तुर्किये और सीरिया में पिछले दिनों आए भूकंप में मरने वालों की संख्या ग्यारह हजार की संख्या पार कर गई है‚ और अभी भी यह आंकड़़ा थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुदरती कहर से बर्बाद हुए तुर्किये और सीरिया को नाटो समेत तमाम देशों से हर मुमकिन मदद पहंच रही है। लेकिन नुकसान इतना व्यापक है कि तमाम देशों की अनथक मदद कम पड़़ती दिख रही है। भारत ने भी ‘ऑपरेशन दोस्त’ शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट करके बताया है कि ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत भारत तुर्किये और सीरिया में तलाश एवं राहत दल भेज रहा है‚ भूकंप प्रभावित क्षेत्र में एक फील्ड़ अस्पताल की व्यवस्था कर रहा है। पीडि़तों के लिए राहत सामग्री‚ दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खेप भेज रहा है। संकट की घड़़ी आगे बढ़कर मदद करना उदात्त मानवीय कर्त्तव्य है। कुदरती आपदा अप्रत्याशित होती है‚ जिसका मुकाबला तमाम देश मिल–जुल कर ही कर सकते हैं। मदद करने में तमाम मतभेदों को दरकिनार कर दिया जाना चाहिए।
भारतीय संस्कृति में मैत्रीभाव और ‘वसुधैव कुटुम्कम’ की भावना को हमेशा तरजीह मिली है। इन भावनाओं से यह देश अनंतकाल से प्रेरित रहा है। यही कारण है कि मदद का हाथ बढ़ाने में भारत कभी पीछे नहीं रहता। कोरोना काल में भारत ने अपनी ‘टीका मैत्री’ की कूटनीति के तहत तमाम जरूरतमंद देशों को मदद पहंुचाई थी। बेशक‚ तुर्किये से भारत के संबंध पाकिस्तान से उसके घनिष्ठ संबंधों के चलते जब–तब तनाव में रहे हैं‚ लेकिन यह ऐसा मौका नहीं है कि इस प्रकार के गुणा–भाग किए जाएं। मानवीय तकाजे को बिसराया नहीं जा सकता। और इस बात को भारत से अच्छा कौन जान सकता है। भारत में उदारता का भाव इस कदर उदात्त है कि उसने मदद में मतभेद‚ यदि कोई है भी‚ को हमेशा दरकिनार किया है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ पूरे विश्वास के साथ जिन देशों को लामबंद किया है‚ उनमें तुर्किये प्रमुख रहा है। पाकिस्तान के प्रभाव में ही उसने कई दफा भारत को असहज कर देने वाली कूटनीति अपनाई। दरअसल‚ वैश्विक मुस्लिम भाईचारे यानी उम्मा के नाम पर तुर्किये पाकिस्तान के पक्ष लेते ऐसे रुख अख्यितार किए जिनसे भारत असहज हुआ लेकिन यह समय ऐसा नहीं है‚ जब ऐसी बातों को याद किया जाए। आज तुर्किये में चारों ओर चीत्कार के साथदर्द और मातम पसरा है। सर्दी और बर्फबारी ने उनकी मुश्किलों के बीच व्यापक मदद की दरकार है‚ और भारत मदद में पीछ नहीं है।भारत का ‘ऑपरेशन दोस्त’ शुरू







