोचना की थी. बीजेपी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल ना होकर डॉ. बी. आर. अंबेडकर और संविधान का अनादर किया है.

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लेकिन आज के कार्यक्रम में राहुल और खड़गे दोनों मौजूद रहे. कार्यक्रम में संविधान के महत्व और उसके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया. नेताओं ने कहा कि संविधान भारतीय लोकतंत्र की नींव है और इसके मूल्यों को बनाए रखना सभी का कर्तव्य है. इस दौरान 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर भी जोर दिया गया.

संविधान हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान- राष्ट्रपति मुर्मू

संविधान दिवस के कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘हमारा संविधान हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है, ये औपनिवेशिक पहचान को त्याग करके राष्ट्रवादी भावना के साथ आगे बढ़ने का मार्गदर्शक ग्रंथ है. दंड के स्थान पर न्याय की भावना पर आधारित भारतीय न्याय संहिता को लागू किया गया है. ऐसे अनेक प्रगतिशील चीजों को सार्थक विमर्श के बाद पारित करने के लिए मैं संसद सदस्यों की सराहना करती हूं.’

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन तलाक का किया जिक्र

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार 26 नवंबर 2025 को 75वें संविधान दिवस के मौके पर संसद में आयोजित विशेष कार्यक्रम में देश को संबोध‍ित किया. इस मौके पर तीन तलाक को खत्‍म करना और जम्‍मू-कश्‍मीर से आर्टिकल-370 को हटाने का जिक्र किया. तीन तलाक को खत्‍म करने के कदम को राष्‍ट्रपति मुर्मू ने महिलाओं के सशक्‍तीकरण से जोड़ा.

राष्ट्रपति मुर्मु ने पढ़ा संविधान का प्रियंबल

राष्ट्रपति मुर्मु ने संविधान का प्रियंबल पढ़ते हुए कहा कि हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर, अपनी संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

नौ भाषाओं में संविधान का अनुवादित संस्करण जारी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया सहित नौ भाषाओं में संविधान का अनुवादित संस्करण जारी किया.

देश भर में, सभी केंद्रीय मंत्रालय/विभाग, उनके अधीनस्थ और संबद्ध कार्यालय, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारें और स्थानीय निकाय इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित करेंगे। आम नागरिक कई माध्यमों से इसमें भाग लेंगे:
  • मायजीओवी.इन और संविधान75.कॉम पर प्रस्तावना का ऑनलाइन वाचन
  • प्रमाणपत्र सृजन और सोशल मीडिया साझाकरण में भागीदारी
  • ‘हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान’ पर राष्ट्रीय ऑनलाइन क्विज और ब्लॉग/निबंध प्रतियोगिताएं
  • सम्मेलन, सेमिनार, वाद-विवाद, लघु फिल्में, प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पोस्टर/पेंटिंग और रंगोली प्रतियोगिताएं, तथा पंचायत से संसद स्तर तक संविधान-विषयक अन्य गतिविधियां।

इस प्रकार, संविधान दिवस, 2025 को देश के हर कोने में और विश्व में रहने वाले भारतीयों द्वारा संवैधानिक मूल्यों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कार्यक्रम के दौरान भारत के संविधान की प्रस्तावना पढ़ने का नेतृत्व करेंगी। इस कार्यक्रम के दौरान यादगार पुस्तिका ‘भारत के संविधान में कला और कैलिग्राफी’ भी जारी की जाएगी।

संविधान दिवस के मौके पर क्‍या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

संविधान दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान के निर्माताओं को याद किया. उन्‍होंने एक्‍स पर पोस्‍ट कर कहा, ‘संविधान दिवस पर हम अपने संविधान के निर्माताओं को श्रद्धांजलि देते हैं. उनकी दूरदर्शी सोच और विजन हमें विकसित भारत के निर्माण की दिशा में लगातार प्रेरित करता है. हमारा संविधान मानव गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व देता है. यह हमें अधिकार देता है, लेकिन साथ ही यह नागरिक होने के नाते हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है, जिन्हें हमें हमेशा पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए. यही कर्तव्य एक मजबूत लोकतंत्र की नींव हैं. आइए, अपने कार्यों के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के संकल्प को दोहराएं.’
आज महान लोगों को याद करने का दिन: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संविधान दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन उन महान लोगों को याद करने का अवसर है जिन्होंने भारत गणराज्य की नींव रखी. उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा संविधान देश की लोकतांत्रिक यात्रा के मार्गदर्शक मूल्यों को समेटे हुए है. रक्षा मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे न्याय और समानता के प्रति अपने संकल्प को दोबारा मजबूत करें और मिलकर उस भविष्य के निर्माण में जुटें, जिसकी कल्पना संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने की थी.

गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान दिवस पर निर्माताओं को किया याद

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 76वें संविधान दिवस के मौके पर संविधान निर्माताओं को याद किया. उन्‍होंने एक्‍स पर पोस्‍ट किया, ‘आज ‘संविधान दिवस’ पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी सहित संविधान सभा के सभी महान सदस्यों को नमन और देशवासियों को इस दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का संविधान हर देशवासी को समान अवसर, सम्मानपूर्ण जीवन, राष्ट्रीय कर्त्तव्य और अधिकार प्रदान कर मजबूत राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘संविधान दिवस’ की शुरुआत कर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति देशवासियों को अधिक सजग बनाने का कार्य किया है.’

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