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कुलांचे मारता सोना, दगाबाज बना है बजार ……………….

UB India News by UB India News
April 13, 2025
in खास खबर, शेयर बाज़ार
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कुलांचे मारता सोना, दगाबाज बना है बजार ……………….
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अमेरिका और चीन के बीच ट्रैरिफ वॉर तेज हो गई है। इससे शेयर बाजारों में अनिश्चितता है। निवेशकों में डर का माहौल है। मुश्किल समय में ज्‍यादातर शेयर ‘दगाबाज’ साबित हो रहे हैं। इसके उलट सोना तेजी से बढ़ रहा है। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ गई है। फिक्स्ड इनकम से मिल रहा रिटर्न सामान्‍य है। जिन लोगों ने अपने पोर्टफोलियो में सोना और फिक्स्ड इनकम को शामिल किया था, वे दूसरों से बेहतर कर रहे हैं।

सावधानी से आगे बढ़ने का समय
जानकारों का कहना है कि यह सावधानी से आगे बढ़ने का समय है। निवेश में ज्यादा जोखिम लेने से बचना चाहिए। बाजार तेजी से ऊपर-नीचे जा रहा है। एक ओर जहां 2 जनवरी से 4 मार्च के बीच बीएसई सेंसेक्स 9% गिर गया। वहीं, 25 मार्च तक 7% बढ़ गया। अगर अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर अनिश्चितता बनी रहती है तो स्थितियों को सुधरने में लंबा समय लग सकता है।

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ऐतिहासिक रूप से बाजार में बड़ी गिरावट (30% से ज्‍यादा) और उसके बाद सुधार होने में लगभग दो साल लगे हैं। लेकिन, कुछ में चार-पांच साल भी लगे हैं। हाल के वर्षों में बाजार में कोई बड़ा झटका नहीं लगा है। ऐसे में कई निवेशकों को लगता है कि वे शेयर बाजार की अस्थिरता को संभाल सकते हैं। उन्होंने अभी तक ज्यादा अस्थिरता नहीं देखी है। कई लोग अब उम्मीद करते हैं कि बाजार फिर से खड़ा होगा और ऊपर चढ़ेगा। लेकिन, इतिहास को एक चेतावनी के रूप में देखना चाहिए। 2008 की मंदी की यादें अभी भी निवेशकों के दिमाग में ताजा हैं। लेकिन, ऐसे भी उदाहरण हैं जब सुधार में बहुत लंबा समय लगा था।

आगे भी आ सकती है शेयरों में ग‍िरावट
फिलिप कैपिटल में वेल्‍थ मैनेजर प्रतीक मिश्रा कहते हैं कि निवेशकों को अभी ज्‍यादा जोखिम लेने से बचना चाहिए। सोच-समझकर निवेश का फैसला लेने की जरूरत है। बाजार में बीच-बीच में तेजी देखने को मिली है। आगे अगर कंपनियों का मुनाफा कम होता है या दुनिया की अर्थव्यवस्था बिगड़ती है तो बाजार फिर से नीचे जा सकता है। जोखिम प्रोफाइल और लंबी अवधि के इन्‍वेस्‍टमेंट हॉरिजन को देखते हुए पोर्टफोलियो का लगभग 75%-80% इक्विटी में आवंटित करना सही होगा।

बाजार में डर का माहौल किस कदर है यह AMFI के ताजा आंकड़ों से पता चलता है। मार्च 2025 में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 14.4% घटकर 25,082 करोड़ रुपये रहा। पिछले महीने यह 29,303 करोड़ रुपये था। SIP में निवेश थोड़ा घटकर 25,926 करोड़ रुपये पहुंच गया। फरवरी 2025 में यह 25,999 करोड़ रुपये था। यह लगातार चौथा महीना है जब SIP में निवेश कम हुआ है। इसकी वजह अमेरिका की ओर से लगाए गए टैक्स, महंगाई की चिंता और दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे तनाव हैं।

ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में और गिरावट आने की आशंका से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। यही कारण है कि एक्सपर्ट्स निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छी बुनियादी वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जा सकता है। लेकिन, फिलहाल बड़ी रकम लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

