पटना में प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी (ED) की लगातार 24 घंटे से जारी छापेमारी ने हड़कंप मचा दिया है. ईडी की यह रेड संजीव हंस घूसकांड से जुड़े मामले में की जा रही है, जिसमें कई सरकारी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति रखने के आरोप हैं. ED सूत्रों के मुताबिक, अब तक की छानबीन में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये नकद, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात और कई निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं. बता दें, ईडी की रेड पटना के पूर्णेंदु नगर स्थित आवास समेत कई ठिकानों पर चल रही है.
जानकारी के अनुसार सरकारी टेंडर को मैनेज करने वाले सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई की है. सूत्रों के अनुसार, इस छापेमारी में तारणी दास, मुमुक्षु चौधरी, उमेश कुमार सिंह समेत चार अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के ठिकानों पर रेड जारी है. इनके अलावा, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) के वरीय पदाधिकारी के यहां भी ED की टीम छानबीन कर रही है.
साथ ही उनके आवास से लेनदेन के कई अहम साक्ष्य भी मिले हैं। कैश गिनने के लिए 4 मशीनें मंगाई गई थीं। बताया जाता है कि नोट गिनने में टीम को 8 घंटे लगे। चीफ इंजीनियर के दूसरे ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।
आरोप है कि तारिणी दास अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ठेकेदारों के लिए टेंडर मैनेज करने में मदद करते थे। इसके बदले मोटी रकम वसूलते थे।
तारिणी दास 31 अक्टूबर 2024 भवन निर्माण विभाग से रिटायर हुए थे, लेकिन 9 दिन बाद ही 9 नवंबर को उन्हें 2 साल का एक्सटेंशन दे दिया गया।
इन अफसरों के यहां भी रेड पड़ी
तारिणी दास समेत कुल 8 अफसरों के यहां देर रात तक छापेमारी चली। छापेमारी में कई बैंकों के पासबुक, कई जमीन और निवेश के कागजात मिले हैं।
- बिहार सिविल सेवा के पदाधिकारी जॉइंट सेक्रेटरी (फाइनेंस) मुमुकसु चौधरी
- बुडको के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार सिंह
- बीएमआईसीडीसीएल के सीनियर पदाधिकारी समेत चार अन्य पदाधिकारी

रिटायरमेंट के 9 दिन बाद ही एक्सटेंशन
तारिणी दास 31 अक्टूबर 2024 को रिटायर हुए थे। 9 दिन बाद ही 9 नवंबर को 2 साल का एक्सटेंशन मिला। जारी अधिसूचना में कहा गया कि ‘तारिणी को अपने पद के दायित्व के साथ ही मुख्य अभियंता के सभी अधिकार और सुविधाएं दी जाएंगी। 10 दिन बाद 19 नवंबर को कैबिनेट से मंजूरी मिली।
11 दिसंबर को उन्हें भवन निर्माण निगम में मुख्य महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया। सूत्रों के अनुसार, तारिणी दास के एक करीबी अधिकारी, जो भागलपुर में अभी तैनात हैं, वे भी टेंडर को मैनेज किया करते थे। आने वाले दिनों में ईडी उसे भी पूछताछ के लिए बुला सकती है।’
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पहले से जेल में हैं संजीव हंस
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संजीव हंस को ईडी ने पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया था। संजीव हंस के साथ ही पूर्व विधायक गुलाब यादव, प्रवीण चौधरी समेत 10 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
गैंगरेप की पुष्टि के बाद मिले थे काली कमाई के सबूत
मनी लॉन्ड्रिंग केस में IAS संजीव हंस की पांच महीने पहले अरेस्टिंग हुई थी। इस मामले में पूर्व विधायक गुलाब यादव को भी दिल्ली के रिसॉर्ट से गिरफ्तार किया गया था।
सीनियर आईएएस संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव पर गैंगरेप के आरोप की जांच के दौरान पटना पुलिस को काली कमाई के कई बड़े साक्ष्य मिले थे। इन साक्ष्यों को विजलेंस को दिया गया है, जिसके बाद एजेंसियों का एक्शन शुरू हो गया।
अब तक क्या-क्या मिला ?
- अब तक की जांच में ED को इन अधिकारियों के घरों और दफ्तरों से बड़ी मात्रा में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और कीमती सामान मिले हैं
- साढ़े तीन करोड़ रुपये कैश
- कई बैंक पासबुक और निवेश के कागजात
- सोने-चांदी के गहने और हीरे-जेवरात
- महंगे भूखंडों के दस्तावेज
कैसे हुआ खुलासा?
संजीव हंस मामले की जांच के दौरान ED को इस घोटाले की जानकारी मिली थी। कई संदिग्ध लेन-देन और संपत्ति की अनियमितताओं की रिपोर्ट मिलने के बाद ED ने पटना और अन्य शहरों में इन अधिकारियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की. ED सूत्रों का कहना है कि यह रकम घूसखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित हो सकती है. यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह घोटाला कई करोड़ों रुपये का हो सकता है.
जांच टीम को बंगले में इतनी अधिक मात्रा में नकदी और कीमती सामान देखकर हैरानी हुई. सूत्रों के अनुसार बंगले के अंदर कैश काउंट करने के लिए नोट गिनने वाली 4 मशीनें मंगाई गयी थी. जानकारी के अनुसार कैश गिनने के लिए नोट काउंटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि रकम काफी अधिक है. बताया जा रहा है कि अब तक 3.5 करोड़ कैश मिल चुका है. वहीं हीरे और सोने के कई आभूषण भी मिले हैं.
इस मामले में अब आगे क्या ?
- ED की टीम आज दोपहर तक छापेमारी पूरी कर सकती है.
- सभी बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों की कानूनी वैधता की जांच की जाएगी.
- जिन अधिकारियों के ठिकानों पर रेड हुई है, उनसे जल्द ही पूछताछ की जाएगी.
- ED दोपहर बाद इस पूरी कार्रवाई पर प्रेस रिलीज जारी कर सकता है.
बिहार में बढ़ा राजनीतिक तापमान
इस रेड के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. घोटाले में संलिप्त अधिकारियों के राजनीतिक संबंधों की भी जांच हो सकती है. कई बड़े नामों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है. वहीं विपक्ष इसे चुनाव के पहले का एजेंडे से जोड़कर देख रहा है. ED की इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों पर शिकंजा कसने की तैयारी जोरों पर है. अब सभी की नजरें दोपहर में आने वाली ED की आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हैं.







