पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ 2019 के बाद पहली बार देश लौट रहे हैं। फिलहाल, UAE में मौजूद नवाज फैमिली के साथ लाहौर एयरपोर्ट पर उतरेंगे। उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N) ने अपने नेता के स्वागत की जबरदस्त तैयारियां की हैं।
कानूनी तौर पर 2018 में नवाज को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिया गया था। उन्हें जेल से ही इलाज के लिए लंदन जाने की मंजूरी दी गई थी। बहरहाल, फिलहाल फौज उनके साथ है और इसीलिए कानूनी दिक्कतें नहीं हैं। 24 अक्टूबर को उन्हें परमानेंट बेल के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पेश होना होगा।
नवाज को जेल भेजने वाले पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान इस वक्त खुद जेल में हैं।

1976 में की थी राजनीति की शुरुआत
शरीफ ने 1976 में पाकिस्तान मुस्लिम लीग पार्टी से जुड़ते हुए राजनीति की शुरुआत की थी। नवाज शरीफ ने तेजी से अपनी पहचान बनाई और 1981 में वह पंजाब के वित्त मंत्री बन गए। 1985 में शरीफ पहली बार पंजाब के मुख्यमंत्री बन गए। हालांकि इसके बाद उनके पीएमएल से रिश्ते खराब हो गए और उन्होंने अपनी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) बना ली।
1990 में नवाज शरीफ पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने गये। जल्दी ही शरीफ की तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान के साथ ठन गई। इसका नतीजा ये हुआ कि राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार और राजनीतिक अयोग्यता के आरोप में शरीफ को बर्खास्त कर दिया। हालाँकि कुछ महीने बाद मई 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को पीएम पद पर बहाल कर दिया।
1997 में दूसरी बार बने पीएम
साल 1997 में नवाज शरीफ दूसरी बार प्रधानमंत्री चुने गए। उनका ये कार्यकाल पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के सफल परीक्षण और भारत से अच्छे संबंध बनाने की कोशिश के लिए चर्चा रहा। हालांकि सबसे सामने भारत से अच्छे रिश्तों को हिमायती दिख रहे नवाज के कार्यकाल के दौरान ही कारगिल भी हुआ, जिसमें पाकिस्तान की हार ने नवाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ा दीं। परवेज मुशर्रफ ने उनका तखता पलट करते हुए सत्ता पर कब्जा कर लिया। 2013 में शरीफ तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने गए। अप्रैल, 2016 में पनामा पेपर्स लीक का मामला सामने आया। इसमें शरीफ परिवार पर कई आरोप लगे। जिसके बाद नवाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ीं और एक बार फिर ना सिर्फ उनका पीएम पद गया बल्कि उनको भी लंदन में 4 साल गुजारने पड़े।







