स्वास्थ्य विषय पर स्टेट रैपिड रिस्पांस टीम के लिए उन्मुखीकरण कार्यशाला हुई। इसमें जलवायु परिवर्तन से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और उनके निराकरण के प्रयासों पर चर्चा की गई। स्टेट एक्शन प्लान बनाने पर भी विमर्श किया गया। मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि बदलते जलवायु के दौरान मनुष्य सहित पशु-पक्षियों को भी बीमारियां हो रही हैं, जिसे दूर करने की जरूरत है।
मानव स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए पर्यावरण, जलवायु और जीवों को ठीक रखना होगा। इनमें अन्योन्याश्रय संबंध है। बिहार में गंगा किनारे का लंबा क्षेत्र आज आर्सेनिक युक्त पानी वाला इलाका बन चुका है। जहां भूमिगत जल को भी ठीक करने की जरूरत है। कई बीमारियां पशु-पक्षी से भी हममें आ जाती हैं। इसीलिए हमंे वन हेल्थ यानी एक स्वास्थ्य कार्यक्रम लाने और इस पर कार्य करने की जरूरत है। तेलंगाना, राजस्थान के बाद बिहार देश का तीसरा राज्य है, जो जलवायु परिवर्तन से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों से आमजन को बचाने के लिए स्टेट एक्शन प्लान तैयार कर रहा है। एक स्वास्थ्य कार्यक्रम एक समग्र दृष्टिकोण है। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग सहित पशुपालन विभाग, पीएचईडी, शिक्षा विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, नगर विकास विभाग समेत कई विभागों को साथ आना होगा। इस पर खुली चर्चा करनी होगी और इसे दूर करने के प्रयास करने होंगे।
स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ रहना भी जरूरी
मंत्री ने कहा कि राज्य के चिकित्सक जलवायु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करें। भारत सरकार ने पशुओं में होने वाली कई बीमारियों को रोकने के लिए कई कार्यक्रम बनाए हैं। साथ ही स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ रहना भी जरूरी है। इसके लिए विभिन्न राज्य इस पर कार्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव से जागरुकता के लिए शिक्षा विभाग को भी इस कार्यक्रम से जुड़ना होगा, ताकि वे छात्रों को इस बारे में शिक्षित और जागरूक कर सकें। कार्यशाला में राज्य स्वास्थ्य समिति के कई अधिकारी एवं चिकित्सक भी मौजूद रहे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े तेलंगाना और राजस्थान से आए नोडल अधिकारियों ने बदलते जलवायु से मनुष्यों और पशु-पक्षियों को होनेवाले रोगों से बचाव को लेकर किये जाने वाले प्रयासों पर चर्चा की।







