बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद लालू यादव के परिवार में जो कलह नजर आया है, उसका आधार दो-ढाई साल पहले से ही तैयार हो रहा था। इस विवाद में तेजस्वी यादव के खास संजय यादव मुख्य किरदार रहे हैं।
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही आरजेडी की फर्स्ट फैमिली पूरी तरह से बिखर गयी है। पहले लालू यादव और राबड़ी देवी की एक बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने छोटे भाई और विधानसभा चुनावों में महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव पर आरोप लगाते हुए घर छोड़ा, उसके बाद उनकी तीन और छोटी बहनों रागिनी, चंदा और राजलक्ष्मी यादव ने भी बड़ी बहन की तरह ही माता-पिता का घर छोड़ देने में भलाई समझी। तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव को लालू चुनाव से पहले ही परिवार और पार्टी से बेदखल कर चुके हैं। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर चुनाव नतीजे आने के बाद ऐसा क्या हुआ है कि लालू यादव का परिवार इस तरह से बिखर गया।
आरजेडी की बैठक में क्या हुआ?
जानकारी के मुताबिक लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव पर जिस तरह के आरोप लगाकर राजनीति और पिता का परिवार छोड़ने का फैसला किया, उसके पीछे आरजेडी की वह आंतरिक समीक्षा बैठक है, जिसमें भाई-बहन के बीच ही बहुत ही गंभीर विवाद हो गया। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार इस बैठक में तेजस्वी ने रोहिणी से कुछ ऐसा कह दिया, जिसने उन्हें बहुत ही ज्यादा आहत किया। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि बैठक में तेजस्वी और रोहिणी के बीच बहुत ही कड़वी बहस हो गई थी। दरअसल, रोहिणी ने तेजस्वी से यह कह दिया था कि आरजेडी के वर्कर संजय यादव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, इसपर उन्हें कुछ करना चाहिए। तेजस्वी अपनी बहन की इस सलाह पर आपे से बाहर हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने कहा कि तेजस्वी ने विवाद के बीच अपने बहन से कह दिया, ‘हम तुम्हारी वजह से चुनाव हारे हैं। हमें तुम्हारी वजह से श्राप लगा है।’ सूत्रों ने कहा कि इसी के बाद तेजस्वी ने अपनी बड़ी बहन को अपशब्द कहे और उनपर चप्पल फेंकी। रोहिणी आचार्य ने शनिवार को घर छोड़ते वक्त पार्टी सांसद संजय यादव और तेजस्वी के क्रिकेट के जमाने के दोस्त रमीज नेमत खान को उनके साथ हुई घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया था। लालू यादव को अपनी किडनी देने वाली बेटी ने घर छोड़ते हुए कहा कि ‘संजय यादव ने मुझसे यही करने को कहा है। ‘
‘तेजस्वी ने ही प्रचार के लिए बुलाया’
रिपोर्ट के अनुसार चुनाव अभियान के लिए तेजस्वी यादव ने खुद ही अपनी बहन को सिंगापुर से बुलाया था। वह चाहते थे कि रोहिणी उनके लिए राघोपुर में चुनाव प्रचार करें, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि घर से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव की वजह से वहां उन्हें परेशानी हो सकती है। सू्त्रों का कहना है कि रोहिणी चाहती थीं कि वह सारण जिले की सभी विधानसभाओं में प्रचार करें, ताकि एकजुटता नजर आए, लेकिन तेजस्वी ने उन्हें सिर्फ राघोपुर जाने की इजाजत दी थी।
‘सारण से चुनाव लड़ने से हिचक रही थीं’
सूत्रों की मानें परिवार में विवाद पहले से ही चल था, जो चरम पर पहुंचने के बाद सार्वजनिक हो गया। तेजस्वी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले ही रोहिणी से कहा था कि वो सिंगापुर से आएं और सारण से चुनाव लड़ें। पहले रोहिणी ने यह कहा कि अगर लालू यादव सहमति देंगे, तभी वह विचार कर सकती हैं। असल में वो चाहती थीं कि उन्हें पाटलिपुत्र सीट से टिकट मिले। लेकिन, यह बात मीसा भारत को पसंद नहीं थी। आखिरकार लालू ने हामी भर दी तो भाई के कहने के हिसाब से वह बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ चुनाव लड़ने पहुंच गईं। हालांकि, सारण सीट को लेकर वह शुरू से ही असहज थीं और चुनाव हार भी गईं।
‘संजय के निशाने पर रहती थीं रोहिणी’
सूत्रों का कहना है कि लालू परिवार में तब से असहजता शुरू हुई, जब 2024 में लोकसभा चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले संजय यादव की वहां दखलअंदाजी काफी बढ़ने लगी। उन्होंने अक्सर यह कहना शुरू कर दिया था कि रोहिणी तेजस्वी के सियासी करियर के लिए खतरा बन सकती हैं। सूत्रो का कहना है कि संजय ने कई बार रोहिणी से राजनीति छोड़कर सिंगापुर लौट जाने को कह दिया था और यहां तक कि अपमानित तक करता था।
‘टिकट बंटवारे से भी रोहिणी को लगा झटका’
रोहिणी के साथ करीब से काम कर चुके सूत्रों का आरोप है कि पार्टी के अंदर से ही सारण में उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिशें हुईं। इनमें से एक साजिशकर्ता वह है, जो यादव परिवार का बहुत करीबी है और खुद ही सारण से चुनाव लड़ना चाहता था। रोहिणी आचार्य को इस बात से भी ठेस पहुंची थी कि पार्टी के जिन दो विधायकों ने सारण में उनकी हार पर बार-बार उन्हें घेरने की कोशिश की, उन्हें इस बार के विधानसभा चुनाव में आसानी से पार्टी का टिकट दे दिया गय
समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं………
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