बिहार विधानसभा की कुढ़नी विधानसभा सीट उपचुनाव के लिए प्रदेश की सत्ताधारी जेडीयू और विपक्षी पार्टी बीजेपी के उम्मीदवारों सहित अबतक कुल चार प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के मनोज कुशवाहा, जोकि प्रदेश में सत्ताधारी महागठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार हैं। बीजेपी प्रत्याशी केदार प्रसाद गुप्ता ने भी नामांकन दाखिल किया है। इस सीट पर सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होने के साथ ही यहां के राजनीतिक समीकरण की चर्चा शुरू हो गई है। चाय दुकान से लेकर चौक-चौपाल पर लोग आपसी बातचीत में सभी प्रत्याशियों की ताकत और कमजोरी पर बातें कर रहे हैं। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि कुढ़नी विधानसभा सीट पर राजनीतिक समीकरण क्या है।
कुढ़नी सीट पर कुशवाहा वोटर बनते हैं निर्णायक
मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 3,11,728 है। यहां पुरुष 1,64,474, महिला 1,46,507, थर्ड जेंडर छह और सेवा निर्वाचकों की संख्या 741 है। कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण इलाका के तौर पर देखा जाता है। कुल 3 लाख 11 हजार 728 मतदाता वाले इस इलाके की जातीय समीकरण की बात करें तो पहले नंबर पर लगभग 40 हजार मतदाताओं के साथ कुशवाहा जाति के वोटर हैं। इसी को ध्यान में रखकर जेडीयू ने मनोज कुमार सिंह उर्फ मनोज कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाया हैं।
सहनी समाज के वोटर हैं X फैक्टर
दूसरे नंबर पर वैश्य समाज के लोग आते हैं, जिनके मतदाता की संख्या करीब 33 हजार के आसपास है। इसी बात का देखते हुए बीजेपी ने केदार गुप्ता को एक बार फिर से अपना प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा 25 हज़ार मतदाताओं के साथ सहनी समाज तीसरे नंबर पर खड़ी है, जिनके भरोसे मुकेश सहनी वीआईपी पार्टी से स्वर्ण समाज से नीलाभ कुमार को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है।
महागठबंधन का खेल खराब कर सकते हैं ओवैसी के प्रत्याशी
चौथे नंबर पर करीब 23 हज़ार मतदाताओं के साथ यादव समाज के लोग आते हैं। इसके अलावा कोइरी और कुर्मी जाति के लोग भी अच्छी खासी संख्या में मौजूद हैं। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मतदाताओं की संख्या लगभग 19 प्रतिशत है, जिन पर चिराग पासवान की नजर है और वह अपने कार्यकर्ताओं को इन्हीं वोटरों को एकजुट कर बीजेपी को वोट डायवर्ट करने को लेकर क्षेत्र में सक्रिय हैं। कुढ़नी सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी लगभग 22 हज़ार के आसपास है, जिसपर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उम्मीदवार जिला पार्षद मुर्तजा अंसारी को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है।
वहीं आपको बता दें कि इस विधानसभा क्षेत्र में अगड़ी जाति के करीब 45 हज़ार मतदाता भी मौजूद हैं, जिनकी नाराजगी को बीजेपी को दूर करना है। अगर आरजेडी का उम्मीदवार होता तो मुश्किल हो सकती थी, मगर नितीश कुमार या फिर मुकेश सहनी के साथ क्या ये जाएंगे ये भी देखना कुढ़नी में दिलच्सप होगा। कुढ़नी उपचुनाव की तस्वीर साफ हो गई है।
कुढ़नी में एक-एक वोट की है झपटमारी
बीजेपी ने जेडीयू (महागठबंधन) के मनोज कुशवाहा के सामने पूर्व विधायक केदार प्रसाद गुप्ता को मैदान में उतार दिया, वहीं AIMIM और वीआईपी ने भी अपने उम्मीदवारों को नमांकन कराया है। एआईएमआईएम ने गुलाम मुर्तजा अंसारी को टिकट दिया, तो वीआईपी ने नीलाभ कुमार को। एआईएमआईएम और वीआईपी की उम्मीदवारी इस चुनाव का सबसे खास फैक्टर है।
दरअसल, यहां के वोट में इन दोनों का झपट्टा, नतीजा तय करेगा। ऐसा इसलिए भी कि यहां जीत- हार का अंतर बहुत कम रहा है। पिछले चुनाव में सिर्फ 712 वोट से जीत हुई थी। केदार गुप्ता, पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी के अनिल सहनी से सिर्फ 712 वोटों से हारे थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में केदार 11570 वोटों से जीते थे। तब, उनका सीधा मुकाबला मनोज कुशवाहा से हुआ था। अबकी उपचुनाव में भी फिर दोनों आमने-सामने हैं। अब बात करते है एआईएमआईएम के उम्मीदवार गुलाम मुर्तजा अंसारी की जो जिला पार्षद रहे हैं।
