मकर संक्रांति का महत्व हिंदू धर्म में बहुत है। मान्यता के अनुसार इसी दिन के बाद से शुभ कार्यों की शुरुआत लोग करते हैं। दही-चूड़ा खाकर। राष्ट्रीय जनता दल की ओर से 14 जनवरी को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास में इस अवसर पर दही-चूड़ा के भोज का आयोजन किया गया है। हालांकि, लालू प्रसाद जब पटना में होते थे तब इस भोज की रौनक कुछ और होती थी।
इस बार उनके बेटे और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से इस भोज की रौनक होने वाली है। खुशखबरी यह कि तेजस्वी यादव जल्द ही पापा भी बनने वाले हैं। राजद कार्यकर्ताओं और तेजस्वी के शुभचिंतकों को इंतजार है कि नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को कब मुख्यमंत्री पद की बागडोर सौंपते हैं। अजीब बात यह कि राजद की ओर से राबड़ी देवी के आवास पर दही-चूड़ा का भोज 14 जनवरी को है और इसी दिन जेडीयू संसदीय दल के नेता उपेन्द्र कुशवाहा के आवास पर जेडीयू की ओर से दही-चूड़ा भोज का आयोजन रख दिया गया है। यह खिंचाव जैसी स्थिति के स्पष्ट संकेत हैं।
कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास के साथ मीटिंग
तनातनी के बीच उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास की मुलाकात मंगलवार को हुई है। इसे राजद ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को बताया भी है। तेजस्वी और भक्त चरण दास दोनों नाश्ता करते दिख रहे हैं। साफ है इस फोटो के जरिए बड़ा मैसेज दिया जा रहा है। मैसेज किसी और को नहीं नीतीश कुमार को है तेजस्वी की ओर से! नीतीश कुमार समाधान यात्रा पर हैं और तेजस्वी लिख रहे हैं ‘ हमारा प्रयास समस्या का समाधान’। तेजस्वी क्रिकेट खेलते हुए और बेडमिंटन खेलते हुए वीडियो पोस्ट कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि ‘वे समय को बर्बाद नहीं कर रहे सीखने में लगा रहे हैं।’

राजद देश की यात्रा पर नीतीश को भेजना चाहती और नीतीश बिहार यात्रा कर रहे
नीतीश कुमार कई आयोजनों में कह चुके हैं कि तेजस्वी यादव को ही आगे बिहार देखना है। राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह कह चुके हैं कि नीतीश कुमार को देश की यात्रा पर निकलना चाहिए। लेकिन राजद के लोग नीतीश कुमार को जैसे जबरन देश की यात्रा पर भेजना चाहते हैं ऐसा लग रहा है। इस बार जब से भाजपा का साथ छोड़ नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव के साथ गए और नई सरकार बनाई है तभी से यह चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार पीएम पद की रेस में हैं और बिहार में सीएम का पद तेजस्वी को सौंपेंगे।
चर्चा है कि दही-चूड़ा भोज के बाद नीतीश कुमार, तेजस्वी के हाथ बिहार की कमान सौंप सकते हैं! लेकिन जो लोग नीतीश कुमार को निकट से जानते हैं उन्हें ऐसा नहीं लगता। उन्हें लगता है कि नीतीश कुमार का मॉडल ब्यूरोक्रेसी के साथ कदमताल वाला मॉडल है और लंबे समय से उन्होंने इस तरह से शासन किया है। इसलिए वे कुर्सी के बिना नहीं रह सकते! उनके लिख ‘कुर्सी कुमार’ वाला व्यंग्य-शब्द भी गढ़ लिया गया है। नीतीश कुमार यह देख रहे हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कदम रुक नहीं रहे। वे ठंड में भी भारत जोड़ो यात्रा पर है। कांग्रेस नीतीश कुमार को पीएम पद के लिए मानने को तैयार नहीं है। यह बिहार के नेताओं के बयानों से भी साफ है।

नीतीश तीसरी बार राजद के साथ अहज- प्रेम कुमार मणि, पूर्व एमएलसी
नीतीश कुमार को नजदीक से जानने-समझने वाले पूर्व एमएलसी प्रेम कुमार मणि कहते हैं कि नीतीश कुमार जब-जब राजद के साथ हुए हैं और राजनीतिक समझौता किया है तब-तब मुश्किल में पड़े हैं। 1990 में भी मुश्किल में पड़े थे तब चौथे साल में अलग हो गए, 2015 में भी तीसरे साल में अलग हो गए, अब दो साल में ही नीतीश कुमार खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। जनता दल यू और राजद के नेताओं के बयान से लग रहा है कि दोनों दलों में भयानक बेचैनी है। नीतीश कुमार ने घोषणा कर दी है कि 2025 में चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ेंगे।
इस बयान से लगा कि खुद का विस्तार 2025 तक उन्होंने कर लिया है। वे तब तक सीएम रहेंगे। बड़ी बात यह कि लगता है उन्होंने समझ लिया है कि 2024 में कुछ खास नहीं होने जा रहा है। ये जैसे उन्होंने स्वीकार लिया है। 2025 तक का इंतजार वाला बयान राजद के लोगों को टू मच लग रहा है। लग रहा है कि नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव को सत्ता नहीं सौंपना चाहते हैं।
राजद के सुधाकर सिंह या विजय मंडल के बयान से अलावा राजद के अंदर जो बातें की जा रही हैं उस सब की खुफिया रिपोर्ट नीतीश कुमार ले रहे हैं। उन्हें सब मालूम है। नीतीश कुमार की स्थिति वैसी ही हो गई है जो 1979 में मोरारजी देसाई और चरण सिंह के बीच रस्साकशी से हुई थी। कांग्रेस ने चरण सिंह को तब समर्थन दे दिया था और सरकार गिर गई। वैसे ही संकट में नीतीश दिख रहे हैं। भाजपा इंतजार कर रही है कि वह इसके बाद आराम से आ जाएगी।







