कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया मार्क्सवादी कांग्रेस के साथ है बंगाल में‚ पर केरल में कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया मार्क्सवादी यानी सीपीएम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा नहीं‚ सीट जोड़ो यात्रा करार दिया है। उधर कांग्रेस ने सीपीएम को भाजपा की टीम बताया है। यूं कांग्रेस और सीपीएम दोनों बंगाल में साथ–साथ हैं। बंगाल से केरल तक के रास्ते में हालात बदल जाते हैं और दोनों एक दूसरे के खिलाफ हो जाते हैं‚ पर यूं ये एक दूसरे के साथ हैं।
कौन किसके साथ है से ज्यादा बड़ा सवाल है कि कब तक साथ है। भारतीय राजनीति को समझना बहुतै फन–फ्यूजिंग और उससे ज्यादा कनफ्यूजिंग है। कौन किसके साथ है‚ इस विषय से जुड़े कुछ सवाल जवाब देखें–
सवाल–नीतिश कुमार जी अभी कहां हैं।
जवाब– ताजा रुझानों के हिसाब से वह फिलहाल सेकुलर हैं और सेकुलर ही बने रहेंगे। और अभी वह सेकुलरों के सबसे बड़े नेता के तौर पर चिह्नित किए जा रहे हैं।
सवाल–यानी सेकुलरों का नेता वह बंदा हो सकता है‚ जो कुछ महीनों पहले सेकुलर विरोधी पार्टी के गठबंधन से चीफ मिनिस्टर बना हो।
जवाब–जी बिल्कुल हो सकता है‚ हो सकता है कि २०२४ से पहले एक बार फिर नीतीश कुमार सेकुलर विरोधी खेमे में आ जाएं‚ इस पर भी कोई बंदिश नहीं है।
सवाल–पंजाब के पूर्व कांग्रेस मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा ज्वाइन करनेवाले हैं‚ वो भी सेकुलर वाले थे‚ अब राष्ट्रवादी विचाराधारा के हो जाएंगे। यह सब क्या हैॽ जवाब–कोई बंदिश नहीं है जी। कोई कुछ भी हो सकता है। कहीं भी हो सकता है। नामीबिया के चीते भारतीय हो सकते हैं कि सेकुलर नेता राष्ट्रवादी और राष्ट्रवादी नेता सेकुलर हो सकते हैं। सवाल–पर चीता तो चीता होता है‚ उसे कहां कुछ पता होता है‚ नेता को तो सब कुछ पता होता है। जवाब–नेता को सब कुछ पता होता है कि पर वह कुछ भी ना जानने का ढोंग करता है। सीपीएम और कांग्रेस नेताओं को बंगाल में भी सब कुछ पता है और केरल में भी सब कुछ पता है। बस पब्लिक को ना पता होता कि जिन्हें वह कांग्रेस विधायक के तौर पर चुन रही है‚ वो सब भाजपा विधायक बनकर निकलेंगे‚ गोवा की कसम।







