केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) 10 से ज्यादा बड़े भगोड़े अपराधियों के खिलाफ इंटरपोल का सिल्वर नोटिस जारी कराने जा रही है. क्रमवार तरीके से ये नोटिस जारी कराए जाएंगे. अवैध तरीके से विदेश में संपत्ति का पता लगाने के लिए इस तरह के नोटिस का विचार सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया था. सीबीआई इस बारे में आर्थिक अपराधियों के साथ विदेश में रह रहे बड़े अपराधियों की जन्म कुंडली एक बार फिर तैयार कर रही है.
इंटरपोल ने अब दूसरे देश में अवैध रूप से जमा की गई संपत्तियों का पता लगाने के लिए अपने नोटिस की श्रेणी में सिल्वर नोटिस को शामिल किया है. इसके पहले इस बाबत जानकारी साझा करने के लिए म्युचुअल असिस्टेंट लीगल ट्रीटी (एमएएलटी) का प्रयोग किया जाता था. अब इसे प्रमुख तौर से नोटिस में शामिल कर लिया गया है. इस नोटिस के जारी होने के बाद इंटरपोल के सदस्य देश जिस व्यक्ति के बारे में जानकारी मांगी गई है उसके द्वारा अपने-अपने देश में जमा किए गए धन और खरीदी गई संपत्तियों आदि की जानकारी साझा करेंगे. इंटरपोल ने पायलट चरण के तौर पर पहले नोटिस जारी कर दिया है और नवंबर 2025 से इस बाबत पूरी तरह से नोटिस जारी किए जा सकेंगे.
पीएम मोदी ने दिया था सुझाव
भारत में आर्थिक अपराधियों द्वारा धन को विदेशों में जमा करने, संपत्ति अर्जित करने तथा बड़े अपराधियों द्वारा हवाला के जरिए पैसे विदेश मंगवाने के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये एक विशेष प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया था. इंटरपोल की भारतीय शाखा द्वारा इस बाबत अनेक बार यह मामला इंटरपोल असेंबली में भी उठाया गया. अन्य सदस्य देशों के विचार विमर्श के बाद अंततः इंटरपोलिस सिल्वर नोटिस जारी कर दिया. पहले नोटिस इटली द्वारा एक माफिया की बाबत जानकारी मांगे जाने को लेकर जारी किया गया है.







