पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले की आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने 10 सितंबर को सुनवाई टाल दी थी।
दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल को राज्य सरकार और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर दी थी। इन्हें 2016 में अपॉइंट किया गया था।
कोर्ट ने कर्मचारियों को 7-8 साल के दौरान मिली सैलरी 12% इंटरेस्ट के साथ लौटाने के निर्देश भी दिए थे। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में 33 याचिकाएं लगाई गई हैं। आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं में बंगाल की ममता सरकार की याचिका भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई को हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई को शिक्षकों को नौकरियों से तत्काल हटाने के फैसले पर रोक लगाकर बंगाल सरकार को राहत दी। कोर्ट ने कहा कि सभी भर्तियां रद्द करना नासमझी होगी। वैध नियुक्तियों को अवैध नियुक्तियों से अलग किया जाना चाहिए।
सरकार ने कहा कि CBI रिपोर्ट में भी लगभग 4,000 नियुक्तियों में अनियमितता का आरोप लगाया गया है। न तो SSC और न ही CBI ने कभी बताया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में घोटाला था। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को भर्तियों में शामिल अधिकारियों की जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। हालांकि, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
घोटाले के दो चर्चित चेहरे

- पश्चिम बंगाल सरकार ने 2016 में स्टेट लेवल सिलेक्शन टेस्ट-2016 (SLCT) के जरिए सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ भर्ती किया था। तब 24,640 रिक्त पदों के लिए 23 लाख से अधिक लोगों ने भर्ती परीक्षा दी थी।
- इस भर्ती में 5 से 15 लाख रुपए तक की घूस लेने का आरोप है। मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट को कई शिकायतें मिली थीं। भर्ती में अनियमितताओं के मामले में CBI ने राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी और SSC के कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। अर्पिता पेशे से मॉडल थीं।
बंगाल सरकार ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक सैलरी देंगे बंगाल सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद कहा था कि वह उन सभी 25,753 शिक्षकों और नॉन टीचिंग स्टाफ को वेतन का भुगतान करेगी, जिनकी नियुक्तियां रद्द की गई हैं। राज्य सरकार ने कहा कि सभी कर्मचारियों ने लगभग लंबे समय तक काम किया है। इसलिए मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक सभी को सैलरी दी जाएगी।







