अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया भर के ज़्यादातर देशों पर टैरिफ लगाए जाने के बाद गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई। Dow Jones Industrial Average, S&P index, Nasdaq indices में तेज़ी से गिरावट आई। टैरिफ से दुनिया भर में आर्थिक मंदी और टैरिफ युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। चीन ने अमेरिका से कहा है कि वो 34 प्रतिशत टैरिफ वापस ले, वरना वह जवाबी कदम उठाएगा। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि उद्योगों और निर्यातकों से लगातार बातचीत जारी है और भारत पर लगाये गये 26 प्रतिशत टैरिफ से व्यापार और उद्योग पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जा रहा है। ट्रम्प ने भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर, सेमीकंडक्टर, कॉपर और कुछ एनर्जी प्रोडक्ट्स जैसे तेल, गैस, LNG और कोयले को इस टैरिफ से छूट दी है, लेकिन ट्रंप के इस फ़रमान से देश के टैक्सटाइल, डायमंड, ऑटोमोबाइल और स्टील इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ सकता है। डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ से अमेरिका में मिलने वाली भारतीय वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। इसका मतलब होगा उनकी कम डिमांड और अमेरिका को कम निर्यात। लेकिन सकातरात्मक संकेत ये है कि जिन देशों से हमारी व्यापार प्रतिस्पर्धा है, उनके टैरिफ और भी ज्यादा बढ़ाए गए हैं। इस कारण कपड़ा और electronics जैसे क्षेत्रों में भारत का निर्यात बढ़ सकता है। चीन, थाईलैंड और बांग्लादेशी निर्यात पर high tarriff का फायदा भारत को होगा। machinery, toys, automobiles जैसे क्षेत्रों में भारत अपना प्रोडक्शन बढ़ा सकता है और उन्हें अमेरिका को निर्यात कर सकता है। भारत के पास अच्छा खासा मौका है, लेकिन इस मौके का फायदा उठाने के लिए भारत को Ease of doing business पर ध्यान देना होगा, लॉजिस्टिक और इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करना होगा।
अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामानों पर 26% का जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. यह खबर भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यात और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए बेहद अहम है. अगर आप “अमेरिका-भारत टैरिफ 2025”, “भारत के निर्यात पर टैरिफ का असर” या “भारत-अमेरिका व्यापार संबंध” जैसे सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं, तो हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि ये टैरिफ क्या हैं, इनका भारत पर क्या असर होगा, और भारत इससे कैसे निपट सकता है. अमेरिका भारत का एक बड़ा व्यापारिक साथी है, जहां 2024 में भारत ने 81 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया. लेकिन नए टैरिफ से भारत के कई क्षेत्र जैसे कपड़ा, गाड़ियां, और रत्न प्रभावित हो सकते हैं. वहीं, दवाइयां और कुछ कृषि उत्पादों को छूट मिली है.
1. अमेरिका ने भारत पर नए टैरिफ क्या लगाए हैं?
अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर 26% का “जवाबी टैरिफ” लगाने का ऐलान किया है. यह टैरिफ एक बड़े प्लान का हिस्सा है जिसमें पहले सभी देशों से आने वाले सामानों पर 10% टैरिफ लगेगा, फिर कुछ देशों के लिए खास टैरिफ होंगे. भारत के लिए 26% टैरिफ इसलिए है क्योंकि अमेरिका का कहना है कि भारत अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैक्स लगाता है और व्यापार में सख्त नियम रखता है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि भारत व्यापार में “बहुत सख्त” है. कुछ जरूरी चीजें जैसे दवाइयां, सेमीकंडक्टर, तांबा, और ऊर्जा से जुड़े सामान (तेल, गैस, कोयला, LNG) इस टैरिफ से मुक्त रहेंगे. लेकिन स्टील, एल्यूमिनियम और गाड़ियों जैसे सामानों पर 25% टैरिफ सभी देशों पर लागू होगा, जिसमें भारत भी शामिल है. बाकी सामानों पर भारत के लिए 26% टैरिफ लागू होगा.
