भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चार दिवसीय अमेरिका के दौरे पर गए, जहां पर रक्षा सहयोग और वैश्विक मुद्दों समेत कई विषय पर दोनों देशों की बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई. दोनों देशों की ओर से कहा गया कि भारत और अमेरिका चाहे तो मिलकर वैश्विक शांति और समृद्धि सुनिश्चित कर सकते हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार एक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण करना चाहती है, और इसके लिए वो लगातार काम कर रही है.
भारत और अमेरिका स्वाभाविक सहयोगी हैं, जो नियति से मजबूत साझेदार हैं और यह सहयोग लगातार आगे ही बढ़ रहा है. भारत – अमेरिका पहले से सैन्य पार्टनर भी रहे हैं. कई बार दोनों देश की सेना ने युद्धाभ्यास भी किया है. हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पिछले कई सालों से दोनों देश आपसी सहयोग के साथ काम भी कर रहे हैं.
2027 तक भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था
रक्षा मंत्री के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व के तहत वैश्विक मंच पर भारत का कद बढ़ा है. पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बातों पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन आज भारत की बात पूरी दुनिया बड़े ध्यान से सुनती है, और कई जगहों पर तो अब अमल भी किया जाने लगा है. 2014 से पहले भारत में निवेश ‘नाज़ुक पांच’ देशों में से एक कहा जाता था, और आज भारत दुनिया की ‘शानदार पांच’ अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत भी बन चुका है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत साल 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. देश की सरकार ने ये सुनिश्चित किया कि किसी भी हाल में कोविड-19 महामारी के बाद अन्य देशों की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए काफी प्रयास और काम किया गया. भारत की सरकार 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने में सफल रही है. हाल के आंकड़ों के मुताबिक खुदरा मुद्रास्फीति पांच साल के निचले स्तर 3.54 प्रतिशत पर आ चुकी हैं. इसके साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार 675 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.
600 से 21000 तक पहुंचा भारत का रक्षा निर्यात
रक्षा मंत्री ने अमेरिकी दौरे पर कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा लगातार कदम उठाए जा रहे हैं, जो कि काफी सराहनीय हैं. 5,000 से ज़्यादा वस्तुओं वाली सकारात्मक स्वदेशीकरण से काम किया जा रहा है. सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि अत्याधुनिक रक्षा वस्तुओं का निर्माण भारत भूमि पर घरेलू कंपनियों हीं करें. मोदी सरकार के आने से पहले देश की रक्षा की स्थिति उतनी मजबूत नहीं थी. मोदी सरकार के आने से पहले भारत की ओर से रक्षा निर्यात मात्र 600 करोड़ रुपये का था.
जब भारत अपने यहां वस्तु बना सकता है, तो फिर उसके लिए बिक्री करने की भी जरूरत है. मोदी सरकार के आने के बाद देश ने विकास के काम किए हैं. इसी के कारण अब भारत की ओर से रक्षा निर्यात बढ़कर 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है. भारत में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों के कारण ही देश में स्टार्ट-अप की संख्या 1.20 लाख हो गई है, जो वर्ष 2014 में लगभग 400 के आसपास थी. राजनाथ सिंह ने कहा कि “हम विकसित भारत को एक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध राष्ट्र बनाना चाहते हैं”. इसके लिए सरकार तेज गति से कार्य कर रही है.
फ्लोरिडा में संपर्क अधिकारी तैनात करेगा भारत
अमेरिकी दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्ष सचिव लॉयड ऑस्टिन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी हुई. जिसमें कई मामलों पर सहमति बनी. रक्षा मंत्री की इस यात्रा से भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत और व्यापक होने की उम्मीद की गई. इसके साथ ही द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, औद्योगिक सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर भी बात बनी है.
भारत और अमेरिका के बीच आपूर्ति सुरक्षा व्यवस्था (एसओएसए) के सफलतापूर्वक समापन पर भी हर्ष व्यक्त किया गया. आपूर्ति सुरक्षा व्यवस्था (एसओएसए) दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों को एक साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित भी करता है, और आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ावा देने का काम करता है. भारत के अनुसार अमेरिका के फ्लोरिडा में मुख्यालय विशेष संचालन कमान में प्रथम संपर्क अधिकारी की तैनाती भी सुनिश्चित किया जाएगा.
भारत- अमेरिका के संबंध काफी मजबूत
भारत और अमेरिका की ओर से क्वाड पहल, इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस को क्रियान्वित करने में हुई प्रगति की सराहना की गई और हिंद महासागर क्षेत्र में भागीदारों के लिए मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस को बढ़ाने के लिए भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना हुई. संयुक्त समुद्री बलों (सीएमएफ) में वर्तमान भारतीय भागीदारी का स्वागत किया गया और कहा गया कि वर्ष 2025 में भारत सीएमएफ के संयुक्त टास्क फोर्स 150 मुख्यालयों में भारतीय नौसेना कर्मियों की तैनाती भी करेगा.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सचिव ऑस्टिन ने दोनों देशों के बीच रक्षा में नवाचार संबंधों की स्थापना के लिए भारत-अमेरिका रक्षा त्वरण पारिस्थितिकी तंत्र (इंडस-एक्स) के प्रयासों की भी सराहना की गई, इसके साथ ही स्टार्ट-अप, उद्योग, शिक्षा और सरकारों में मजबूत नेटवर्क स्थापित करने, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी लाने और दोनों पक्षों की युद्ध-लड़ने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इंडस-एक्स की तारीफ की गई.
भारत में होगा जीई 414 एयरो-इंजन का निर्माण
वाशिंगटन डीसी में यूएस इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम की ओर से आयोजित उद्योग गोलमेज सम्मेलन में अमेरिकी रक्षा कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बातचीत की और इस दौरान भारत में रक्षा क्षेत्र में उभरते विभिन्न सह-विकास और सह-उत्पादन अवसरों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की.
भारत सरकार के प्रगतिशील सुधारों ने अमेरिका सहित कई विदेशी मूल के उपकरण निर्माताओं को भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने, संयुक्त उद्यम विकसित करने और भारत को अपना वैकल्पिक निर्यात आधार बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया गया. भारत में जीई 414 एयरो-इंजन का नियोजित सह-उत्पादन भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा. इसके साथ ही दोनों देशों के रिश्ते को भी एक मजबूती मिलेगी.
अमेरिका के साथ काम करना चाहता है भारत
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता निर्माण और औद्योगिक साझेदारी के लिए रक्षा क्षेत्र में अमेरिका के साथ मिलकर कार्य करना चाहता है, जिसके दोनों देश आपसी तालमेल से आगे की ओर बढ़ सकें. वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन से मुलाकात के क्रम में उभरती भू-राजनीतिक स्थिति और कुछ मुख्य क्षेत्रीय सुरक्षा विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, और भारत और अमेरिका के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग परियोजनाओं और उन संभावित क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई, जहां कि दोनों देशों के उद्योग एक साथ कार्य कर सकते हैं.
भारत अमेरिकी निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग का स्वागत करने के साथ एक कौशल मानव संसाधन आधार, समृद्ध प्रो-एफडीआई और प्रो-बिजनेस इकोसिस्टम और विस्तृत घरेलू बाजार से समृद्ध भी है.राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत क्षमता निर्माण और एक स्थायी प्रौद्योगिकी और औद्योगिक साझेदारी के लिए रक्षा के क्षेत्र में अमेरिका के साथ मिलकर कार्य करना चाहत रखता है, जिससे उभरती चुनौतियों से निपटा जा सके.







