ऐसा लग रहा है कि बिहार में भी I.N.D.I.A. गठबंधन में सब-कुछ ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका परोक्ष संकेत भी दिया। 15 अगस्त के कार्यक्रम में जहां पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी भी मौजूद थे, और नीतीश कुमार के डिप्टी तेजस्वी यादव भी, इस प्रोग्राम में नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए हुए लालू-राबड़ी राज पर बड़ा हमला बोला। नीतीश ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले बिहार की हालत बहुत ख़राब थी, न रोज़ी-रोज़गार के मौक़े थे, न पढ़ाई लिखाई की सुविधा। लड़कियां तो घर से निकलने में भी डरती थीं। नीतीश ने कहा कि 2006 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से उन्होंने बिहार को बदल डाला है। अगले ही दिन वो दिल्ली आये और सीधे अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल गए, उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। नीतीश काफ़ी समय तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे थे, NDA गठबंधन का हिस्सा रहे थे। श्रद्धांजलि देने के बाद नीतीश ने कहा कि वह दिल से अटल जी का सम्मान करते हैं और आज भी उनको याद करते हैं। नीतीश ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी की वजह से ही वह NDA में शामिल हुए, उनके आशीर्वाद से ही मुख्यमंत्री भी बने। मुझे नहीं लगता कि नीतीश कुमार के पास अब बीजेपी के साथ लौटने का विकल्प बचा है, लेकिन उन्होंने इतनी बार पलटी मारी है, इतनी बार पलटी मारी है कि कोई भी दावे से कुछ नहीं कह सकता। पिछले कुछ हफ्तों के डेवलपमेंट देख लीजिए। पहले वो राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश से मिले। घंटों बात की। मैसेज गया कि वो हरिवंश के माध्यम से मोदी का मन टटोल रहे हैं। फिर उन्होंने लालू यादव के जमाने की सरकार की आलोचना की। आरजेडी को ये बात शूल की तरह चुभी। नीतीश कुमार अटल जी की समाधि पर फूल चढ़ाने पहुंच गए, ऐसा लगा कि नीतीश कुमार ये इंप्रेशन देना चाहते हैं कि उनको बीजेपी से कोई समस्या नहीं है। उनकी समस्या मोदी और अमित शाह से है। अपनी प्राइवेट बातचीत में वो कहते हैं कि अटल जी, आडवाणी जी उनको बहुत आदर देते थे, जो उन्हें मोदी और शाह से नहीं मिलता है। अब इन बातों का मतलब ये लगाया गया कि अगर हवा दोगे तो मैं लौट के आ सकता हूं। हालांकि मैं फिर कहूंगा कि इसकी संभावना बहुत कम है।
होश में रहो, नहीं तो सारा कच्चा चिट्ठा खोल दूंगा………….
बांकीपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर बयानबाजी तेज हो गई है. पार्टी के...