2. अमेरिका भारत के लिए कितना बड़ा व्यापारिक साथी है?
अमेरिका भारत का एक बहुत बड़ा व्यापारिक साथी है. पिछले 25 साल से दोनों देशों के बीच अच्छा व्यापार चल रहा है. 2024 में भारत ने अमेरिका को 81 अरब डॉलर का सामान बेचा, जो भारत के कुल निर्यात का 17.7% है. अभी भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष है, यानी भारत अमेरिका को जितना सामान बेचता है, उससे कम खरीदता है.
3. इन टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
अगर 10% टैरिफ लगता है, तो भारत को 6 अरब डॉलर का निर्यात नुकसान हो सकता है, जो भारत के जीडीपी का 0.16% है. अगर 20% टैरिफ लगे, तो 31 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो जीडीपी का 2.1% है. 26% टैरिफ इन दोनों के बीच है, तो इसका असर बड़ा हो सकता है. लेकिन कुछ रिपोर्ट कहती हैं कि असर थोड़ा कम भी हो सकता है. SBI रिसर्च का कहना है कि 15-20% टैरिफ से भारत के निर्यात में 3-3.5% की कमी आएगी. सिटी रिसर्च ने चेतावनी दी है कि हर साल 7 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है.
4. भारत के कौन से क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
कई क्षेत्रों पर इन टैरिफ का असर हो सकता है. समुद्री भोजन, लोहा और स्टील, मशीनरी, दवाइयां, रत्न और आभूषण, और इलेक्ट्रिक मशीनरी जैसे क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा कपड़ा, गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योग भी मुश्किल में आ सकते हैं. मिसाल के तौर पर, भारत गाड़ियों पर ज्यादा टैक्स लगाता है, तो गाड़ियों के पार्ट्स का निर्यात प्रभावित हो सकता है. रत्न, दवाइयां और पेट्रोकेमिकल भी अमेरिका को बहुत बिकते हैं, तो इन पर असर पड़ सकता है.
5. क्या कुछ क्षेत्रों को फायदा होगा या वे सुरक्षित रहेंगे?
हां, कुछ क्षेत्रों को फायदा हो सकता है या वे सुरक्षित रह सकते हैं. दवा उद्योग को इन टैरिफ से छूट मिली है, जो भारत के लिए अच्छी खबर है क्योंकि भारत अमेरिका को बहुत सारी दवाइयां बेचता है. समुद्री भोजन और चावल जैसे कृषि उत्पाद भी मजबूत रह सकते हैं और शायद इनका निर्यात बढ़े. इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ा उद्योग को भी फायदा हो सकता है क्योंकि भारत पर टैरिफ चीन और वियतनाम जैसे देशों से कम है. इससे भारत को नए मौके मिल सकते हैं.
6. भारत इन टैरिफ के असर को कैसे कम कर सकता है?
भारत के पास कई रास्ते हैं. देश स्तर पर भारत अमेरिका से तेल, गैस और रक्षा उपकरण ज्यादा खरीद सकता है. कुछ खाने-पीने की चीजों और विदेशी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर टैक्स कम कर सकता है. उद्योग स्तर पर गाड़ियों के आयात पर टैक्स कम करना, अमेरिकी कपास पर टैरिफ हटाना, दवाइयों पर छोटा टैक्स अंतर खत्म करना और शराब व तैयार खाने पर टैरिफ कम करना जैसे कदम उठा सकता है. अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करना भी एक बड़ा कदम हो सकता है, जो 2025 के अंत तक हो सकता है.
7. भारत का टैरिफ असर बाकी एशियाई देशों से कैसे अलग है?
भारत पर अमेरिका का टैरिफ बाकी एशियाई देशों जैसे चीन, वियतनाम, बांग्लादेश और थाईलैंड से कम है. इन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगेगा. इससे भारत को कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में फायदा हो सकता है. अमेरिकी खरीदार ऊंचे टैरिफ वाले देशों की जगह भारत से सामान खरीद सकते हैं. लेकिन इसके लिए भारत को अपनी फैक्ट्रियों, गुणवत्ता और ढांचे को बेहतर करना होगा.
