बिहार में ‘इंडी’ गठबंधन की पार्टियों के बीच पॉवर वार की स्थिति हो गई है। पहले तो सभी पार्टियां अपनी-अपनी दावेदारी कर रही थीं, लेकिन अब इनके बीच विरोध का स्वर दिखने लगा है। सीटों पर बातचीत फाइनल नहीं हुई है और बातें बंद कमरे से बाहर आने लगी हैं।
बुधवार को भाकपा-माले की लोकसभा चुनाव सीट शेयरिंग कमिटी ने तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद बयान जारी किया है। कहा है कि जदयू को गैरजरूरी वक्तव्य नहीं देने चाहिए। इससे ‘इंडी’ गठबंधन कमजोर हो सकता है।
यही नहीं, माले ने सीट शेयरिंग के लिए जल्द से जल्द ‘इंडी’ गठबंधन की बैठक की मांग भी की है। माले की इस मांग के मतलब हैं। मतलब इसलिए कि तेजस्वी से बातचीत के तुरंत बाद यह बयान माले ने जारी किया। साफ है कि गठबंधन के अंदर तनातनी बढ़ गई है।
बता दें कि ‘इंडी’ गठबंधन में अभी तक जदयू के अलावा किसी घटक दल ने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा नहीं की है कि वह 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जदयू की यह घोषणा प्रेशर बढ़ाने से लेकर जिद की हद तक दिख रही। राजद ने आधिकारिक रूप से जदयू की तरह नहीं कहा है कि उन्हें भी 16 या कितनी सीट ही चाहिए।
सीट फाइनल होने से पहले यह सब कैसे…
इसकी शुरुआत कांग्रेस-जदयू ने की, जब सीटों पर बातचीत फाइनल होने से पहले अरुणाचल प्रदेश की लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। कांग्रेस और जदयू ने एक-एक उम्मीदवार वहां घोषित कर दिया। बिहार विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर ने भी खुद के सीतामढ़ी से उम्मीदवार घोषित किए जाने की घोषणा सार्वजनिक रूप से कर दी। निश्चित रूप से नीतीश कुमार से अनुमति के बाद ही उन्होंने ऐसा किया होगा। इस सबके बीच नीतीश कुमार और लालू प्रसाद से सीपीआई के जेनरल सेक्रेटरी डी रजा की मुलाकात हुई। माले नेताओं की मुलाकात तेजस्वी यादव से हुई। बंद कमरे में तेजस्वी यादव ने भी नीतीश कुमार से बातचीत की। हालांकि नीतीश कुमार ने पहले मंगलवार, फिर गुरुवार को कहा कि समय पर सब हो जाएगा।
किशनगंज सीट पर तो कांग्रेस ही लड़ेगी अखिलेश
इससे पहले ‘इंडी’ गठबंधन की राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा है कि अगर हमें 4 सीटें मिलीं तो महागठबंधन को नुकसान होगा। किशनगंज में अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि इस सीट पर जदयू को दावा नहीं करना चाहिए।
बता दें किशनगंज में पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। तब के महागठबंधन में सिर्फ कांग्रेस से ही एक उम्मीदवार जीत पाया था। हालांकि अब उस सीट पर जदयू भी दावा कर रही है। गुरुवार को अखिलेश प्रसाद सिंह ने पटना में कहा कि किशनगंज सीट से कांग्रेस ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सीट बंटवारे में कोई पेंच नहीं है, बातचीत हो रही है। खरमास के बाद फाइनल हो जाएगा।
अभी क्या है सीट शेयरिंग की स्थिति?
अभी तक की राजनीतिक स्थिति यह है कि बिहार में ‘इंडी’ गठबंधन के अंदर सीपीआई ने तीन सीटों, माले ने पांच सीटों, कांग्रेस ने 9 सीटों की मांग रख दी है। जदयू ने 16 सीटों की जिद सामने कर दी है। राजद कितनी सीट पर लड़ेगी, यह पार्टी के किसी बड़े नेता ने सार्वजनिक नहीं किया है।
पार्टी सूत्र बता रहे हैं कि राजद भी 16 सीटों पर ही लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती है। दोनों पार्टियां 16-16 सीटों पर लड़ती हैं तो 8 सीटें बच जाती हैं। 8 सीटों में कांग्रेस, माले और सीपीआई के बीच बंटवारा होना है। मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी जुड़ती है तो एक सीट उसे दी जा सकती है। वजह कि सहनी, नीतीश कुमार से करीब हैं।
एक्सपर्ट मान रहे-बिखराव की ओर महागठबंधन
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि महागठबंधन में सीट शेयरिंग उलझा हुआ मसला बन गया है। कोई एक धुरी नहीं होने या नेताओं का समूह नहीं होने की वजह से सर्वमान्य फार्मूला तैयार नहीं हो पा रहा, जिस पर सभी की सहमति ली जा सके। इस वजह से पहली बैठक में जो बातचीत हुई थी, वहीं तक बातचीत है।
इस बीच जदयू ने उम्मीदवार भी घोषित कर दिया अरुणाचल में। जो छोटी पार्टियां हैं, वे काफी बढ़-चढ़ कर दावे कर रही हैं। उनके बड़े नेता नीतीश कुमार और लालू प्रसाद से मिल चुके हैं। लेकिन किसी नतीजे पर बातचीत नहीं पहुंची है। गठबंधन अब बिखराव की तरफ बढ़ रहा है। राहुल गांधी की यात्रा भी शुरू होने वाली है। अभी तक की स्थिति यह है कि महागठबंधन में काफी निराशाजनक स्थिति है।







