बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों बीमार चल रहे है. नीतीश कुमार के करीबियों के मुताबिक, सीएम को वायरल हुआ है, जिसकी वजह से पिछले एक सप्ताह से नीतीश कुमार किसी से नहीं मिले हैं. यहां तक की नीतीश कुमार के सबसे करीबी माने जाने नेताओं से भी मुख्यमंत्री ने मुलाकात नहीं की है. पिछले एक सप्ताह से बीमार होने की वजह से जीतन राम मांझी ने यह मांग की है कि नीतिश कुमार का हेल्थ बुलेटिन जारी होना चाहिए, लेकिन इन सभी चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी गठबंधन के अगुवा रहे नीतीश कुमार ने दिल्ली में कल यानी 6 दिसम्बर को होने वाली इंडी अलायंस की बैठक में जाने से मना कर दिया है. अब इंडी अलायंस की दिल्ली में 6 को होने वाली बैठक में लालू यादव, तेजस्वी यादव, ललन सिंह और संजय झा शामिल होंगे.
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पहले ही बैठक में शामिल नहीं होने का इशारा कर दिया गया है। ऐसे में अगुवा भी भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार का इस बैठक में शामिल नहीं होना काफी चौंकाने वाला है।
जदयू नेता यह कारण बता रहे
इधर, जदयू की ओर से सीएम नीतीश कुमार के जाने या नहीं जाने के विषय पर अब तक बयान नहीं दिया गया है। हालांकि, जदयू के नेता का कहना है कि सीएम नीतीश कुमार को डॉक्टर ने आराम करने की सलाह दी है। उन्हें वायरल बुखार हुआ था। इनदिनों उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इसलिए दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल नहीं हो रहे। जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा इस बैठक शामिल होंगे। इधर, राजद की ओर से पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव शामिल होंगे।
कांग्रेस की हार पर जदयू ने यह कहा…
3 दिसंबर को कांग्रेस जब तीन राज्यों में चुनाव हार गई तो जदयू की प्रतिक्रिया सामने आई थी। जदयू के वरीय नेता और मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा थाा कि यह नतीजे बेहतर भी हो सकते थे। इसको इंडी गठबंधन (I.N.D.I.A.) से मत जोड़िये। इंडी गठबंधन चुनाव में कहीं नहीं था। सिर्फ कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़ रही थी। यह इलाके कांग्रेस पार्टी के गढ़ माने जाते है। पिछले चुनाव में भी इन तीनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी थी। लिहाजा यह भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार है। इसका इंडी गठबंधन से कोई रिश्ता नहीं है। कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपने घटक दलों से दूरी बना ली थी। अब यह तय हो गया है कि कांग्रेस पार्टी अपने बलबूते पर भाजपा को पराजित नहीं कर सकती है।
वहीं नीतीश कुमार ने बिहार में 10 दिसंबर को होने वाली क्षेत्रीय परिषद की बैठक की तैयारी भी शुरू कर दी है. इस बैठक में देश की गृहमंत्री अमित शाह आ रहे है, लिहाजा बैठक के मद्देनजर चालीस से ज्यादा मजिस्ट्रेट की तैनाती का आदेश दिया गया है. जानकारी के मुताबिक, क्षेत्रीय परिषद की बैठक अमित की अध्यक्षता में होगी और यह कार्यक्रम राजधानी पटना हो रहा है, लिहाजा इस बैठक में नीतीश कुमार के शामिल होने की पूरी संभावना है.
अमित शाह की अध्यक्षता वाली बैठक में नीतीश कुमार के शामिल होने के बाद से एक बार फिर से कयासों का दौर शुरू हो चुका है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मोदी विरोधी नेताओं और दलों को एक मंच पर लाने वाले नीतीश कुमार ही बीमारी के बहाने बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं, जबकि जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज यानी मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक शामिल हो रहे हैं.
वहीं 24 घंटे के अंदर दिल्ली में होने वाली महागठबंधन की अति महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नही होंगे. ऐसे में सवाल तो उठेगा ही कि आखिर नीतिश कुमार क्या जाहिर करना चाहते हैं? और सवाल यह भी उठता है की आखिर नीतीश को हुआ क्या है…? क्या वास्तव में बीमार है नीतीश कुमार या दिल्ली की बैठक से दूरी है मजबूरी है.