8. इन टैरिफ से वैश्विक व्यापार और भारत की रणनीति पर क्या असर होगा?
ये टैरिफ दिखाते हैं कि अमेरिका अब संरक्षणवादी नीतियां अपना रहा है. इससे दूसरे देश भी जवाबी टैक्स लगा सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल हो सकती है. भारत को कम टैरिफ की वजह से थोड़ा फायदा हो सकता है, लेकिन वैश्विक व्यापार में अस्थिरता से महंगाई बढ़ सकती है. भारत की “मेक इन इंडिया” योजना को मौका मिल सकता है अगर वह सप्लाई चेन के बदलाव का फायदा उठाए. लेकिन भारत को नए बाजार ढूंढने, सामानों में मूल्य जोड़ने और अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर ध्यान देना होगा ताकि भविष्य में चुनौतियों का सामना कर सके.
अमेरिकी टैरिफ के जवाब में बीजिंग ने भी लगाया 34% टैरिफ, 10 अप्रैल से होगा लागू
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के 34% टैरिफ लगाने के फैसले को घबराहट भरा बताया है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा,

चीन ने गलत कदम उठाया है। वे घबरा गए हैं। यह एक ऐसी चीज है जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। चीन का जवाबी टैरिफ उन्हें बहुत भारी पड़ेगा।

अमेरिका ने दुनिया के 60 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसमें चीन पर 34% टैरिफ लगाया है। इससे पहले ट्रम्प चीन पर एक महीने में दो बार 10%-10% टैरिफ लगा चुके हैं, जिससे कुल टैरिफ 54% तक पहुंच चुका है।
इसके जवाब में चीन ने शुक्रवार को अमेरिका पर 34% जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। नया टैरिफ 10 अप्रैल से लागू होगा।
चीन सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय ट्रेड नियमों का उल्लंघन करता है। इससे चीन के कानूनी अधिकार और हितों का नुकसान हो रहा है। यह साफ तौर पर एकतरफा दबाव डालने की कोशिश है।
अब अमेरिका आने वाले चीनी सामान पर 54% टैरिफ
जनवरी में सत्ता में लौटने के बाद से ट्रम्प ने अब तक चीन से आने वाले सभी इंपोर्ट्स पर दो बार 10% अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम अमेरिका में चीन से अवैध रूप से आने वाले फेंटेनाइल को रोकने के लिए जरूरी था। इसका मतलब यह है कि अब अमेरिका में आने वाले चीनी सामानों पर प्रभावी रूप से कुल 54% टैरिफ लागू हो गया है।
चीन ने 11 अमेरिकी कंपनियों को अविश्वसनीय बताया
शुक्रवार को जवाबी टैरिफ का ऐलान करने के साथ चीन ने 11 अमेरिकी कंपनियों को उन कंपनियों की लिस्ट में डाल दिया है जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इनमें ड्रोन बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इसके अलावा 16 अमेरिकी कंपनियों पर एक्सपोर्ट नियम लागू किए गए हैं, जिससे वे चीनी के दोहरे उपयोग वाले सामान का निर्यात न कर सकें।
अमेरिका-चीन में ट्रेड वॉर से दुनिया में आर्थिक मंदी का खतरा
अर्थशास्त्री और ‘द ग्लोबल ट्रेड पैराडाइम’ के लेखक प्रो. अरुण कुमार के मुताबिक पहले और दूसरे नंबर की आर्थिक महाशक्ति अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर दुनिया को आर्थिक मंदी में धकेल सकता है, लेकिन ट्रम्प के मनमाने टैरिफ से चीन का पलड़ा भारी रहने वाला है। कई देश अब ट्रेड के लिए चीन की ओर रुख कर सकते हैं।
34% टैरिफ से चीन के निर्यात, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता सामान, में बड़ी गिरावट आ सकती है। इससे चीनी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। चीन को नए बाजार तलाशने होंगे। अमेरिका पर टैरिफ लगाने से चीनी घरेलू उद्योगों को भी कुछ राहत मिल सकती है, क्योंकि अमेरिकी सामान महंगे होने से स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।
