केंद्र सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है। इसमें बिहार के पंचायती राज मंत्री ललन सिंह, सूक्ष्म और लघु उद्योग मंत्री जीतन राम मांझी, और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
बिहार के सहयोगी दलों के नेताओं को नीति आयोग में सदस्य के रूप में शामिल करने के बाद बिहार को विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज देने की मांग पर दावा मजबूत होता हुआ दिखाई पड़ रहा है। माना जा रहा है कि बिहार के मंत्रियों को नीति आयोग में जगह दिए जाने के बाद आने वाले दिनों में बिहार को बड़ा तोहफा मिल सकता है।
नीति आयोग की नई टीम में कौन-कौन
केंद्र सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है। नीति आयोग की नई टीम के अध्यक्ष हमेशा की तरह प्रधानमंत्री होंगे। नई टीम के उपाध्यक्ष सुमन बेरी को बनाया गया है। इसमें चार सदस्य पूर्णकालिक हैं। बीके सारस्वत, डॉक्टर वीके पॉल, अरविंद विरमानी और प्रोफेसर रमेश चंद पूर्णकालिक सदस्य बनाए गए हैं। पदेन सदस्यों के तौर पर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान और निर्मला सीतारमण को शामिल किया गया है।

ललन सिंह, मांझी और चिराग बनाए गए आमंत्रित सदस्य
केंद्र सरकार में नीति आयोग के पुनर्गठन के बाद इस टीम में 11 लोगो को आमंत्रित सदस्य के रूप में जोड़ा है। इसमें बिहार के जदयू के नेता और केंद्र में मंत्री ललन सिंह, हम पार्टी के संरक्षक और मंत्री जीतन राम मांझी और लोजपा रामविलास के नेता और मंत्री चिराग पासवान को शामिल किया गया है।
इनके अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जेपी नड्डा, एचडी कुमारस्वामी, वीरेंद्र कुमार, राम मोहन नायडू, जुअल ओरम, अन्नपूर्णा देवी और राव इंद्रजीत सिंह शामिल किए गए है।
नीति आयोग ने बताया था बिहार को नही मिल सकता विशेष राज्य का दर्जा
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग सालों से होती रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुनार सहित नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और तमाम नेता केंद्र से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं।
नीति आयोग ने पिछले बार अपनी रिपोर्ट में यह बताया था कि जिन मापदंड पर राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है, उन मापदंडों के आधार पर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता। नीति आयोग की रिपोर्ट के बाद बिहार के तमाम नेताओं ने नीति आयोग से विशेष राज्य देने के मापदंड को बदलने की मांग करते रहे हैं ताकि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जा सके।

मांझी ने कहा था- नहीं दिया जा सकता विशेष राज्य का दर्जा
विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर तमाम पार्टी एक सुर में मांग करते रहे है पर पिछले दिनों जीतन राम मांझी ने विशेष राज्य के दर्जे दिए जाने पर सवाल खड़ा करते हुए नई बहस छेड़ दी थी। जीतन राम मांझी ने कहा था कि पहले ही नीति आयोग ने साफ मना कर दिया है कि किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिल सकता है। ऐसे में यह मांग ही उचित नहीं है।अब कोई पत्थर पर कितना भी माथा पीटे, ये उचित नहीं है।
आरजेडी ने कहा- बिहार के मंत्री कितने गंभीर, बैठक में पता चलेगा
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि नीति आयोग का उद्देश्य राष्ट्र और लोगों की सेवा के लिए सभी राज्यों को एक साथ काम करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करके सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना है। नीति आयोग मानता है कि एक मजबूत राष्ट्र मजबूत राज्यों से बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के तीन नेताओं को नीति आयोग का सदस्य बनाया गया है। अब यह विशेष राज्य का दर्जा विशेष करके दिलाने के प्रति कितनी गंभीरता दिखाते हैं। यह नीति आयोग की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।
कांग्रेस ने कहा- इस बार विशेष पैकेज ले नीतीश कुमार
कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञान रंजन ने कहा कि केंद्र में बैठे मोदी सरकार और एनडीए के नेता बिल्कुल यह नहीं चाहते कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले। यही वजह है कि पिछले दिनों विशेष राज्य के दर्जे पर टिप्पणी की थी। ये बीजेपी और मोदी सरकार की आवाज थी जो मांझी जी बोल रहे थे। आज अगर ये नीति आयोग का सदस्य बने है तो इससे कुछ होना जाना नहीं है एक विशेष आमंत्रण के रूप में वह सदस्य है बाकी उनका क्या चलेगा वह सबको पता है। नीतीश कुमार को इस बार मजबूत होकर विशेष राज्य का जो पैकेज है, वह बिहार के लिए लेना चाहिए।
जानिए क्या है नीति आयोग
नीति आयोग भारत सरकार का एक ऐसी संस्था है जो थिंक टैंक का काम करती है और केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों और नीतियों के बारे में जानकारी देती है। इस संस्था का गठन 2015 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव के माध्यम से किया गया था। इसकी अध्यक्षता प्रधान मंत्री और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभाओं और उपराज्यपालों द्वारा की जाती है। नीति आयोग केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेशों को भी प्रासंगिक सलाह देता है।







