बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एक दिन पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद को पत्र लिखकर महागठबंधन में शामिल करने का आग्रह किया था। शुक्रवार को राजद ने इसे ठुकरा दिया। हालांकि राजद प्रमुख या बिहार में महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा सांसद मनोज झा ने एआईएमआईएम के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद 2020 की तरह ही बिहार चुनाव में फिर तीसरे मोर्चे के आसार बन रहे हैं। उधर, लड़ाई को चतुष्कोणीय बनाने को लेकर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ताबड़तोड़ सभाएं कर रहे हैं।
ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने गुरुवार शाम लालू प्रसाद को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि अगर हम लोग मिलकर लड़ेंगे तो सेक्युलर वोटों का बिखराव नहीं होगा और बिहार में महागठबंधन की सरकार बनेगी। शुक्रवार को इस प्रस्ताव पर राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी का जनाधार हैदराबाद में है। कभी-कभी चुनाव ना लड़ना भी मदद करना होता है। अगर वह भाजपा को हराना चाहते हैं तो बिहार में चुनाव ना लड़ें। यह बात ओवैसी साहब जानते हैं और उनके सलाहकार भी जानते हैं। अगर आपकी मंशा है कि बीजेपी के अधिनायकवादी चरित्र को शिकस्त दी जाए और नफरत की उनकी राजनीति को हराया जाए तो तो कई दफा चुनाव ना लड़ने का फैसला भी उसी तरह का फैसला होगा। मुझे उम्मीद है कि वह इस पर विचार करेंगे। वहीं, मनोज झा की प्रतिक्रिया पर अख्तरुल ईमान ने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा, हमारे प्रस्ताव पर विचार नहीं हुआ तो थर्ड फ्रंट जिंदाबाद। कोई हमारी उदारता को कमजोरी न समझे। तीसरे मोर्चे को लेकर दलों से हमारी बातचीत जारी है। उधर, कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू ने इस मामले में कोई प्रतिक्रया देने से इनकार किया। कहा कि जिसने और जिसे प्रस्ताव भेजा है, उनसे पूछिए। दूसरी तरफ एनडीए के प्रमुख दल जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इसपर तंज कसा है। कहा कि क्या ओवैसी अपने बयान पर टिकेंगे जो उन्होंने पहले दिए हैं। आरजेडी ने ओवैसी के चार विधायक तोड़ लिए थे। नीरज ने कहा, राजद बिना दान और जकात के कुछ काम नहीं करता है। बिना दान के एआईएमआईएम के लिए लालू गेट नहीं खोलेंगे।
2020 के चुनाव में एआईएमआईएम ने बसपा समेत छह दलों का तीसरा मोर्चा बनाया था
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने बसपा समेत छह दलों का तीसरा मोर्चा बनाया था। हालांकि इस मोर्चे से सबसे अधिक उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा ने 104 प्रत्याशी दिए, लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। वहीं ओवैसी की पार्टी ने दो दर्जन उम्मीदवार उतारे और पांच सीट पर जीत मिली। अलबत्ता उसके चार विधायक राजद में शामिल हो गए। अब प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान इस दल के अकेले विधायक हैं। वहीं, इस चुनाव में एनडीए से अलग होकर 135 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली लोजपा ने एनडीए और खासकर जदयू को भारी नुकसान पहुंचाया था। उसे भी महज एक ही सीट पर जीत मिली और उसके इकलौते विधायक भी आगे चलकर जदयू में शामिल हो गए।
ग्रैंड अलायंस
रालोसपा 104 0
बसपा 80 1
एआईएमआईएम 24 5
जपासो 05 0
भासपा 05 0
सजदडे 25 0
अन्य दल
लोजपा 135 1
जाप 154 0
एनसीपी 81 0
(एक निर्दलीय सुमित कुमार सिंह चकाई से जीते जो एनडीए के साथ हैं)
दल लड़े जीते
एनडीए
जदयू 115 43
भाजपा 110 74
वीआईपी 11 04
हम 07 04
महागठबंधन
राजद : 144 75
कांग्रेस : 70 19
वामदल : 29 16







