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पहलगाम हमला लश्कर-ए-तैयबा (LeT, QDe.118) के समर्थन के बिना संभव नहीं था और TRF और LeT के बीच संबंध हैं-UNSC

UB India News by UB India News
July 31, 2025
in अपराध
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पहलगाम हमला लश्कर-ए-तैयबा (LeT, QDe.118) के समर्थन के बिना संभव नहीं था और TRF और LeT के बीच संबंध हैं-UNSC
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध निगरानी टीम ने पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है. यूएन ने कहा है कि द रेजिस्टेंस फ्रंट ने पहलगाम आतंकी हमले की दो बार जिम्मेदारी ली थी, इतना ही नहीं, उसने घटनास्थान की एक फोटो भी शेयर की है. यूएन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पहलगाम आतंकी पहलमा पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन के बिना संभव नहीं था.

इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उनसे जुड़े संगठनों पर एनालिटिकल सपोर्ट एंड सेंक्शन मॉनिटरिंग टीम की मंगलवार को 36वीं रिपोर्ट में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र किया गया है. इस हमले में 26 लोगों की हत्या कर दी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है, ”पांच आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटक स्थल पर हमला किया. टीआरएफ ने इस हमले की जिम्मेदारी उसी दिन ली और साथ ही घटनास्थल की एक तस्वीर भी प्रकाशित की थी.” 

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पाकिस्तान को आतंकवाद पर नरमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए…………

मुजफ्फरपुर में प्रॉपर्टी डीलर की गोली मारकर हत्या

‘लश्कर की मदद के बिना संभव नहीं था हमला’

पीटीआई के मुताबिक, रिपोर्ट में एक सदस्य देश के हवाले से कहा गया है, ”यह हमला पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन के बिना संभव नहीं था और टीआरएफ तथा लश्कर के बीच संबंध हैं. एक दूसरे सदस्य देश ने कहा कि हमला टीआरएफ ने किया था जो लश्कर का ही दूसरा नाम है.” हालांकि, एक अन्य सदस्य देश ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि लश्कर-ए-तैयबा अब निष्क्रिय हो चुका है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान के दबाव में नहीं लिया टीआरएफ का नाम?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय संबंध अब भी नाजुक हैं और ‘‘यह आशंका है कि आतंकवादी संगठन इन क्षेत्रीय तनावों का फायदा उठा सकते हैं.’’ अमेरिका ने इस महीने टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किया है. पहलगाम हमले के बाद 25 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर कहा था कि ऐसे घृणित आतंकवादी काम के जिम्मेदार अपराधियों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाना जरूरी है. हालांकि, पाकिस्तान के दबाव में उस बयान में टीआरएफ का नाम शामिल नहीं किया गया था.

1267 की मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट में क्या है?
*22 अप्रैल को पांच आतंकवादियों ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक पर्यटक स्थल पर हमला किया. इस हमले में 26 नागरिक मारे गए. उसी दिन इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली. साथ ही हमले के स्थल की एक तस्वीर भी प्रकाशित की. अगले दिन भी इसने हमले की जिम्मेदारी को दोहराया. हालांकि, 26 अप्रैल को TRF ने हमले से अपने जिम्मेदारी वापस ले ली. इसके बाद TRF की ओर से कोई और संवाद नहीं हुआ, और किसी अन्य समूह ने भी जिम्मेदारी नहीं ली. क्षेत्रीय संबंध पहले से ही नाजुक हैं और आशंका है कि आतंकवादी समूह इन तनावों का फायदा उठा सकते हैं.’

रिपोर्ट के मुताबिक, एक सदस्य देश ने कहा कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा (LeT, QDe.118) के समर्थन के बिना संभव नहीं था और TRF और LeT के बीच संबंध हैं. एक अन्य सदस्य देश ने कहा कि यह हमला TRF द्वारा किया गया, जो LeT के पर्याय के रूप में कार्य करता है. जबकि एक अन्य सदस्य देश ने इन विचारों को खारिज कर दिया और कहा कि LeT अब निष्क्रिय हो चुका है.
मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट में TRF के उल्लेख का क्या महत्व?

दरअसल, 1267 प्रतिबंध समिति का यह निर्णय सर्वसम्मति से है. टीआरएफ का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम (MT) की रिपोर्ट में शामिल होना, इसलिए विशेष रूप से अहम है क्योंकि इस समिति के सभी निर्णय (जिनमें निगरानी रिपोर्टें भी शामिल हैं) सुरक्षा परिषद के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से लिए जाते हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने पहले पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में यह दावा किया था कि उन्होंने UNSC के प्रेस बयान से TRF का जिक्र हटवाया था, लेकिन TRF का MT रिपोर्ट में उल्लेख यह दिखाता है कि विश्व समुदाय पाकिस्तान की झूठी और भ्रामक कहानी को स्वीकार नहीं करता.
भारत ने कर दिया है इंतजाम

दरअसल, भारत ने इस साल अप्रैल और मई में समिति को TRF के बढ़ते प्रभाव और लश्कर के साथ इसके संबंधों के बारे में जानकारी दी थी.  एक सदस्य देश ने स्पष्ट रूप से कहा है कि टीआरएफ वास्तव में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है. रिपोर्ट में यह भी व्यापक चेतावनी दी गई है कि आतंकवादी समूह क्षेत्रीय तनाव का फायदा उठा सकते हैं. मामले को अगली बार UNSC प्रतिबंध समिति द्वारा उठाया जाएगा. वहां भारत TRF के खिलाफ औपचारिक प्रतिबंध लगाने की उम्मीद कर रहा है. अगर फल होता है, तो यह वैश्विक मंच पर नई दिल्ली के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और सुरक्षा जीत होगी.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध निगरानी टीम ने पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है. यूएन ने कहा है कि द रेजिस्टेंस फ्रंट ने पहलगाम आतंकी हमले की दो बार जिम्मेदारी ली थी, इतना ही नहीं, उसने घटनास्थान की एक फोटो भी शेयर की है. यूएन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पहलगाम आतंकी पहलमा पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन के बिना संभव नहीं था.

इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उनसे जुड़े संगठनों पर एनालिटिकल सपोर्ट एंड सेंक्शन मॉनिटरिंग टीम की मंगलवार को 36वीं रिपोर्ट में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र किया गया है. इस हमले में 26 लोगों की हत्या कर दी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है, ”पांच आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटक स्थल पर हमला किया. टीआरएफ ने इस हमले की जिम्मेदारी उसी दिन ली और साथ ही घटनास्थल की एक तस्वीर भी प्रकाशित की थी.” 

‘लश्कर की मदद के बिना संभव नहीं था हमला’

पीटीआई के मुताबिक, रिपोर्ट में एक सदस्य देश के हवाले से कहा गया है, ”यह हमला पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन के बिना संभव नहीं था और टीआरएफ तथा लश्कर के बीच संबंध हैं. एक दूसरे सदस्य देश ने कहा कि हमला टीआरएफ ने किया था जो लश्कर का ही दूसरा नाम है.” हालांकि, एक अन्य सदस्य देश ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि लश्कर-ए-तैयबा अब निष्क्रिय हो चुका है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान के दबाव में नहीं लिया टीआरएफ का नाम?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय संबंध अब भी नाजुक हैं और ‘‘यह आशंका है कि आतंकवादी संगठन इन क्षेत्रीय तनावों का फायदा उठा सकते हैं.’’ अमेरिका ने इस महीने टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किया है. पहलगाम हमले के बाद 25 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर कहा था कि ऐसे घृणित आतंकवादी काम के जिम्मेदार अपराधियों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाना जरूरी है. हालांकि, पाकिस्तान के दबाव में उस बयान में टीआरएफ का नाम शामिल नहीं किया गया था.

1267 की मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट में क्या है?
*22 अप्रैल को पांच आतंकवादियों ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक पर्यटक स्थल पर हमला किया. इस हमले में 26 नागरिक मारे गए. उसी दिन इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली. साथ ही हमले के स्थल की एक तस्वीर भी प्रकाशित की. अगले दिन भी इसने हमले की जिम्मेदारी को दोहराया. हालांकि, 26 अप्रैल को TRF ने हमले से अपने जिम्मेदारी वापस ले ली. इसके बाद TRF की ओर से कोई और संवाद नहीं हुआ, और किसी अन्य समूह ने भी जिम्मेदारी नहीं ली. क्षेत्रीय संबंध पहले से ही नाजुक हैं और आशंका है कि आतंकवादी समूह इन तनावों का फायदा उठा सकते हैं.’

रिपोर्ट के मुताबिक, एक सदस्य देश ने कहा कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा (LeT, QDe.118) के समर्थन के बिना संभव नहीं था और TRF और LeT के बीच संबंध हैं. एक अन्य सदस्य देश ने कहा कि यह हमला TRF द्वारा किया गया, जो LeT के पर्याय के रूप में कार्य करता है. जबकि एक अन्य सदस्य देश ने इन विचारों को खारिज कर दिया और कहा कि LeT अब निष्क्रिय हो चुका है.
मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट में TRF के उल्लेख का क्या महत्व?

दरअसल, 1267 प्रतिबंध समिति का यह निर्णय सर्वसम्मति से है. टीआरएफ का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम (MT) की रिपोर्ट में शामिल होना, इसलिए विशेष रूप से अहम है क्योंकि इस समिति के सभी निर्णय (जिनमें निगरानी रिपोर्टें भी शामिल हैं) सुरक्षा परिषद के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से लिए जाते हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने पहले पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली में यह दावा किया था कि उन्होंने UNSC के प्रेस बयान से TRF का जिक्र हटवाया था, लेकिन TRF का MT रिपोर्ट में उल्लेख यह दिखाता है कि विश्व समुदाय पाकिस्तान की झूठी और भ्रामक कहानी को स्वीकार नहीं करता.
भारत ने कर दिया है इंतजाम

दरअसल, भारत ने इस साल अप्रैल और मई में समिति को TRF के बढ़ते प्रभाव और लश्कर के साथ इसके संबंधों के बारे में जानकारी दी थी.  एक सदस्य देश ने स्पष्ट रूप से कहा है कि टीआरएफ वास्तव में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है. रिपोर्ट में यह भी व्यापक चेतावनी दी गई है कि आतंकवादी समूह क्षेत्रीय तनाव का फायदा उठा सकते हैं. मामले को अगली बार UNSC प्रतिबंध समिति द्वारा उठाया जाएगा. वहां भारत TRF के खिलाफ औपचारिक प्रतिबंध लगाने की उम्मीद कर रहा है. अगर फल होता है, तो यह वैश्विक मंच पर नई दिल्ली के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और सुरक्षा जीत होगी.
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