महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर संशय भले ही जारी हो, लेकिन राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने सीट दर सीट अपने पत्ते खोलना शुरू कर दिया है। पिछले 24 घंटे में वे 6 लोकसभा सीटों (गया, जहानाबाद, नवादा, बक्सर, औरंगाबाद, जमुई) पर कैंडिडेट की घोषणा कर चुके हैं। राजद सुप्रीमो की इस मनमानी ने महागठबंधन में अपने सहयोगियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
लेफ्ट इसे गलत बता रहा है तो कांग्रेस पूरी तरह से इस मसले पर खामोश है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से लेकर प्रवक्ता तक सभी बस इतना कह रहे हैं कि सीट शेयरिंग की प्रक्रिया चल रही है। जल्द इसकी घोषणा हो जाएगी। वहीं, राजद का दावा है कि पहले फेज की सभी चार सीटें राजद के खाते में गई हैं। इसलिए प्रत्याशियों की घोषणा सभी की सहमति से की जा रही है।

सीट शेयरिंग की बात चल रही है
भाकपा माले का कहना है कि जब तक सीट शेयरिंग पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक सिंबल बांटना या कैंडिडेट की घोषणा करना गलत है। भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि अभी सीट शेयरिंग की बात चल रही है। अभी हम लोगों के साथ बात फाइनल नहीं हुई है। बिना सीट शेयरिंग के टिकट नहीं बंटना चाहिए। ये पूरी तरह गलत है।

लालू ही महागठबंधन में सुप्रीम अथॉरिटी
क्या लालू प्रसाद यादव की इस मनमानी का बिहार में महागठबंधन पर कोई असर पड़ेगा। इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि गठबंधन पर इसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ना तो कांग्रेस के पास और ना ही लेफ्ट की पार्टियों के पास कुछ ऑप्शन है। महागठबंधन के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ही हैं। उनका यही अंदाज रहा है। ये कोई पहली बार नहीं है। पहले भी कई चुनावों में वे ऐसा कर चुके हैं।
लालू प्रसाद यादव पहले अपने उम्मीदवारों को सिंबल दे देते हैं। इसके बाद अचानक किसी दिन सीट बंटवारे की घोषणा कर देते हैं। समस्या ये होती है कि लालू यादव की इस नीति के आगे सहयोगी दल गफलत में रहते हैं कि सीट शेयरिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे अपने कैंडिडेट को फाइनल करें।
सहयोगी के पास विकल्प नहीं, स्वीकार करना होगा लालू का फैसला
प्रवीण बागी कहते हैं कि बिहार में महागठबंधन में शामिल दलों के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं है। सब इसी भरोसे हैं कि लालू प्रसाद यादव के साथ हो लेते हैं तो उनके वोट से पार्टी कैंडिडेट को लाभ मिले। अगर वे अकेले लड़ेंगे तो उनके लिए जीतना मुश्किल होगा। हालांकि, गठबंधन टूटता है तो राजद को भी नुकसान होगा, लेकिन अन्य पार्टियों की तुलना में राजद का कम होगा।







