उत्तर बिहार को बाढ की विभीषिका से निजात दिलाने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि यदि नेपाल से आने वाले पानी को नियंत्रित करने के लिए वहां की सरकार काम नहीं करेगी‚ तो राज्य सरकार इस दिशा में अपने क्षेत्र में काम करायेगी।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को ‘समाधान यात्रा’ के क्रम में औरंगाबाद जिले में अलग–अलग विभाग के तहत चल रही विकास योजनाओं की प्रगति के संबंध में जिलास्तरीय समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं द्वारा कोसी विकास प्राधिकरण के गठन के लिए पटना हाईकोर्ट के निर्देश के संबंध में पूछे गये सवाल पर कहा कि नेपाल की नदियों से बिहार में बाढ़ आती है। इससे सबसे ज्यादा बिहार प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि नेपाल से बिहार का बहुत पुराना संबंध रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में जब मैं मंत्री था‚ तो उस समय सभी पार्टियों के लोगों ने इसको लेकर बैठक की थी। उसी समय इस मामले पर सहमति बनी थी। जब भी नेपाल के अधिकारी यहां आये हैं‚ तो हम उनसे रिक्वेस्ट करते रहे हैं कि इसको लेकर कार्य होने दीजिये‚ लेकिन यह नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि काफी पहले से बिहार सरकार इसको लेकर गंभीर है। मैं नेपाल के अधिकारियों से कहता आ रहा हूं कि पानी को नेपाल में नियंत्रित किया जाये‚ तो इससे आपका ही फायदा होगा। नेपाल का पानी बिहार में नहीं आये‚ इसको लेकर केंद्र सरकार भी कार्य करने को काफी पहले से तैयार थी। अभी थोड़ा बहुत ही काम हुआ है। नेपाल के पानी से बिहार प्रभावित नहीं हो‚ इसको लेकर कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय ने इस मामले में ठीक ही कहा है। मेरी सरकार इसको लेकर तभी से लगी हुई है‚ लेकिन अब तक नेपाल में कोई काम नहीं हुआ है। जितना जल्द यह काम पूरा होगा‚ उतना ही बिहार के लिए अच्छा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी निगरानी के लिए राज्य के अभियंता वहां पर हमेशा रहते हैं।
नेपाल सरकार ने यदि हमलोगों की बात मान ली होती‚ तो उत्तर बिहार बाढ़ से बहुत कम प्रभावित होता। उन्होंने कहा‚ ‘नेपाल सरकार यदि इसको लेकर काम नहीं करेगी‚ तो हमलोग अपनी तरफ से अपने इलाके में कार्य करेंगे। छोटी–छोटी नदियों को जोड़ने का भी प्रयास किया जायेगा‚ ताकि नेपाल से आने वाले पानी से बिहार का कम से कम क्षेत्र प्रभावित हो। इसको लेकर हमलोग लगे हुए हैं।’ मुख्यमंत्री ने बिहार के राज्यपाल बदले जाने के सवाल पर कहा कि इसको लेकर शनिवार को ही केंद्रीय गृह मंत्री ने मुझे सूचना दी थी। बिहार से जाने वाले राज्यपाल से भी मेरी बातचीत हुई थी। राज्यपाल फागू चौहान का बिहार में कार्यकाल साढ़े तीन वर्षों का ही रहा। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले २५ वर्षों से कोई राज्यपाल पांच साल तक नहीं रहा है। औरंगाबाद में मेडिकल कॉलेज की मांग के सवाल पर सीएम ने कहा कि मैं चाहता हूं कि बिहार में ज्यादा से ज्यादा मेडिकल कॉलेज खुले। इसको लेकर मैं कोशिश कर रहा हूं। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा में लड़कों से ज्यादा लड़कियों की संख्या के सवाल पर कहा कि यह बहुत ही खुशी की बात है। मेरी सरकार लड़कों और लड़कियों को आगे बढ़ाना चाहती है। समीक्षा बैठक में वित्त‚ वाणिज्य कर एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी‚ भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी‚ राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक कुमार मेहता‚ सांसद महाबली सिंह‚ विधान पार्षद‚ विधायक‚ मुख्य सचिव आमिर सुबहानी‚ पुलिस महानिदेशक आरएस भ^ी‚ संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव‚ प्रधान सचिव‚ सचिव‚ मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार‚ मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह‚ मगध प्रमंडल के आयुक्त मयंक बरबरे‚ मगध प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक क्षत्रनील सिंह‚ औरंगाबाद के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल और औरंगाबाद की पुलिस अधीक्षक स्वपना जी मेश्राम सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के प्रदेश में सरकार गिरने के बयान पर कटाक्ष करते हुए सोमवार को कहा कि जो लोग ऐसा कह रहे हैं‚ वे खुशी मनायें। मुख्यमंत्री ने कहा‚ ‘इन सब बातों पर हम ध्यान नहीं देते हैं। इन सब बातों पर हम कोई नोटिस नहीं लेते हैं।’ सूबे में नॉमिनल रेट पर लोगों को मिल रही बिजलीः मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां लोगों को नॉमिनल रेट पर बिजली उपलब्ध कराई जाती है। बिजली बिल में किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत पर सख्त कार्रवाई की जाती है। बिहार पहला राज्य है‚ जहां उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम शुरू किया गया है। इसकी देश भर में तारीफ हो रही है। राज्य सरकार ने इस साल बिजली के मद में ७८०० करोड़ रुपये के अनुदान का भुगतान किया है। लोगों को सहूलियत मिले‚ इसके लिए अलग–अलग श्रेणी में बिजली आपूर्ति की दर सुनिश्चित की गयी है।







