I.N.D.I.A गठबंधन के दो राउंड की बैठक पटना और बेंगलुरु में हो चुकी है। अब मुंबई में 25-26 अगस्त को होने वाली बैठक को कई लिहाज से खास माना जा रहा है। इसमें कई निर्णय होने हैं। सबसे अहम है सीट शेयरिंग का फॉर्मूला।
बिहार के सीएम नीतीश कुमार जो इस पूरे गठबंधन के सूत्रधार रहे हैं, वो लगातार कहते आ रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कैंडिडेट के खिलाफ विपक्ष का एक उम्मीदवार मैदान में उतरे। वन इज टू वन के इस फॉर्मूले को वो बिहार से ही तैयार करना चाहते हैं।
जुलाई के महीने में नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बीच लगभग 6 से ज्यादा बार मुलाकात हुई। ज्यादातर बार नीतीश कुमार लालू से मिलने राबड़ी आवास पहुंचे। महागठबंधन के सूत्रों की मानें तो इन मुलाकातों के दौरान लोकसभा के सीटों का बंटवारा को लेकर चर्चा हुई और लगभग फाइनल हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू और आरजेडी 15-15 लोकसभा सीटों पर लड़ेंगी। कांग्रेस को आठ सीटें और भाकपा माले को 2 सीटें दी जाएंगी। यह बंटवारा जातिगत आधार, पिछले लोकसभा के प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। हालांकि इस पर फिलहाल कोई भी नेता औपचारिक रूप से कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
अब इस सीट बंटवारे के 3 तर्क समझिए
1.जेडीयू ज्यादा त्याग नहीं करेगी और आरजेडी उससे पीछे रहना चाहेगी नहीं
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के पास अभी 16 सांसद हैं। वे लोकसभा में विपक्ष का चेहरा बनने की जुगत में हैं। ऐसे में किसी भी सूरत में पार्टी अपने सिटिंग सीट से ज्यादा समझौता करना नहीं चाहेगी, जबकि दूसरी तरफ राजद के पास भले अभी एक भी सांसद नहीं हों, लेकिन उनकी जमीनी ताकत बिहार में लगातार बढ़ रही है। विधानसभा में आरजेडी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है। इस हिसाब से जेडीयू और राजद बराबर-बराबर सीटों पर लड़ना चाहेंगी।
2. 10 सीट में भाकपा माले और कांग्रेस के बीच बनाई जाएगी सहमति
कांग्रेस पिछले चुनाव में भी महागठबंधन का हिस्सा थी। तब कांग्रेस 9 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और मात्र एक सीट किशनगंज जीतने में सफल रही थी। वामपंथी दल भी अपने लिए सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी हैसियत बेहद कम है।
2019 के लोकसभा चुनाव में भाकपा माले 4 सीटों पर चुनाव लड़ीं थी। इनमें केवल एक सीट पर दूसरे स्थान पर रही थी। 1.4% वोट मिले थे। भाकपा माले के अलावा सीपीआई और सीपीआई (एम) का जनाधार बिहार में नगण्य है।
ऐसे में इस बार केवल भाकपा मामले के लोकसभा की 2-3 सीटें मिल सकती हैं। इसके लिए कांग्रेस की सीटों में एक-दो सीटें आगे पीछे हो सकती हैं।
3. बिहार से बंगाल, महाराष्ट्र और यूपी को साधने की कोशिश
महागठबंधन में चार बड़े राज्य हैं। यूपी, बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र। चारों राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस पर भारी हैं। लगभग कमोबेश एक जैसी स्थिति है।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि इस फॉर्मूले के आधार पर कांग्रेस को स्पष्ट मैसेज है कि जिन राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों का वर्चस्व है, वहां उन्हें सीटों के साथ समझौता करना होगा और छोटे भाई की भूमिका निभानी होगी। अगर विपक्ष को बेहतर रिजल्ट लाना है तो जिनका प्रभाव जिस प्रदेश में ज्यादा है, उस हिसाब से सीटों का बंटवारा करना पड़ेगा। अगर कांग्रेस हर प्रदेश में बिग बॉस बनते रहेगी तो इनका खेल बिगड़ेगा। कांग्रेस भी इस बात को समझती है कि सभी को साथ लेकर चलना है। जो पार्टियां जहां प्रभावी हैं उन्हें उनकी हैसियत के हिसाब से सीटें दी जाए। इसी के आधार पर फॉर्मूला निकाला जाएगा।
अब 2 पॉइंट में समझिए नीतीश की चाल, क्षेत्रीय दल किस तरह बिगाड़ सकते हैं खेल
I.N.D.I.A गठबंधन में अभी बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली के लगभग 12 क्षत्रप शामिल हैं। इनके पास लोकसभा की 90 सीटें हैं। इसमें मुख्य रूप से बिहार की जेडीयू के पास 16 सीटें, झारखंड के जेएमएम के पास 1 सीटें, महाराष्ट्र की शिवसेना (उद्धव गुट) के पास 18 और एनसीपी के पास 4 सीटें, पश्चिम बंगाल की टीएमसी के पास 23 सीटें, तमिलनाडु की डीएमके के पास 23 सीटें, जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 3 सीटें, पंजाब और दिल्ली में आप के पास 2 सीटें शामिल हैं।