BJP को डैमेज कर सकते हैं नीलाभ कुमार
पार्टी के सामाजिक समीकरण के हिसाब से उनको मिलने वाले वोट महागठबंधन के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। मुर्तजा जितना वोट पाएंगे, महागठबंधन की परेशानी उतनी अधिक हो सकती है। और इसी अनुपात में बीजेपी राहत में होगी। गोपालगंज उपचुनाव में महागठबंधन (आरजेडी) उम्मीदवार करीब 1700 वोटों से हारे, जबकि एआईएमआईएम के उम्मीदवार को 12000 से ज्यादा वोट मिले थे। यह महागठबंधन (जेडीयू) के लिए राहत हो सकती है। पार्टी और उसके उम्मीदवार नीलाभ कुमार के सामाजिक समीकरण के हिसाब से मिलने वाले वोट, बीजेपी के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। नीलाभ भूमिहार हैं, जो बीजेपी के साथ माना जाता रहा है। वह जितना ज्यादा वोट पाएंगे बीजेपी की परेशानी उतनी अधिक हो सकती है। फिर तो तय है की कुढ़नी में दोनों प्रमुख दलों के लिए परेशानी खड़ी करेंगे। साथ ही जीत हार भी तय करेंगे।
बता दें कि मुजफ्फरपुर जिले की कुढ़नी विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 5 दिसंबर को मतदान होना है। इसके लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 नवंबर है जबकि उम्मीदवार 21 नवंबर तक नामांकन वापस ले सकते हैं। इस सीट पर मतगणना आठ दिसंबर को होगी। कुढ़नी विधानसभा सीट का इससे पहले प्रतिनिधित्व आरजेडी के अनिल कुमार सहनी करते थे। सीबीआई अदालत की ओर से धोखाधड़ी के एक मामले में सहनी को दोषी करार दिए जाने और तीन साल कैद की सजा सुनाए जाने के कारण इस सीट पर उपचुनाव अनिवार्य हो गया है।
कुढ़नी में BJP ने छेड़ा अति-पिछड़ा का सियासी राग, गिरिराज सिंह लव जिहाद पर हुए फायर
कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। महागठबंधन के अलावा बीजेपी नेताओं की ओर से लगातार बयानबाजी हो रही है। इसी क्रम में बीजेपी प्रत्याशी केदार गुप्ता के नामांकन में पहुंचे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अतिपिछड़ा राग छेड़ दिया।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का बयान
मीडिया से बातचीत में संजय जायसवाल ने नीतीश के बनाये अति-पिछड़ा आयोग पर सवाल उठाया है। उसके साथ ही हिन्दू अति-पिछड़ा और मुस्लिम अति-पिछड़ा समाज के हकमारी की बात कही है। संजय जायसवाल ने कहा कि जिन जातियों को अति-पिछड़ा में शामिल किया गया है, वो भारतीयों नहीं है। वो बाहरी मुस्लिम हैं। ऐसे में हिन्दू अति-पिछड़ा समाज कहां जाएगा। नीतीश कुमार को ये बताना होगा।
शाहनवाज का बयान
वहीं, बिहार में शराबबंदी को लेकर उन्होंने फिर से सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार शराबबंदी का नाटक कर रही है। ऐसे लोगो को टिकट देती है जिनकी शराब पीती तस्वीर वायरल हो रही है। संजय जायसवाल के साथ मौके पर मौजूद बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मुसलमानो से अपील है कि वो बीजेपी का साथ दें। उन्होंने कहा कि विरोधी आप सबको बीजेपी के नाम पर डराते हैं। लेकिन आप सब डरिये नहीं। भाजपा आप सबकी पार्टी है। उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान सिर्फ खुदा से डरता है, भाजपा से नहीं। वो सिर्फ खुदा से डरते हैं, इसलिए भाजपा में हैं।
सम्राट चौधरी का बयान
बिहार विधान परिषद ने नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि 2015 में कुढ़नी से बीजेपी चुनाव जीती थी। इस बार भी चुनाव जीतेंगे। महागठबंधन के उम्मीदवार को जिस तरह 2015 में हराया गया था। उसी तरीके से बीजेपी के उम्मीदवार केदार गुप्ता JDU उम्मीदवार मनोज कुशवाहा हराने का काम करेंगे। सम्राट ने नीतीश कुमार के चुनाव प्रचार करने के सवाल पर कहां कि बिहार में अप्रासंगिक हो चुके हैं। मोकामा में मात्र 1 हजार वोट आरजेडी का बढ़ा। इसका मतलब नीतीश कुमार के पास 1 हजार ही वोट है।
गिरिराज का बयान
उधर, दिल्ली में प्रेमिका को 35 टुकड़े करने वाली घटना पर बोलते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि ये कोई नई बात नहीं है। हजारों सरदारों की शहादत हो चुकी है। भारत में साजिश के तहत ये किया जा रहा है। गैर मुस्लिम लड़की को फंसाया जा रहा है। धर्म परिवर्तन नहीं करने पर टुकड़े कर दिये जाते हैं। बाकी टुकड़े-टुकड़े गैंग इस पर खामोश हैं।







