अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गुरुवार को 2020 का चुनाव पलटने की कोशिश के आरोप में कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। वॉशिंगटन के कोर्ट हाउस में करीब आधा घंटा सुनवाई चली। इस दौरान कोर्ट के बाहर ट्रम्प के सपोर्ट में और उनके खिलाफ प्रदर्शन होते रहे। कोर्ट ने केस में अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की है।
हालांकि, भारतीय मूल के जस्टिस उपाध्याय ने कहा कि ट्रंप को अगली सुनवाई के वक्त कोर्ट में हाजिर होने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें बिना यात्रा प्रतिबंध के रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई की शर्त यह है कि वह किसी भी गवाह के साथ मामले पर चर्चा नहीं करेंगे, जब तक उनके वकील उनके साथ न हों। इसके बाद वॉशिंगटन से न्यू जर्सी जाते वक्त ट्रम्प ने मीडिया से बात की।

ट्रम्प पर 5 महीने में तीसरा क्रिमिनल केस दर्ज
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा- ये अमेरिका के लिए बेहद दुख का दिन है। मुझे राजनीतिक प्रतिद्वंदी होने की सजा मिल रही है। वॉशिंगटन की बिल्डिंग और दीवारों पर लोगों ने पेंटिंग बना रखी हैं, जिसे देखकर मुझे दुख हो रहा है। पिछले 5 महीने में ये तीसरी बार है जब ट्रम्प पर क्रिमिनल केस दर्ज हुआ है।
मंगलवार को 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद कैपिटल हिल में हुई हिंसा के मामले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर क्रिमिनल केस दर्ज किया गया था। उन पर 4 आरोप लगाए गए हैं। इनमें देश को धोखा देने की कोशिश, सरकारी कामकाज में बाधा डालने की साजिश और जनता के अधिकारों के खिलाफ साजिश रचने जैसे आरोप हैं।

45 पेज की चार्जशीट, 20 साल जेल की सजा भी मुमकिन
2020 के अमेरिकी चुनाव के परिणामों को पलटने के ट्रम्प की कोशिशों की जांच कर रहे जस्टिस डिपार्टमेंट के स्पेशल काउंसिल जैक स्मिथ ने 45 पेज की चार्जशीट दायर की है। ट्रम्प पर जो आरोप लगाए गए हैं, उनमें से 2 चार्ज में जेल जाने का भी प्रावधान है।
देश का धोखा देने की साजिश के आरोप में ट्रम्प को 20 साल की जेल और लोगों के अधिकारों के खिलाफ साजिश रचने के मामले में उन्हें 10 साल की जेल की सजा हो सकती है।
ट्रम्प ने चुनाव को लेकर झूठ फैलाया
चार्जशीट में कहा गया है कि नवंबर 2020 में चुनाव होने के 2 महीने बाद तक ट्रम्प ने ये झूठ फैलाया कि चुनाव में धांधली हुई है और असल में वो ही इसे जीते हैं। ये आरोप झूठे थे और ट्रम्प ये बात जानते थे, लेकिन वो फिर भी ऐसा करते रहे जिससे देश में गुस्से और अविश्वास का माहौल बने और लोगों का चुनाव प्रक्रिया से विश्वास उठ जाए।

कैपिटल हिंसा मामले में अब तक 1100 आरोपी
केस में स्मिथ ने कहा- हम मामले में जल्द से जल्द सुनवाई पूरी करने की कोशिश करेंगे। 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर हुई हिंसा देश के लोकतंत्र पर हमला है। ये हमला झूठ के आधार पर उकसाया गया था। आरोपियों के झूठ की वजह से राष्ट्रपति चुनाव और सरकार के कामकाज में बाधा आई थी।
ट्रम्प के अलावा इस मामले में अब तक 1100 लोगों को आरोपी ठहराया जा चुका है। जस्टिस डिपार्टमेंट जल्द ही करीब 1 हजार लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर सकता है।
अब 4 पॉइंट्स में जानिए कैपिटल हिंसा क्या है?
1. अमेरिका में 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल यानी अमेरिकी संसद में ट्रम्प के समर्थकों ने हिंसा की थी। 3 नवंबर 2020 को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग में बाइडेन को 306 और ट्रम्प को 232 इलेक्टोरल वोट मिले। नतीजे सामने आते ही ट्रम्प और उनके समर्थकों ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए।
2. वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने में जुटी तो ट्रम्प के समर्थक संसद में घुस गए। वहां तोड़फोड़ और हिंसा की। इसमें एक पुलिस अफसर समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा के बाद ट्रम्प पर अपने समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा था।
3. 18 महीने तक मामले की जांच चली। पिछले साल दिसंबर में जांच कमेटी ने एक 845 पेज की रिपोर्ट तैयार की। इसमें ट्रम्प को दोषी ठहराया गया। उनके खिलाफ क्रिमिनल केस चलाने की सिफारिश की गई। इसके लिए 1000 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे। इसके अलावा 940 से ज्यादा लोगों पर भी आरोप लगाए गए। इनमें से 500 लोग अब तक अपना जुर्म कबूल कर चुके हैं।
4. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जांच कमेटी ने ट्रम्प पर राष्ट्रपति चुनाव में हार के फैसले को पलटने, विद्रोह भड़काने, आधिकारिक कार्रवाई में बाधा डालने, साजिश रचने, झूठे बयान देने और देश को धोखा देने के आरोप लगाए। इसके बाद कमेटी ने मामले को जस्टिस डिपार्टमेंट को रेफर कर दिया।

ट्रम्प पर 19 और केस में जांच जारी
इसके अलावा ट्रम्प पर 19 और केस चल रहे हैं। इनमें से आधे मामलों में उन पर राष्ट्रपति रहते हुए गलत आचरण के आरोप हैं। ट्रम्प पर चल रहे ज्यादातर केस 3 मामलों से जुड़े हुए हैं। पहला वित्तीय गड़बड़ी जिससे उन्होंने ज्यादा पैसे कमाए। दूसरा 6 जनवरी 2021 को संसद में हुई हिंसा में ट्रम्प की भूमिका और तीसरा 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में दखलअंदाजी की कोशिश।







