अहमदाबाद में क्रैश हुए एयर इंडिया के यात्री विमान की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है। वैसे तो इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं, लेकिन कुछ खुलासे ऐसे हैं, जिसने सबको हैरान कर दिया है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि प्लेन के टेकऑफ करने के महज 3 सेकंड बाद ही दोनों इंजन बंद हो गए थे। यही घटना प्लेन क्रैश की वजह भी बनी। 15 पेज की यह रिपोर्ट भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने जारी की है।
जांच रिपोर्ट में विमान के उड़ान भरने से लेकर क्रैश होने तक का पूरा ब्योरा बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक प्लेन ने जैसे ही टेकऑफ किया उसके दोनों इंजन बंद हो गए। अचानक दोनों इंजन बंद होने के चलते फ्लाइट उड़ा रहे दोनों पायलट घबरा गए। इस दौरान उन्हें पता चला कि फ्लाइट के फ्यूल स्विच कटऑफ हो गए हैं। यानी प्लेन के दोनों इंजनों तक फ्यूल नहीं पहुंच पा रहा है।
पहले पायलट ने पूछा- फ्यूल कटऑफ क्यों किया
इंजन तक फ्यूल के न पहुंच पाने की जानकारी मिलने के बाद कॉकपिट में मौजूद पायलट ने दूसरे पायलट से सवाल किया कि उसने फ्यूल कटऑफ क्यों किया। इसके जवाब में दूसरे पायलट ने कहा कि उसने ऐसा नहीं किया है। दरअसल, फ्यूल कटऑफ होने के कारण विमान में फ्यूल की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो गई थी।
इंजन में रिकवरी हुई, लेकिन हो चुकी थी देर
जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बंद होने के दस सेकंड बाद एक इंजन का फ्यूल कटऑफ स्विच कटऑफ रन में बदल गया। यानी फ्यूल की सप्लाई फिर से शुरू हो गई। इसके ठीक चार सेकंड बाद दूसरे इंजन के साथ भी ऐसा ही हुआ। इस बीच इंजन नंबर-1 और 2 दोनों ने रिकवरी करना शुरू किया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अहमदबाद में एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर प्लेन क्रैश मामले में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है. एएआईबी के अनुसार, टेकऑफ के दौरान, प्लेन का कंट्रोल पायलट-इन-कमांड (पीआईसी) यानी कैप्टन सुमीत सभरवाल के हाथों में ना होकर को-पायलट क्लाइव कुंदन के हाथों में थे. रनवे से रोल होने से लेकर क्रैश होने तक प्लेन को को-पायलट ही ऑपरेट कर रहे थे.
एएआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, को-पायलट क्लाइव कुंदर उस समय पायलट फ्लाइंग (पीएफ) थे, जबकि पीआईसी समीत सभरवाल पायलट मॉनिटरिंग की भूमिका में थे. वह फ्लाइट एआई-171 के टेकऑफ को मॉनिटर कर रहे थे. ऐसे में, अब सवाल यह उठता है कि ऐसा करना कितना सही और कितना गलत है. एक निजी एयरलाइंस के सीनियर पायलट के अनुसार, ऐसा करने के लिए पायलट इन कमांड को तीन शर्तें पूरी करनी होंगी. इसमें पहली शर्त पायलट के कुल 3000 से अधिक फ्लाइट आवर्स होने चाहिए.
दूसरी शर्त, पीआईसी के तौर पर उसके 1000 से अधिक घंटे होने चाहिए. वहीं, तीसरा शर्त ऑन टाइप फ्लाइट में बतौर पीआईसी 300 घंटे से अधिक घंटे का अनुभव चाहिए. यानी, पायलट जिस मेक का एयरक्राफ्ट उड़ा रहे हैं, उसमें पीआईसी के तौर पर 300 घंटे का अनुभव चाहिए. उनके अनुसार, कैप्टन समीत सभरवाल न केवल इन तीनों शर्तो को पूरा करते थे, बल्कि को-पायलट के तौर पर 300 घंटे का ऑन टाइम अनुभव की शर्त को-पायलट क्लाइव कुंदर भी पूरी कर रहे थे. ऐसे में पीआईसी की निगरानी में प्लेन का कंट्रोल लेना किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं है.
एएआईबी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि प्लेन के टेकऑफ करते ही दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच एक सेकेंड के अंदर कटऑप हो गए. जिसके चलते, इंजन में फ्यूल सप्लाई पहुंचना बंद गई. प्लेन अपना थ्रस्ट और पॉवर खोने लगा. महज कुछ के अंदर प्लेन अहमदाबाद एयरपोर्ट के समीप क्रैश हो गया.







