प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 नवम्बर से 16 नवम्बर‚ 2022 तक इंडोनेशिया की यात्रा पर होंगे जहां वह 17वें जी–20 देशों की शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। जी–२० की बाली में होने वाली यह शिखर बैठक काफी गहमा–गहमी वाली होने की संभावना है। यूक्रेन संकट के बाद इस बैठक के तीन आयाम तय किए गए हैं। खाद्य व ऊर्जा संकट‚ स्वास्थ्य क्षेत्र और डिजिटल ट्रांसफारमेशन।
अमेरिका व पश्चिमी देशों की तरफ से यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस को घेरने की पूरी कोशिश होगी। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को ऐलान किया है कि वह इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे बल्कि उनके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जाएंगे। दूसरी तरफ‚ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाडइन‚ ब्रिटेन के नये पीएम ऋषि सुनक‚ फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों‚ जर्मनी के चांसलर ओल्फ शोल्ज समेत अन्य वैश्विक नेता बाली पहुंचने की पुष्टि कर चुके हैं। कई बार भारत ने विश्व राजनीति को अपनी सांस्कृतिक आयाम से उसे एक बेहतर स्वरु प देने की पहल की है‚ अभी तक का सबसे अहम पहल योग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने से जुड़ा हुआ था‚ लेकिन जी २० का नेतृत्व भारत के लिए सबसे रोचक पल है। जी २० के रंगमंच को भारतीय प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक आधार दे दिया है। एक पृथ्वी और एक जगत। सम्भवतः इस सोच की सैद्धांतिक विस्तार की जरूरत सबसे अधिक अभी है। दुनिया युद्ध से तंग है।
जी २० सम्मेलन के शेरपा अमिताभ कांत के शब्दों में ‘भारत ने एक विश्व की बात अपनी सांस्कृतिक सोच के तर्ज पर रखी है जिसे हम इन्हीं भावनाओं के अनुरूप ही भारत ने अपनी अध्यक्षता की थीम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ रखी है। इसका आशय संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने से है। जी–२० के लोगो में भारत के राष्ट्रीय पुष्प कमल को भी जगह दी गई है‚ जो कठिन समय में वृद्धि और लचीलेपन का प्रतीक है। लोगो में ग्लोब पृथ्वी का प्रतीक है‚ जो भारत के पृथ्वी–हितैषी दृष्टिकोण का द्योतक है। लोगो और थीम मिलकर जी–२० में भारत के नेतृत्व के मर्म को पर्दर्शित करते हैं कि वह निर्विवाद रूप से एकजुट करने वाला शांतिदूत है।’ इसलिए भारत की विदेश नीति युद्ध नहीं बुद्ध के विचारों से बनी है और केवल भारत में साहस और दर्पण है जो दुनिया को दिखा सकता है‚ भारत के प्रधानमंत्री ने इस बात को दुनिया के सामने रखी भी। दरअसल‚ जी २० के सांस्कृतिक आयाम देशज विस्तार भी है। फेडरल आधार को मजबूती देने के लिए विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक इंद्रधनुषी ताने–बाने को भी मौका देने की व्यस्था की गई है। सैकड़ों आयोजन अलग–अलग राज्यों में भी होंगे। संस्कृति का आर्थिक विकास सेतु बनेगा। इसमें भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी है। चार महत्वपूर्ण शहर लखनऊ‚ आगरा‚ वाराणसी और प्रयागराज इसके रंगमंच बनेंगे। उत्तर प्रदेश भारत के संस्कृति का केंद्रबिंदु भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी योजना भी बना डाली है। उनके मुताबिक यह सम्मेलन उप्र के लिए अपार संभावनाएं खोलेगा। उन्होंने इस अवधि को ब्रांड़ यूपी को दुनिया के सामने पेश करने का अवसर करार दिया है।
