ओडि़शा के बालासोर जिले में शुक्रवार शाम कोरोमंड़ल एक्सप्रेस और बेंगलुरु–हावड़़ा एक्सप्रेस ट्रेन के पटरी से उतरने और एक मालगाड़़ी से टकराने से हुए भीषण रेल हादसे में मरने वालों की संख्या शनिवार को २८८ हो गई। इस हादसे में १‚१७५ यात्री घायल हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री धर्मंद्र प्रधान के साथ घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लिया। घटनास्थल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जांच जारी है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इससे पहले नई दिल्ली में प्रधानमंत्री ने स्थिति की समीक्षा बैठक की। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। भारतीय रेलवे ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। हालाकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि हादसा किन कारणों से हुआ लेकिन इसके पीछे तीन धारणाओं की चर्चा है–मानवीय चूक‚ तकनीकी गड़़बड़़ी या कोई गहरी साजिश। पूर्व रेल मंत्री एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे को ‘सदी का सबसे बड़़ा रेल हादसा’ बताया है। हालांकि भारतीय रेलवे के इतिहास का यह तीसरा सबसे बड़़ा हादसा है। यह बात पक्के तौर पर कही जा सकती है कि कवच सिस्टम (ऑटोमेटिक ब्रेकिंग सिस्टम) होता तो बालासोर हादसे को रोका जा सकता था। कवच होता तो दूरंतो का इंजन ४०० मीटर पहले ही रुक जाता। गौरतलब है कि साल भर पहले ४ मई‚ २०२२ को सिकंदराबाद जोन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल हादसा रोकने के लिए इंजनों को सुरक्षा का कवच देने की घोषणा की थी। यह डि़वाइस इंजन और पटरियों में लगा होता है। इसके प्रभाव वाले क्षेत्र में जैसे ही दो ट्रेन या इंजन आते हैं‚ सिस्टम ऑन होकर इंजन में ब्रेक लगाना शुरू कर देता है और ट्रेन रुक जाती है। रेलवे बोर्ड़ इस संकेत की वजह से हादसों पर नियंत्रण का दावा करता है‚ लेकिन अभी यह सिस्टम देश भर में चालू नहीं हो सका है। देश में १३‚२१५ रेल इंजन हैं‚ इनमें से सिर्फ ६५ में ही कवच सिस्टम अभी तक लगाया जा सका है। रेलवे के १९ जोन हैं‚ जिनमें से १८ जोन ऐसे हैं‚ जिनमें एक भी कवच सिस्टम नहीं है यानी कहा जा सकता है कि सुरक्षा के लिहाज से अपेक्षित संजीदगी नहीं है। कहना यह कि ‘मिशन रफ्तार’‚ ‘बुलट ट्रेन’ के सपने को पूरा करने की बजाय आम जन की आवाजाही के बनिस्बत सस्ते साधन को सुरक्षा के लिहाज से चाक–चौबंद किया जाना चाहिए। कवच जैसे उपायों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
वैभव सूर्यवंशी: प्रतिभा का उदय या अपेक्षाओं का दबाव? भारतीय क्रिकेट के सामने सबसे बड़ी परीक्षा………
भारतीय क्रिकेट में जब भी कोई असाधारण युवा प्रतिभा उभरती है, देश की करोड़ों उम्मीदें उसके कंधों पर आ जाती...