कनाडा ने अमेरिका पर 25% टैरिफ लगाया
इससे पहले कनाडा ने गुरुवार को अमेरिकी कारों पर 25% टैरिफ का ऐलान किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका में अपने सभी निवेश रोक दिए हैं। मैक्रों ने कहा, ट्रम्प को यूरोपीय यूनियन के ऊपर लगाए 20% टैरिफ को वापस लेना होगा।
भारत बोला- हमारी इकोनॉमी इस टैरिफ को झेल सकती है
ट्रम्प के जैसे को तैसा टैरिफ की घोषणा के बाद भारत की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि वह 26% टैरिफ के प्रभाव का आकलन कर रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि इस टैरिफ का कुछ क्षेत्रों पर असर होगा, लेकिन भारत की इकोनॉमी इसे झेल सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प प्रशासन में ऐसे प्रावधान हैं कि अगर भारत अमेरिका की चिंताओं को दूर करता है, तो टैरिफ में कुछ छूट मिल सकती है। भारत इस दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रहा है।
ट्रम्प के टैरिफ पर बाकी देशों का रिएक्शन
चीन: वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का यह एकतरफा और धमकाने वाला कदम है। उन्हें तुरंत अपने एकतरफा टैरिफ को रद्द करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो चीन भी जवाबी कदम उठाएगा।
यूरोपीय संघ (EU): EU की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने कहा कि ट्रम्प का कदम वर्ल्ड इकोनॉमी के लिए बड़ा झटका है। इससे अनिश्चितता बढ़ेगी और ग्लोब्लाइजेशन का मकसद कमजोर होगा।
कनाडा: PM कार्नी ने कहा कि हम अपने मजदूरों की रक्षा करेंगे और ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ का जवाब देंगे।
ब्राजील: संसद ने सर्वसम्मति से एक पारस्परिकता विधेयक पारित किया, जिससे सरकार को जवाबी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है। ब्राजील सरकार ने टैरिफ के मुद्दे को WTO में लेकर जाने की बात कही है।
ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया ने टैरिफ को “तर्कहीन” बताया है, लेकिन तत्काल जवाबी टैरिफ से इनकार किया। PM एंथनी अल्बनीज ने कहा कि 10% टैरिफ का कोई मतलब नहीं है। यह दोस्त का सही कदम नहीं है।
भारतवंशी सांसद बोले- टैरिफ लगाने से अलग-थलग पड़ जाएगा अमेरिका

भारतवंशी अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रम्प के पारस्परिक टैरिफ लगाने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले को गैर जिम्मेदाराना और आत्मघाती करार दिया। भारतवंशी सांसदों ने अमेरिका और भारत दोनों देशों के नेताओं से अपील की कि वे बातचीत कर इस चुनौती से निपटें।
डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि टैरिफ लगाने से कामकाजी परिवारों पर टैक्स का बोझ पड़ेगा, ताकि ट्रम्प अमीरों पर लगने वाले टैक्स में कटौती कर सकें। उन्होंने कहा कि ‘ये कथित मुक्ति दिवस के टैरिफ गैर-जिम्मेदाराना और आत्मघाती साबित होंगे। इससे लोगों पर आर्थिक दबाव बनेगा, जबकि वे पहले से ही आर्थिक मुश्किलों से घिरे हैं।’
कृष्णमूर्ति ने कहा कि टैरिफ लगाने के चलते अमेरिका वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा। इससे अमेरिका के सहयोगी देशों पर विपरीत असर पड़ेगा और इसके विरोधियों को फायदा होगा।
टैरिफ क्या है…
टैरिफ एक तरह की बॉर्डर फीस या टैक्स होता है, जो कोई भी देश विदेशों से अपने यहां आने वाले सामान पर लगाता है। यह टैक्स आयात करने वाली कंपनी पर लगाया जाता है। इसे घटा-बढ़ाकर ही देश आपस में व्यापार को कंट्रोल करते हैं।