दुनिया ‘नये भारत के नये उत्तर प्रदेश’ की क्षमता से परिचित होगी। जी–२० दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का संगठन है। यह समूह वैश्विक जीडीपी के ८० प्रतिशत‚ दुनिया की दो–तिहाई आबादी और करीब ५० प्रतिशत क्षेत्रफल का प्रतिनिधित्व करता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भिन्न–भिन्न पंथों‚ भाषाओं और संस्कृतियों के सबसे सशक्त प्रतिनिधियों में से एक है। विविधता‚ सौहार्द और सह–अस्तित्व की हमारी समृद्ध विरासत रही है। इन्हीं भावनाओं के अनुरूप ही भारत ने अपनी अध्यक्षता की थीम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ रखी है। इसका आशय संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने से है। जी–२० के लोगो में भारत के राष्ट्रीय पुष्प कमल को भी जगह दी गई है‚ जो कठिन समय में वृद्धि और लचीलेपन का प्रतीक है। लोगो में ग्लोब पृथ्वी का प्रतीक है‚ जो भारत के पृथ्वी–हितैषी दृष्टिकोण का द्योतक है। लोगो और थीम मिलकर जी–२० में भारत के नेतृत्व के मर्म को पर्दर्शित करते हैं कि वह निर्विवाद रूप से एकजुट करने वाला शांतिदूत है। विश्व अभी भी कोविड महामारी से उबरने में जुटा है।
सरकार का आत्मविश्वास और विदेश नीति में एक मजबूत समानता दिख रही है‚ जिसके तर्ज पर भारत ने विश्व राजनीति को अपने ढंग से परिभाषित करने की बात की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता की ७५ वर्षगांठ पर एक विकसित देश की रूपरेखा रखी और उम्मीद जताई कि २०४७ तक भारत एक विकसित देश के रूप में स्थापित रहेगा। यह बात अत्यंत ही अहम और चुनौतीपूर्ण है। क्योंकि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्होंने ५ महत्वपूर्ण शर्तों की भी बात कही। सबसे अहम सवाल विकास का है। महामारी ने बहुत देशों की कमर तोड़ दी है। भारत के पडोसी देश सहित दुनिया के कई देश आर्थिक संकट के दौर में है। आर्थिक विशेषज्ञ भारत की भी चिंता कर रहे थे‚ लेकिन भारत मजबूती के साथ संकट के बीच से निकलता गया। महामारी के बीच प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत सिद्धांत की बात रखी। इसकी आलोचना भी खूब हुई। मेक इन इंडिया पर मेड इन चीन मजबूती के साथ अपनी धाक बनाये हुए था‚ ऐसे हालत में कैसे संभव है कि भारत अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगाॽ
राजनीतिक बयान आर्थिक प्रगति में बुनियादी अंतर है‚ लेकिन २ वर्षों में यह दिखाई देने लगा कि भारत का आत्मनिर्भर संकल्प मजबूत बनता गया। विश्व राजनीति में हो रहे ध्रुवीकरण भारत के पक्ष में दिखने लगे। ग्रीन एनर्जी हो या हथियारों की खरीद–फरोख्त हर मुकाम पर भारत अपनी पहचान को स्थापित करता गया। दूसरा संकल्प अखंड भारत का भी है। अखंड भारत की सोच में कई पेच है। कई गलतफहमियां भी जुडी हैं। तीसरा‚ भारत की आर्थिक योजनाओं की मलाई अक्सर इलीट वर्ग समेट लेता था। इलीट वर्ग का निर्माण भी बहुत हदतक भाषा के तर्ज पर बनता था। संभव है कि जी २० सम्मेलन में शांति पथ का अनुसरण सफल नहीं हो पाए‚ युद्ध उसके बाद भी चलता रहे‚ लेकिन भारत की सोच दुनिया को प्रभावित जरूर करेगी। दुनिया एक शांतिपूर्ण विश्व की बात पर बल देगी। यही से विश्व गुरु का ढांचा दुनिया के लिए बनकर तैयार होगा‚ जिसमें विभाजन नहीं बल्कि एकरूपता होगी।