सोना क्‍यों है तेजी के रथ पर सवार?
जब दुनिया में उथल-पुथल मची होती है या शेयर बाजार में गिरावट आती है तो सोना ऐसी मुश्किलों से बचने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता रहा है। यही कारण है कि सोना आजकल बहुत चमक गया है। इसकी कीमतें हर दिन नए रिकॉर्ड बना रही हैं। 12 अप्रैल को दिल्‍ली के सराफा बाजार में सोने की कीमत 6,250 रुपये उछलकर 96,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव बढ़ने के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर मांग बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत अब तक के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इससे घरेलू कीमतों को बढ़ावा मिला।

पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण रहे हैं। सबसे पहले, महंगाई एक बड़ा कारण है। जब महंगाई बढ़ती है तो लोगों को लगता है कि उनकी बचत का मूल्य कम हो रहा है। इसलिए, वे सोने में निवेश करना पसंद करते हैं। कारण है कि सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है।

दूसरा, दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता भी सोने की कीमतों को बढ़ाती है। जब दुनिया में युद्ध या तनाव होता है तो लोग सोने में निवेश करना पसंद करते हैं। यह मुश्किल समय में सुरक्षित माना जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष जैसे कारणों से भी सोने की कीमतें बढ़ी हैं।

तीसरा, ब्याज दरों का भी सोने की कीमतों पर असर पड़ता है। आमतौर पर, जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोने की कीमतें कम होती हैं। लोग सोने के बजाय ब्याज देने वाले निवेशों में पैसा लगाना पसंद करते हैं। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हुआ। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ानी शुरू कीं तो सोने की कीमतें और बढ़ने लगीं।

20 सालों में सोने और सेंसेक्स दोनों का र‍िटर्न लगभग बराबर
अब सवाल यह है कि क्या सोना अभी भी महंगाई से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है? इसका जवाब थोड़ा मुश्किल है। पहले सोना महंगाई से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोने की कीमतें सिर्फ महंगाई पर ही निर्भर नहीं करती हैं। वे दुनिया की राजनीतिक स्थिति और ब्याज दरों पर भी निर्भर करती हैं।

इसलिए, अगर आप सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं तो आपको इन सभी बातों पर ध्यान देना होगा। आपको यह भी देखना होगा कि आपकी निवेश करने की क्षमता कितनी है और आपके निवेश के लक्ष्य क्या हैं।

भारत में सोने की कीमतें रुपये में होती हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में होती हैं। ऐसे में रुपये की कीमत में बदलाव का भी सोने की कीमतों पर असर पड़ता है। अगर रुपया कमजोर होता है तो भारत में सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं।

पिछले 20 सालों में सोने और सेंसेक्स दोनों ने लगभग बराबर रिटर्न दिया है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों एक जैसे निवेश हैं। सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि सेंसेक्स में जोखिम ज्यादा होता है।

ऐसे में आपको अपनी निवेश करने की क्षमता और अपने लक्ष्यों के अनुसार ही निवेश करना चाहिए। अगर आप सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं तो आप सोने में निवेश कर सकते हैं। लेकिन, अगर आप ज्यादा रिटर्न चाहते हैं तो आप सेंसेक्स में भी निवेश कर सकते हैं।

आपको क्‍या करना चाहिए?
सोना और शेयर अलग-अलग प्रकार के निवेश हैं, लेकिन उन्होंने दो दशकों में करीब-करीब एक जैसा रिटर्न द‍िया है। इक्विटी और बॉन्ड के साथ सोने में अच्छी हिस्सेदारी किसी के पोर्टफोलियो को जरूरी स्थिरता देगी। वहीं, किसी एक चीज का कॉन्‍सेंट्रेशन जोखिम को बढ़ा देगा। इसलिए आपको अपने पोर्टफोलियो में सोना, स्टॉक और बॉन्ड तीनों को शामिल करना चाहिए। इससे आपको अच्छा रिटर्न भी मिलेगा और आपका जोखिम भी कम होगा। यह खेल सोने या स्टॉक का नहीं है। यह आपके एसेट एलोकेशन का है। सही अनुपात में दोनों का होना जरूरी है। इसका मतलब है कि आपको अपनी संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर निवेश करना चाहिए ताकि अगर एक जगह नुकसान हो तो दूसरी जगह से फायदा हो सके।

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