चीन में इन दिनों पाकिस्तान के आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर पहुंचे हैं. मुनीर की मौजूदगी ने भारत को अलर्ट कर दिया है. पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की है. यह एक ऐसा कूटनीतिक मौका है जो दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में बड़ी कहानी का हिस्सा बनता जा रहा है. इस दौरान चीन ने पाकिस्तान को हर तरह की मदद देने का वादा किया. लेकिन साथ ही यह भी मांग की है कि पाकिस्तानी सेना चीन के नागरिकों, प्रोजेक्ट्स और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोई कसर न छोड़े. जवाब में मुनीर ने भरोसा दिलाया कि चीन के साथ दोस्ताना सहयोग पाकिस्तान में समाज के हर स्तर पर स्वीकार्य है और सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी जाएगी.
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह मुनीर का पहला चीन दौरा है. भारत के साथ तनाव और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच पाकिस्तान अपनी सैन्य साझेदारियों को नए सिरे से गढ़ने की कोशिशों में लगा है. जनरल मुनीर खुद इस ‘सैन्य कूटनीति मिशन’ की अगुवाई कर रहे हैं. उनकी यह यात्रा एक लंबी सीरीज का हिस्सा है. इससे पहले वह अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, तुर्की, ईरान और अजरबैजान की यात्राएं भी कर चुके हैं. यह साफ तौर पर दिखाा है कि पाकिस्तान में हर चीज सेना कंट्रोल करती है. आज जब दुनिया से बात करने की बारी आई तो खुद सेना ही डिप्लोमेसी कर रही है. टॉप मिलिट्री सूत्रों का कहना है कि इन दौरों का मकसद सिर्फ हाथ मिलाना नहीं, बल्कि सुरक्षा सहयोग, हथियार सौदे और खुफिया साझेदारी जैसी गंभीर चर्चाएं हैं.
चीन-तुर्की का सेल्समैन बना मुनीर
चीन की यात्रा को काफी हद तक सीक्रेट रखा गया है, क्योंकि इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन, खुफिया जानकारी साझा करना और रक्षा खरीद पर चर्चा हुई. दरअसल पाकिस्तान अपनी सैन्य कूटनीति में के जरिए बड़ा दांव खेल रहा है. वह चीन और तुर्की की के हथियारों का सेल्समैन बनकर घूम रहा है. वह JF-17 फाइटर जेट और बायरकटर ड्रोन, को बढ़ावा दे रहा है. ये हथियार वह श्रीलंका, इंडोनेशिया और ईरान जैसे देशों को बेचने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में इन हथियारों का इस्तेमाल भारत से संघर्ष के दौरान किया गया था.
पाकिस्तान GHQ (जनरल हेडक्वार्टर) से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना इस समय एक बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रही है. यह नई ‘डिप्लोमेसी की लहर’ पाकिस्तान की सैन्य साझेदारियों को नए सिरे से गढ़ने की लंबी योजना का हिस्सा है. खासकर तब, जब पूरे क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने अपनी हाल की यात्राओं को ‘सफल राजनयिक चालें’ बताया है. उन्होंने कहा कि इन यात्राओं के जरिए उन्होंने सुरक्षा और रक्षा सहयोग का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया है. अब पाकिस्तान की कोशिश यह है कि वह सिर्फ पुराने सैन्य गठबंधनों पर निर्भर न रहे, बल्कि दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूरे मिडिल ईस्ट में ऐसे देश खोजे, जिनके साथ मिलकर वह साझा सुरक्षा योजनाएं चला सके. इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान नई दोस्तियां बना रहा है, ताकि वह सिर्फ अमेरिका या चीन पर निर्भर न रहे.







