केंद्र सरकार ने पहली बार मणिपुर में एंटी ड्रोन मीडियम मशीन गन के इस्तेमाल की मंजूरी दी है। यह फैसला 1-3 सितंबर के बीच राज्य में दो ड्रोन हमलों के बाद लिया गया।
मणिपुर में इंफाल जिले के सेजम चिरांग गांव में 3 सितंबर की शाम उग्रवादियों ने ड्रोन अटैक किए थे। जिसमें में एक महिला समेत 3 लोग घायल हो गए थे। वहीं 1 सितंबर को सेजम चिरांग गांव में भी ड्रोन से हमला किया गया था। जिसमें दो की मौत और 9 घायल हुए थे।
ये आशंका जताई जा रही है कि कुकी उग्रवादियों को ड्रोन वॉरफेयर के लिए म्यांमार से टेक्निकल सपोर्ट और ट्रेनिंग मिल रही है, या वे सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं।
मणिपुर सरकार ने इन ड्रोन अटैक की जांच करने के लिए हाई लेवल कमेटी का गठन किया था।
पुलिस डीजी बोले- पहाड़ी इलाकों में केंद्र की तरफ से सुरक्षाबलों की 198 कंपनियां मौजूद पुलिस के डायरेक्टर जनरल राजीव सिंह ने कहा था कि यह ड्रोन हमला एक नई घटना है। हम इसे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। हमने दिल्ली में NSG के डायरेक्टर जनरल और उनकी टीम से बात की है। कई अन्य विशेषज्ञ भी आ रहे हैं और हमने ड्रोन हमलों की जांच और इन्हें रोकने के लिए एक समिति भी बनाई है।
हमारे पास इन्हें रोकने के कुछ उपाय हैं, जिन्हें हम लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा जिन पहाड़ी इलाकों में हमले हुए हैं, वहां हमारे अभियान जारी हैं। मामले में हमें केंद्र भी पूरा समर्थन मिल रहा है। केंद्रीय बलों की लगभग 198 कंपनियां यहां मौजूद हैं।

ड्रोन हमले के बाद गांव के सभी 17 परिवार भागे इंफाल वेस्ट जिले के कौत्रुक गांव में ड्रोन अटैक के बाद दहशत है। यहां के सभी 17 परिवार गांव छोड़कर भाग गए हैं। सभी अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सुरक्षित जगहों जैसे इंफाल, खुरखुल और सेक्माई चले गए हैं। लोगों में डर है। उन्हें अंदेशा है कि एक बार फिर बड़े स्तर पर हिंसा भड़क सकती है।
कौत्रुक निवासी प्रियोकुमार ने बताया कि गांव में अब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए हैं, जिससे सभी ने डर कर गांव छोड़ दिया है। इस बीच, कौत्रुक और आसपास के क्षेत्रों के छात्रों को डर है कि हिंसा भड़कने के कारण कॉलेज फिर से बंद हो सकता है।
कुकी-जो संगठनों की मणिपुर में कुकीलैंड की मांग कुकी-जो समुदाय के लोगों ने 31 अगस्त को मणिपुर के चुराचांदपुर, कांगपोकपी और टेंग्नौपाल में रैलियां निकालीं थी। इन संगठनों की मांग है कि मणिपुर में अलग कुकीलैंड बनाया जाए, जो केंद्र शासित प्रदेश हो। इन संगठनों का कहना है कि पुडुचेरी की तर्ज पर विधानसभा के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश बनाना ही राज्य को जातीय संघर्ष से बाहर निकालने का इकलौता रास्ता है।
हालांकि, मणिपुर सरकार का कहना है कि ऑडियो क्लिप में मुख्यमंत्री की आवाज से छेड़छाड़ की गई है। यह हिंसा से प्रभावित राज्य में शांति की पहल को पटरी से उतारने के लिए किया जा रहा है।

मई 2023 से जारी हिंसा में 200 से ज्यादा लोग मारे गए मणिपुर में 3 मई, 2023 से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसा चल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिंसा की अब तक 226 लोगों की मौत हो चुकी हैं। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं।