185 सीटों पर BJP और क्षेत्रीय दलों के बीच मुकाबला, यहां कांग्रेस लिमिटेड
2019 में 185 सीटें ऐसी थी, जहां भाजपा और क्षेत्रीय दल नंबर-1 और नंबर-2 थे। इनमें मुख्य तौर पर यूपी की 74 सीटें, बंगाल की 39 सीटें, महाराष्ट्र की 10 सीटें, बिहार-15 सीटें, झारखंड और कर्नाटक से 6-6 सीटें हैं। इन 185 सीटों में 128 सीटों पर कांग्रेस का रोल लिमिटेड या बहुत कम था। इसमें खास कर यूपी की 74, पश्चिम बंगाल की 39, ओडिशा की 19 सीटें शामिल हैं। इस बार भी यहां मेन कॉन्टेस्ट बीजेपी और क्षेत्रीय दल के बीच होगा। कांग्रेस का यहां खास असर नहीं है।
यहां की 97 सीटें बदल सकती हैं लोकसभा की तस्वीर
2019 के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 97 लोकसभा की सीटें ऐसी हैं, जहां 2019 में क्षेत्रीय दल वर्सेज क्षेत्रीय दल का मुकाबला था। इनमें क्षेत्रीय दल ही नंबर-1 और नंबर-2 पर थे। बीजेपी और कांग्रेस लड़ी भी तो नंबर-3 और नंबर-4 रहीं। 43 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी और कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों के बीच मुकाबला हुआ था। अब अगर यहां भाजपा और क्षेत्रीय दलों के बीच सीधा मुकाबला होता है तो लोकसभा चुनाव में तस्वीर बदल सकती है। इन 97 सीटों में से मुख्य रूप से तमिलनाडु की 27 सीटें, महाराष्ट्र की 16 सीटें, बिहार की 16 सीटें और आंध्र प्रदेश की 25 सीटें शामिल हैं। बाकी की 13 अन्य क्षेत्रीय पार्टियों की हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु को मिला दें तो इन 43 सीटों पर गठबंधन पहले से ही है। बाकी के 54 सीटों पर काफी मुश्किल होने वाली है।
2014 में बीजेपी के जीतने की मुख्य वजह विपक्ष का एकजुट नहीं होना था। यही वजह थी कि बिहार में एनडीए को 31 सीटें मिली थीं। इसमें अकेले भाजपा 22 सीटें लाने में कामयाब रही। अब इसे मौजूदा स्थिति से समझिए। अगर आरजेडी, जेडीयू, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां अपना सिर्फ एक उम्मीदवार उतारती हैं तो ये बीजेपी के लिए मुश्किल कर सकती हैं। मुकाबला दिलचस्प होगा। नीतीश कुमार विपक्ष की आवाज हैं। जो देश में उसका रिफ्लैक्शन दिख रहा है।
जेडीयू ने कहा- सीट शेयरिंग की जगह वन इज टू वन बनाने की हो रही कोशिश
सीट शेयरिंग के सवाल पर जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने बताया कि सीट शेयरिंग पर फिलहाल वो कुछ नहीं कह सकते हैं। उन्होंने बताया कि INDIA गठबंधन की पूरी कोशिश वन इज टू वन फाइट की है। राज्यों के अंदर अगर राजनीति अंतर्विरोध है तो उसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि इसे समय रहते पाट दिया जाएगा।
बिहार में 2015 में गठबंधन में साबित कर दिया कि साथ में हम क्या कर सकते हैं। गठबंधन के घटक दल चाहे वामपंथ हों, कांग्रेस हों या आरजेडी सब एक ही काम के लिए लड़ रहे हैं। सीट शेयरिंग का समय से निदान निकल जाएगा। नीतीश उम्मीदवार नहीं, विपक्ष की आवाज हैं।
आरजेडी ने कहा- मुंबई की बैठक से पहले सब साफ हो जाएगा
मुंबई की बैठक से पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दिल्ली में मुलाकात हुई। आरजेडी सूत्रों की मानें तो इसमें सीट बंटवारे से लेकर गठबंधन के कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने बताया कि दोनों के बीच हर बिंदुओं पर चर्चा हुई है। महाराष्ट्र की बैठक से पहले सभी चीजें स्पष्ट हो जाएगी। सीट बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी वे इस पर फिलहाल कुछ नहीं कह सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में जेडीयू, आरजेडी और वामपंथी पार्टियां मजबूती के साथ चुनाव लड़ेंगी।
अभी जेडीयू के पास हैं लोकसभा की ये सीटें
बांका, भागलपुर, गया, गोपालगंज, जहानाबाद, झंझारपुर, काराकाट, कटिहार, मधेपुरा, मुंगेर, नालंदा, पूर्णिया, सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, वाल्मीकि नगर। कांग्रेस के पास लोकसभा की एक सीटें किशनगंज है।







