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विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति पर बिहार में घमासान

UB India News by UB India News
August 24, 2023
in खास खबर, पटना, राजभवन, शिक्षा
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विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति पर बिहार में घमासान
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बिहार के शिक्षा विभाग ने राज्य के पांच विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति के लिए नई अधिसूचना जारी की है। विभाग ने शिक्षा विभाग के सचिव बैद्यनाथ प्रसाद के हस्ताक्षर से पीआर नंबर 007376 (शिक्षा) 2023-24 के तहत अधिसूचना जारी की है। इसमें कहा गया है कि उम्मीदवारों के पास देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों में, सरकारी कॉलेज या एसोसिएशन में प्रोफेसर के रूप में 10 साल का शैक्षणिक अनुभव होना चाहिए। शिक्षा विभाग के इस कदम को राज्यपाल के अधिकार का हनन माना जा रहा है, क्योंकि वह सभी विश्‍वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं और उन्हें विश्‍वविद्यालय में वीसी नियुक्त करने का अधिकार है। इधर कुलपति सचिवालय ने भी राज्य के सात विश्वविद्यालयों के लिए कुलपतियों की नियुक्ति के लिए ऐसा ही किया। वीसी पद के लिए आवेदकों के लिए शर्तें और शर्तें दोनों विज्ञापनों में लगभग समान हैं, केवल आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि को छोड़कर। कुलपति सचिवालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, सात विश्वविद्यालयों में पद के लिए आवेदन जमा करने की तिथि 24 से 27 अगस्त के बीच है। जबकि शिक्षा विभाग के विज्ञापन में अंतिम तिथि 13 सितंबर है।

राजभवन और शिक्षा विभाग के बीच टकराव बढ़ने के आसार
कुलपति सचिवालय ने पटना विश्वविद्यालय, एलएनएमयू, केएसडी संस्कृत विश्वविद्यालय, बीआरएबीयू, जेपीयू, बीएन मंडल विश्वविद्यालय और एकेयू में वीसी के पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, जबकि शिक्षा विभाग ने केवल पांच यूनिवर्सिटी में कुलपति पद के लिए आवेदन मांगे हैं। ये यूनिवर्सिटी हैं केडीएस संस्कृत विश्‍वविद्यालय दरभंगा, भीमराव अंबेडकर बिहार विश्‍वविद्यालय (बीआरएबीयू) मुजफ्फरपुर, ललित नारायण मिथिला विश्‍वविद्यालय दरभंगा, पटना विश्‍वविद्यालय और जय प्रकाश विश्‍वविद्यालय छपरा के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। बिहार के शिक्षा विभाग और राज भवन के बीच चल रहे शह और मात के खेल के बीच माना जाने लगा है कि दोनों में टकराव और बढ़ेगा।

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बिहार के शिक्षा विभाग ने रोक दिया था वीसी और प्रो-वीसी का वेतन
इससे पहले, शिक्षा विभाग ने बीआरएबीयू, मुजफ्फरपुर के वीसी और प्रो-वीसी का वेतन भी रोक दिया था और बिहार के राज्यपाल से यह परिभाषित करने के लिए भी कहा था कि अगर राज्य सरकार प्रत्येक को 4000 करोड़ रुपये की धनराशि दे रही है तो बिहार के विश्‍वविद्यालय स्वतंत्र संस्थान कैसे हैं। सरकार जो विश्‍वविद्यालयों को पैसा देती है, वह करदाताओं का है।

राजभवन ने शिक्षा विभाग को दिया अपना आदेश वापस लेने का निर्देश
दरअसल, बिहार शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों बीआरए के कुलपति और प्रति कुलपति के वेतन पर रोक लगाते हुए उनके वित्तीय अधिकार को भी रोक दिया। इसके बाद राजभवन ने शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप पर विरोध जताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की। राजभवन ने विभाग को अपना आदेश वापस लेने के निर्देश दिए। राज भवन ने विभाग को कहा कि बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 के सेक्शन 54 में सरकार को विश्वविद्यालयों के ऑडिट का अधिकार दिया गया है। लेकिन, वेतन बंद करने, वित्तीय अधिकार रोकने और बैंक खाता फ्रीज करने का अधिकार नहीं है।

शिक्षा विभाग ने राजभवन के पत्र का यूं दिया जवाब
इधर, शिक्षा विभाग ने राजभवन के पत्र के जवाब में एक पत्र भेजा है। हालांकि विभाग ने वेतन रोकने के आदेश को अभी तक वापस नहीं लिया है। सूत्र बताते हैं कि शिक्षा विभाग ने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार सालाना विश्वविद्यालयों को 4000 करोड़ रुपए देती है, लिहाजा शिक्षा विभाग को विश्वविद्यालयों को उनकी जिम्मेदारी बताने, पूछने का पूर्ण अधिकार है कि वे इस राशि का कहां और कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं।

मुद्दे की गंभीरता पर सुशील मोदी ने उठाए सवाल
बहरहाल, मुद्दे को लेकर सरकार और राजभवन में टकराव को स्थिति उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शिक्षा विभाग के मनमाने फैसलों के कारण प्राथमिक स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक में अराजकता-अनिश्चितता की स्थिति है। उन्होंने कहा कि एक विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रतिकुलपति का वेतन रोकने के आदेश शिक्षा विभाग की मनमानी कार्रवाई के ताजा नमूने हैं। नीतीश कुमार को अपने अतिसक्रिय नौकरशाहों को नियंत्रण में रखना चाहिए, ताकि न शैक्षणिक वातावरण बिगड़े और न राजभवन से टकराव की स्थिति पैदा हो।
सुशील मोदी

सुशील मोदी ने कहा कि शिक्षा विभाग को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जो उसके अधिकार क्षेत्र में न हो। शिक्षा विभाग ने पहले विश्वविद्यालयों में चार साल का डिग्री कोर्स शुरू करने की कुलाधिपति-सह- राज्यपाल की पहल का विरोध किया और अब बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति-प्रतिकुलपति का वेतन रोकने की कार्रवाई कर अपनी हदें पार कर दी।

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