आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को जेल भेज दिया गया है। CID ने उन्हें 9 सितंबर को 371 करोड़ रुपए के स्किल डेवलपमेंट स्कैम में गिरफ्तार किया था। रविवार (10 सितंबर) को चंद्रबाबू को विजयवाड़ा कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
नायडू को विजयवाड़ा से 200 किमी दूर राजमहेंद्रवरम में राजामुंद्री सेंट्रल जेल ले जाया गया। वे यहां 23 सितंबर तक रहेंगे। सुरक्षा को देखते हुए उन्हें जेल की स्नेहा विंग में ऊपरी ब्लॉक में कैदी नंबर 7691 के साथ रखा गया है। कोर्ट ने उन्हें घर का खाना और दवाइयां उपलब्ध कराने का आदेश भी दिया है।
वहीं, चंद्रबाबू की गिरफ्तारी के विरोध में तेलुगु देशम पार्टी ने राज्य में बंद बुलाया है। कार्यकर्ता जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, सत्ताधारी पार्टी YSRCP के कार्यकर्ता चंद्रबाबू की गिरफ्तारी को लेकर जश्न मना रहे हैं। कई जगहों पर रविवार रात पटाखे फोड़े गए।
नायडू के जेल जाने पर आंध्र सरकार में मंत्री ने पटाखे फोड़े
चंद्रबाबू नायडू के जेल जाने के बाद YSR कांग्रेस सरकार में टूरिज्म मिनिस्टर रोजा सेल्वामणि ने अपने आवास पर पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। रोजा ने कहा- ये बस शुरुआत है। हम चंद्रबाबू नायडू के सभी गलत कामों का पर्दाफाश करेंगे। वो अपने जीवन में जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। 2014 से 2019 तक उनके सभी घोटालों का हमारे पास सबूत हैं।
TDP ने राज्य में बंद बुलाया, जनसेना ने समर्थन किया
नेता-अभिनेता पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ने TDP के बुलाए बंद का समर्थन किया है। पवन कल्याण ने सत्ताधारी YSRCP पार्टी पर विपक्षी पार्टियों को परेशान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी राज्य में एंटी-सोशल एक्टिविटी कर रही है।
शनिवार देर रात पवन कल्याण चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी के विरोध में अपने समर्थकों के साथ विजयवाड़ा जा रहे थे। बीच रास्ते में उन्हें पुलिस ने रोका। विरोध में वे सड़क पर ही लेट गए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया।

चंद्रबाबू बोले- राजनीतिक फायदे के लिए गलत आरोप में फंसाया गया
चंद्रबाबू के वकील ने कोर्ट को बताया कि राजनीतिक फायदे के लिए चंद्रबाबू पर गलत आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के प्रावधानों की बारीकियों के बारे में बताते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ कोई दमदार सबूत नहीं है।
उन्होंने कोर्ट से अपील की कि CID की तरफ से दाखिल की गई रिमांड रिपोर्ट को रिजेक्ट कर दिया जाए। इस पर कोर्ट ने माना है कि नायडू के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विश्वास करने की वजहें हैं। एक दिन में इनकी जांच नहीं की जा सकती।
371 करोड़ रुपए के स्कैम में किया गया गिरफ्तार
चंद्रबाबू नायडू को स्किल डेवलपमेंट स्कैम में गिरफ्तार किया गया है। CID ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। मामला लगभग 371 करोड़ रुपए घोटाले से जुड़ा हुआ है। CBI ने 9 दिसंबर, 2021 को स्किल डेवलपमेंट घोटाला मामले में FIR दर्ज की थी। इसमें 25 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
हालांकि, इस FIR में नायडू का नाम नहीं था। इस साल मार्च में CID ने स्किल डेवलपमेंट घोटाले की जांच शुरू की थी। CID का दावा है कि जांच में जो बातें सामने आई हैं, उनके आधार पर चंद्रबाबू को गिरफ्तार किया गया।
क्या है स्किल डेवलपमेंट घोटाला
- साल 2016 में तत्कालीन CM चंद्रबाबू नायडू ने बेरोजगार युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने के तहत आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APSSDC) की स्थापना की थी।
- APSSDC की 3,300 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए TDP सरकार ने सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया लिमिटेड और डिजाइन टेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की ग्रुप कंपनियों के साथ एक MoU साइन किया।
- इस करार के तहत सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया को स्किल डेवलपमेंट के लिए 3,300 करोड़ की लागत से छह एक्सिलेंस सेंटर स्थापित करना था।
- राज्य सरकार को प्रोजेक्ट के कुल लागत का 10 फीसदी भुगतान करना था, जबकि मदद के रूप में बाकी राशि सीमेंस और डिजाइन टेक को देना था।
CID ने जांच में कई खुलासे किए
CID ने अपनी जांच में पाया कि राज्य कैबिनेट से इस परियोजना को मंजूरी नहीं थी। इसके बावजूद बिना टेंडर के प्रोजेक्ट शुरू किया गया। MoU के तहत सीमेंस कंपनी को अपनी तरफ से प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट करना था। हालांकि, कंपनी ने अपनी तरफ से कुछ भी निवेश नहीं किया।
इसके उलट राज्य सरकार की तरफ से आवंटित 371 करोड़ रुपए विभिन्न शेल कंपनियां- एलाइड कंप्यूटर्स, स्किलर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नॉलेज पोडियम, कैडेंस पार्टनर्स और ईटीए ग्रीन्स में बांट दीं। इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
CID ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि साल 2018 में एंटी करप्शन ब्यूरो को इस घोटाले की शिकायत मिली थी। हालांकि, तब सत्ता में बैठे लोगों ने जांच रोकने की कोशिश की और राज्य सचिवालय से जरूरी डॉक्यूमेंट्स हटा दिए। वर्तमान सरकार की जांच से पहले GST इंटेलिजेंस विंग और IT डिपार्टमेंट भी घोटाले की जांच कर रहे थे।
आंतरिक जांच के बाद कंपनी ने प्रोजक्ट मैनेजर को निकाला
सीमेंस ग्लोबल कॉर्पोरेट ऑफिस ने आंतरिक जांच बैठाई, जिसमें पाया कि प्रोजेक्ट मैनेजर ने हवाला लेन-देन के रूप में प्रोजेक्ट का पैसा शेल कंपनियों को ट्रांसफर किया था। सीमेंस ग्लोबल ने आरोपी मैनेजर को नौकरी से निकाल दिया था।







