राज्य में चौथा कृषि रोड़मैप मार्च महीने तक तैयार होगा। इसका शुभारंभ राष्ट्रपति के हाथों होगा। यह बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित बापू सभागार में आयोजित किसान समागम में कही। कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि के विकास के लिए रोडमैप बनाया गया। वर्ष २००८ में पहले कृषि रोडमैप पर काम शुरू हुआ। इसपर चार वर्षों तक काम चला। वर्ष २०१२–२०१७ तक दूसरे कृषि रोडमैप के आधार पर ५ साल काम हुआ। इसी तरह वर्ष २०१७ से लेकर इस वर्ष मार्च तक तीसरे कृषि रोडमैप पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि हमलोगों ने तय किया कि एक और कृषि रोडमैप यानी चौथा कृषि रोड मैप बनाकर उस पर आगे काम करेंगे। इस रोडमैप को तैयार करने को लेकर काफी चर्चा हुई है। कई लोगों ने भी आज अपनी राय रखी है। सभी लोगों से अपील है कि वे लोग अपनी राय लिखकर भी दे दें‚ ताकि सभी चीजों को ठीक ढंग से देख लिया जायेगा और उसके बाद फाइनल प्रारूप तैयार होगा। सभी की राय से चौथे कृषि रोडमैप पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में काफी काम हुआ है। हम शुरू से चाहते हैं कि राज्य में कृषि का विकास हो। उन्होंने कहा कि राज्य की ७५ प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। कृषि रोडमैप के कारण कृषि के क्षेत्र में काफी विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले यहां फसलों का उत्पादन काफी कम होता था‚ लेकिन अब हर चीज का उत्पादन बढा है। बिहार में मक्के का उत्पादन प्रति हेक्टेयर २७.३९ क्विंंटल से बढकर ५२.३६ क्विंटल हो गया है। गेहूं का उत्पादन प्रति हेक्टेयर २३.२५ क्विंंटल से बढकर ३०.७८ क्विंटल हो गया है। इसी तरह धान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर १२.३७ क्विंंटल से बढकर २४.९६ क्विंंटल हो गया है। बिहार में दूध‚ सब्जी और मछली का उत्पादन भी काफी बढा है। राज्य में पहले सिर्फ २.८८ लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता था। हमलोगों का लक्ष्य इसे बढाकर ८ लाख मीट्रिक टन करने का है। कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन के बाद वर्तमान में राज्य में मछली का उत्पादन ७.६२ लाख मीट्रिक टन हो गया है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में कई तरह के काम किये जा रहे हैं। हमने स्वयं सहायता समूह का गठन कराया और जीविका दीदी नामकरण किया। जीविका दीदियां कृषि और पशुपालन सहित अन्य जीविकोपार्जन के कार्य बेहतर ढंग से कर रही हैं। कई अन्य क्षेत्रों में भी जीविका की दीदियां अच्छा काम कर रही हैं। महिलाएं आगे बढें‚ इसको लेकर हमलोगों ने शुरू से प्रयास किया हैं। पहले सिर्फ पुरुष काम करते थे और महिलाएं घर में खाना बनाती थीं। महिलाओं का विशेष महत्व है। महिलाएं आगे बढेंगी‚ तो परिवार आगे बढेगा। आज १.३० करोड महिलाएं जीविका समूह से जुडी हुई हैं। १० लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है।
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों द्वारा उपेन्द्र कुशवाहा द्वारा नई पार्टी के गठन को लेकर पूछे गये प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उसका कोई मतलब नहीं है। यह उनकी इच्छा है। आप सोच लीजिये कि वर्ष २०२१ में वो हमलोगों के साथ आये और कहा कि अब हम साथ रहेंगे‚ लेकिन उनका अब मन किया‚ तो वो फिर चले गये। उनके जाने से कोई फर्क नहीं पडता है। इस बार वे कह रहे थे कि सब दिन के लिए आप के साथ रहेंगे‚ मुझे आने दीजिये। यह बात पार्टी के सब लोगों को ठीक नहीं लगती थी‚ फिर भी हमने लोगों को समझाया। अब इधर हाल में उन्हें क्या हो गया वो जानें। वर्ष २०२४ में होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दावेदारी को लेकर उपेंद्र कुशवाहा द्वारा दिये गये बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कौन क्या बोलता है‚ उसे आप समझ ही सकते हैं। यहां वो क्या करने और क्यों आये थे। यहां आने की जरूरत क्या थी। ऐसे ही पब्लिसिटी पाने के लिए कुछ–कुछ बोलते रहना है। हम आपलोगों से आग्रह करेंगे कि यह पब्लिसिटी की चीज नहीं है। हमलोगों को इससे कोई मतलब नहीं है‚ इसलिए हमलोगों से कुछ मत पूछिए। जहां जाना था‚ वो चले गये। उपेंद्र कुशवाहा से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल द्वारा की गयी मुलाकात के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमको क्या पता यह तो आप समझ ही सकते हैं।







